
लोग बोलते हैं कि समस्या कामवासना है। समस्या कामवासना नहीं है, उसमें सचमुच समय की बर्बादी नहीं होती। समय की बर्बादी होती है रोमांस में, भावना और कल्पनालोक में। जिससे बहुत आकर्षण हो, उससे इंसान की तरह दो बातें कर लो — इतने में ही नशा उतर जाएगा। कोई सार्थक काम दो अपने आपको। यह अनुभव भी किया होगा कि जिन दिनों में कोई ज़रूरी काम रहता है, उन दिनों में ये सब चीज़ें आकर्षित नहीं करतीं।







आचार्य प्रशांत: जब मैंने ड्राइविंग सीखी थी, मैं छोटा था काफ़ी, लाइसेंस की उम्र भी नहीं थी, तभी घर पर एक


प्रश्नकर्ता: नमस्कारम आचार्य जी, पन्द्रह साल की उम्र है, पुरुषों के प्रति काफ़ी आकर्षित रहता हूँ। मुझे पता है कि समलैंगिकता एक विकार है। इस विकार का कैसे विगलन हो? कृपया इस पर मार्गदर्शन करें।

प्र: आचार्य जी, बहुत डिप्रेशन (अवसाद) में रहता हूँ, बहुत। अत्यधिक


प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा सवाल इस संदर्भ में है कि बचपन से मैं बच्चों के प्रति जो हिंसा होती थी उसे पढ़ती थी

आचार्य प्रशांत: हमारी खुशियाँ खा गयीं पृथ्वी को। जितना हम भोग रहे हैं उतना हमें खिला पाने के लिए पृथ्वी के पास हैं नहीं, तो हम पृथ्वी को ही खा गयें। और हम कम पड़ रहे थे तो हमने अपनी तादाद बढ़ा ली, ताकि हम बहुत सारे हो जाएँ पृथ्वी…



आचार्य प्रशांत: जाओ किसी भी आम लड़के से पूछ लो वह किसलिए विवाह करता है। सम्मानजनक काम करने के लिए तो वह विवाह करता नहीं। वह काम सारे ऐसे ही करता है जो अगर वह विवाह के बिना कर दे तो तुम कहोगे — जलील, लुच्चे, लफंगे गायब हो जा


आचार्य प्रशांत: डर के और भी फायदे होते हैं। एक मैंने गाना सुना था। गाने में लड़की-लड़का अकेले हैं, अंधेरी रात, बादल गरज रहे, वर्षा (हो रही)। और फिर वो गाते हैं: ‘बादल गरजा सिमट गए हम, बिजली कड़की लिपट गए हम, ये है कितना सुंदर मिलन!’ डरोगे नहीं तो


प्रश्नकर्ता: हैलो सर, मेरा प्रश्न इंटरनेट पॉर्नोग्राफ़ी

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, पिछले कुछ समय से महिलाओं के प्रति दुराचार की घटनाएँ बहुत सामने आ रही हैं। यह सब देख कर मन बहुत खिन्न है। कृपया कुछ कहें।

आचार्य प्रशांत: मैं कुछ बातें सामने रख रहा हूँ, मुझे नहीं मालूम मैं उनको पूरी तरह समझा सकता हूँ या नहीं। पर अगर आप में ज़रा भी अंतर्दृष्टि होगी तो आप संबंध बैठा पाएँगे। दुनिया की आबादी का बहुत बड़ा तबका है, जो अब यह कहने में गौरव महसूस करता



प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, अभी क्षमा की बात चल रही है तो मेरे पास एक कॉन्फेशन (पाप स्वीकरण) है करने के लिए। आचार्य जी, दिसम्बर दो-हजार-इक्कीस के सत्र में आया था मैं ऋषिकेश में, तो तब मैंने एक जिज्ञासा की थी सेक्स सम्बन्धित। तब मेरा अनुभव नहीं था उसका, तो

प्रश्नकर्ता: अध्यात्म में कामवासना, शारीरिक-आकर्षण, इन सबके विरुद्ध सावधान रहने को कहा जाता है, लेकिन जिस प्रक्रिया से एक जीव इस दुनिया में, अस्तित्व में आता है, वह प्रक्रिया ग़लत कैसे हो सकती है?

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं असम, गुवाहाटी से आया हूँ, मेरा प्रश्न कामवासना से लेकर है। सर, मैं कामवासना से इतना ग्रस्त हूँ कि सारा दिन मुझे यही सोच आते रहते हैं कि क्या है ये और क्यों है। कामवासना के कारण मुझसे कुछ साल पहले बहुत बड़ी ग़लती हो

भई! गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरणताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ में


जो आप अपने साथ ज़िन्दगी में घटिया-से-घटिया काम कर सकते हैं वो ये है कि आप अपने शारीरिक सौंदर्य की रोटी खाना शुरू कर दें। “लड़की बहुत सुंदर है, इसको तो बहुत अच्छा लड़का मिला है। बड़े डॉक्टर ने इसको पसंद किया है।“ अगर इस वजह से पसंद किया है…

सब पुरुषों के लिए निश्चित होना चाहिए कि स्त्रियों के ब्यूटी पार्लर में कम-से-कम तीन महीने काम करें। यह व्यवस्था बननी चाहिए। जाकर देखो तो कि जिस रूप-यौवन के पीछे तुम इतने पागल रहते हो उसकी हकीक़त क्या है। जितने फल और सब्जियाँ रसोई में नहीं पाए जाते उससे ज़्यादा…

यह लाज की, धिक्कार की बात है कि एक छोटे से सुख से ही खरीद लिया गया। अगर मैं छोटा आदमी होऊँगा ज़रूर जो इस छोटे से सुख से बिलकुल लार टपका दी मैंने। सवाल पूछते हैं फिर अपने-आप से कि, “तू इतना गिर गया? इतनी बड़ी चीज़ हो गई

किसी का दिमाग भ्रष्ट करने का एक बहुत अच्छा तरीका होता है उसको सेक्सुअल एक्टिविटी (यौन गतिविधि) की लत लगवा देना। अब वह कुछ भी करेगा।


किसी भी आम लड़के से पूछ लो वो किसलिए विवाह करता है; सम्मानजनक काम करने के लिए तो वो भी विवाह करता नहीं, काम वह सारे ऐसे ही करता है जो विवाह के बिना करदे तो तुम कहोगे 'ज़लील, लुच्चे, लफ़ंगे! गायब हो जा यहाँ से!'

बहुत तकलीफ़ हो रही है मुझे यह कहते हुए कि हमारे देश का औसत नौजवान, औसत लड़का, औसत लड़की एक अब औसत पॉर्नस्टार बन चुका है। और बहुत ज़िम्मेदारी के साथ मैं यह बात बोल रहा हूँ। और मैं कुछ गिने-चुने पॉर्नस्टार्स की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं इस

कि सुंदर लड़की आ गई या हैंडसम लड़का आ गया और तुम बिलकुल कँपने लग गए, हिलने-डुलने लग गए। जो तुम्हें अपना शरीर दिखा करके प्रभावित करना चाहे, तुम पर हावी होना चाहे, उसका प्रतिरोध आवश्यक है। कोई साधारण तौर पर सुंदर हो और तुम्हारे सामने आ जाए, उसकी तो

तुम अभी नये-नये किसी नौकरी में लगे हो और जहाँ तुम्हारी कोई हैसियत नहीं, औकात नहीं, आमदनी नहीं, तुमने अभी कुछ सीखा नहीं, कोई तरक्की नहीं करी, कोई पहचान नहीं बनायी, ना ज्ञान अर्जित किया। ना तुम अभी सामाजिक दृष्टि से कुछ हो, ना आंतरिक, आध्यात्मिक दृष्टि से कुछ हो

जहाँ तुमको कामवासना के पूरे होने की उम्मीद हो और वहाँ वह पूरी ना हो रही हो तो फिर जो फ्रस्ट्रेशन (खींझ) और हताशा उठती है, वो बहुत-बहुत तीव्र होती है। वह इतनी तीव्र होती है कि उसकी लहर में लोग हत्या तक कर जाते हैं। जिसको एक बार यह




प्रश्नकर्ता: आचार्य जी आपका पॉलीगैमी (बहु-विवाह) के बारे में क्या कहना है? जैसे एक परिवार है उसमें पत्नि या पति है, तो अगर पति की दो-तीन प्रेमिकाएँ हों तो पत्नी को अच्छा नहीं लगता है। तो क्या ये भी नहीं होना चाहिए?

प्रश्नकर्ता : आचार्य जी, संत ओशो जी का एक वीडियो देखा था जिसमें वो कह रहे थे कि “वासना जब अपने चरम सीमा पर पहुँचती है तब प्रार्थना में तब्दील हो जाती है।” तो यह वक्तव्य समझ नहीं आ रहा।



प्रश्नकर्ता: मैं अर्थशास्त्र विषय में अनुसंधान कर रहा हूँ। मैं अपने विभाग में मेरी एक सीनियर छात्रा से अनुसंधान के कार्य के दौरान संपर्क में आया। उन्होंने मुझसे सांख्यिकी विषय में मदद ली थी, इसी दौरान मैं उनकी ओर आकर्षित होना शुरू हुआ। इस आकर्षण के कारण मेरी पढ़ाई, मेरा

जिस चीज़ को देख रहे हो उसमें इतना भी नहीं आकर्षण है कि उसे साफ़-साफ़ देख लोगे, तब भी आकर्षण बना ही रहेगा। जिसको जानते ही नहीं हो न, उसको ही बहुत अधिक महत्व और सम्मान और इज्ज़त कीमत देते रहते हो। जिसको जानने लग जाओ, उसको फिर सम्यक स्थान देते हो कि इतनी ही इसकी कीमत है, इतनी ही इसको मैं जगह दूँगा, इससे ज़्यादा इसको जगह नहीं दे सकता। सही मुद्दे लेकर आओ ज़िन्दगी में भाई! इन चीज़ों की बात करने के लिए वक्त नहीं बचेगा।
महिलाओं को यह जानना चाहिए कि तन और मन में प्राथमिकता हमेशा मन की है, क्योंकि आप देह नहीं हैं, आप चेतना हैं। कोई आपकी देह के ख़िलाफ़ अपराध कर दे—बलात्कार वगैरह—तो वह निश्चित रूप से एक अपराध है, पर उससे कहीं बड़ा अपराध यह है कि कोई आपकी चेतना को सीमित और संकुचित कर दे, आपको पढ़ने-लिखने न दे, आपके पर कतर दे, आपको जीवन में अनुभव न लेने दे, या आपको घर में क़ैद कर दे। यह बलात्कार से कहीं अधिक जघन्य अपराध है।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अभी प्रेम प्रसंग की आप बात कर रहे थे तो मेरे कुछ मित्र हैं, मेरे एक मित्र हैं पर्टिकुलर, तो हर टाइम क्या रहता है कि कोई रिलेशनशिप में जब एंटर करतें है, तो काफ़ी उम्मीद के साथ एंटर करते हैं रिलेशनशिप में कि काफ़ी कुछ…
प्रश्नकर्ता: इंटरनेट से एक बहुत लम्बे समय तक मेरा कोई विशेष लगाव नहीं था। यूट्यूब भी मैंने तभी देखना शुरू किया जब आपको सुनने की आदत लगी है आपके कारण ही मैंने इंटरनेट पर ज़्यादा समय बिताना शुरू किया, पर अब ये हो गया है कि इंटरनेट पर मैं आता…
आचार्य प्रशांत: पूछते हैं कि युवा हूँ और अपने जीवन में कई अलग-अलग पहलुओं को पाता हूँ। फिर इनके जीवन में वो अलग अलग पहलू क्या है, उसकी छोटी सी सूची दी है। तो एक पहलू है पढ़ाई और कैरियर का। अगला है गर्लफ्रेंड और प्रेम प्रसंगों का। फिर अगला…
प्रश्नकर्ता: एक व्यक्तिगत स्थिति है। जिन्होंने पूछा उनका नाम नहीं लूँगा। कह रहीं हैं- मैं २८ साल की हूँ और शादी को दो साल हुए हैं। पति बहुत प्यार करते हैं हमारी लव मैरेज हुई थी। सालभर पहले तक राहुल (पति का नाम) बड़े एक्साइटेबल माने चंचल, जल्दी उत्तेजित हो…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी मेरे मन में जो है सैक्स (यौन क्रिया) से सम्बन्धित बहुत विचार आते हैं तो उन्हें कैसे कम या नियन्त्रित कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: ज़िन्दगी यूँ ही छोटी है, उसमें किसी ऐसे काम के लिए तुम समय कहाँ से निकाल रहे हो, जो तुमको पता है…
आचार्य प्रशांत: समलैंगिकता विकार है, ऐसा तुम्हीं कह रहे हो। इस विकार का समाधान, मैं…
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा सवाल सामाजिक मुद्दे को लेकर है। जो ट्रांसजेंडर कम्युनिटी होती है उसमें मैंने कई बार देखा कि हम जब समाज में बाहर निकलते हैं तो वो लोग पैसे माँगते हैं या ट्रेन में भी जाते हैं तो वो काफ़ी परेशान करते हैं, पैसे दो यह…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी मेरे मन में जो है सेक्स से रिलेटेड (सम्बन्धित) बहुत थॉट्स (विचार) आते हैं तो कैसे कम करे या कंट्रोल (नियन्त्रित) कर सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: ज़िन्दगी यूँही छोटी है, उसमें किसी ऐसे काम के लिए तुम समय कहाँ से निकाल रहे हो जो तुमको पता है…
आचार्य प्रशांत: जिन्होंने शरीर के ही दम पर प्रसिद्धि पाई, जिनको शरीर के ही नाते जानते हो उन फ़िल्मी सितारों की जवानी की और बुढ़ापे की तस्वीरें देख लिया करो। देह क्या है स्पष्ट हो जाएगा। देहभाव से मुक्त होने का अच्छा तरीक़ा है। कोई रहे हों अपने ज़माने के…
आचार्य प्रशांत: ज़िंदगी में पहले कुछ बन जाओ, कोई आंतरिक मुकाम हाँसिल कर लो, फिर तुम्हें समझ में आएगा न रिश्ता किससे बनाना है। अब रिश्ता बना लिए हैं छब्बीस की उम्र में ही। तुम्हारा लक्ष्य हो सकता है ज़िंदगी में ऊँचे उठना; जिससे तुमने रिश्ता बना लिया है उसे…
प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते, चार साल से एक लड़के के साथ सम्बन्ध में हूँ। हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, पर प्यार के साथ रिलेशनशिप (सम्बन्ध) में रोमांस और इंटिमेसी (आत्मीयता) भी आते हैं। आज इतने सालों में उसको देखती हूँ, तो दिखता है कि उसे तो सिर्फ़ फिजिकल लव…
आचार्य प्रशांत: देखो, मैं तीन की बात करता हूँ हमेशा। एक होती है आत्मा, सच्चाई; दूसरे होते हैं सांसारिक प्रभाव और…
आचार्य प्रशांत: शादी की बात करी तुमने, शादी न अच्छी है न बुरी है। बिलकुल साफ़-साफ़ देखो शादी का मतलब क्या होता है। हटाओ शब्दों को, रस्मों को, रिवाजों को, मान्यताओं को। जीवन का अर्थ, मैंने कहा, वो है जो चौबीस घंटे तुम अनुभव कर रहे हो। तो शादी का…
आचार्य प्रशांत: दो बातें हैं विवाह के मूल में, ग़ौर से समझिएगा। जो पहली बात है वो दैहिक है, प्राकृतिक है। एक उम्र आते ही पुरुष को स्त्री के साथ और स्त्री को पुरुष के साथ रहने की इच्छा उठने लगती है। यह जो इच्छा है यह पूरे तरीक़े से…
प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। आचार्य जी, आध्यात्मिक साहित्य हैं या पढ़ते-पढ़ते आ रहे हैं, उसमें साधु-संत ने कामवासना को ग़लत बताया और नियंत्रण की सलाह दी। तो यदि ये ग़लत है तो ये काम है ही क्यों? और हमें यौनांग मिला ही क्यों?
आचार्य प्रशांत: उसी में एक बात और…
आचार्य प्रशांत: जो सवाल पूछ रहे हैं, उनकी कुछ धारणाएँ हैं, जो सवाल के पीछे छुपी…
इस युग का सबसे केंद्रीय प्रश्न है ये कि, “बीबा हॉट है कि शीबा?” और आप सही चुनाव कर सकें इसके लिए आपको दोनों की एक नहीं चालीस-चालीस तस्वीरें दिखाई जाएँगी। किसकी कमर कैसी है, किसकी जाँघें कैसी हैं, किसका वक्ष कैसा है, और नज़दीक से देखो ताकि तुम्हारा निर्णय…
यह तो साज़िश है जो २ मिनट ५ मिनट या २० मिनट के वीडियो दिखा दिए जाते हैं। इनमें दिखाया थोड़े ही जाता है, इनमें तो छुपाया जाता है। तुम पूरा देखो! पूरा देखने का मतलब है, वही नहीं देखा जो कैमरे के आगे हो रहा है, उनको भी देख…
तो तुम जो अपना…
प्रश्नकर्ता: अध्यात्म में कामवासना, शारीरिक-आकर्षण, इन सबके विरुद्ध सावधान रहने को कहा जाता है, लेकिन जिस प्रक्रिया से एक जीव इस दुनिया में, अस्तित्व में आता है, वह प्रक्रिया ग़लत कैसे हो सकती है?
आचार्य प्रशांत: जो सवाल पूछ रहे हैं, उनकी कुछ धारणाएँ हैं, जो सवाल के पीछे छुपी…
प्रश्नकर्ता: सर, आप आज की जनरेशन (पीढ़ी) के तौर-तरीकों का इतना विरोध क्यों करते हैं? हम चाहे बोल्ड कपड़े पहनें या बोल्ड लैंग्वेज (भाषा) यूज़ (इस्तेमाल) करें, हममें कम-से-कम बोल्डनेस तो है।
आचार्य प्रशांत: मतलब कपड़े उतार कर कोई घूम रहा है तो वो बोल्ड हो गया? और कोई गाली-गलौज…
आचार्य प्रशांत: बेटा, अगर मॉनोगामी (एक-विवाह) है तो …
आचार्य प्रशांत: तुम्हारी वासना जब पहाड़ पर चढ़ जाती है…
प्रश्नकर्ता: आपने कहा है कि हम अपने-आप में पूर्ण होते हैं लेकिन ये मुझे कहीं भी दिखाई नहीं देता। मैं अपनी पूर्णता एक औरत के शरीर में ढूँढता हूँ। मुझे गर्लफ्रैंड की हमेशा चाह बनी रहती है, तो ये वक्तव्य मेरी समझ में नहीं आता। अब ये भी मैंने सुन…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, चार साल से एक लड़के के साथ संबंध में हूँ। हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, पर प्यार के साथ रिलेशनशिप (सम्बंध) में रोमांस और इंटिमेसी (अंतरंगता) भी आते हैं। आज इतने सालों में उसको देखती हूँ तो दिखता है कि उसे तो सिर्फ फिजिकल लव…
प्रश्नकर्ता: संसार में प्राणी मरने के लिए ही उत्पन्न होता है और उत्पन्न होने के लिए ही मरता है। उत्पन्न होने के लिए मरना क्या है?
आचार्य प्रशांत: मरते नहीं न पूरा, रीचार्जिंग (पुनः ऊर्जा प्राप्त करना) पर जाते हैं। हमारी मौत थोड़े ही होती है। हमारा तो ऐसा होता…