ट्रांसजेंडर लोगों पर विवाद (परलैंगिंक/बाईजेंडर/किन्नर/हिजड़े) || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव(2022)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा सवाल सामाजिक मुद्दे को लेकर है। जो ट्रांसजेंडर कम्युनिटी होती है उसमें मैंने कई बार देखा कि हम जब समाज में बाहर निकलते हैं तो वो लोग पैसे माँगते हैं या ट्रेन में भी जाते हैं तो वो काफ़ी परेशान करते हैं, पैसे दो यह करके। या कोई कार्यक्रम जैसे जब किसी के घर में बच्चा होता है तो वहाँ भी आ जाते हैं या कहीं कोई मरा है तो वहाँ भी आते हैं। तो मैंने इसके ऊपर पूछा था तो लोग इसे बताते हैं कि इन्हें समाज में कोई काम नहीं मिला है तो इसलिए यह ठीक है जो हो रहा है। पैसे माँग रहे हैं तो ठीक है।
तो मैं इस मुद्दे को समझ नहीं पा रहा हूँ। मैं ट्रेन में सफ़र कर रहा हूँ और मुझे आकर के कोई बोल रहा है मुझे तुम्हें पैसे देने पड़ेंगे क्योंकि मेरे साथ शोषण हुआ है। तुम मुझे पैसे दो नहीं तो मैं तुम्हें यहाँ अजीब महसूस कराऊँगी। और तुम्हें यह देने पड़ेंगे। तो इस चीज़ का मतलब क्या है?
आचार्य प्रशांत: रामकृष्ण मिशन के अभी आप भवन में हो। रामकृष्ण कहा करते थे कि मनुष्य की जो मूल वृत्ति होती है, वह उसे दो ही दिशाओं में फेंकती है। मनुष्य के लिए दो ही चीज़ें हैं जो महत्वपूर्ण बनती हैं। और आदमी उन्हीं को क़ीमत देकर, महत्व देकर ज़िंदगी भर ढोता रहता है। किन दो चीज़ों को? कंचन और कामिनी। कंचन माने पैसा, कामिनी माने सेक्स। यह आज की नहीं बात है, यह आज से डेढ़ सौ साल पहले की बात है।
तो आज की बात हो या आज से डेढ़ सौ साल पहले की बात हो, यही दो चीज़ें हैं जो आम आदमी की ज़िंदगी बन जाती हैं। इनसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हमें कुछ समझ में आता ही नहीं है, पैसा और सेक्स। तो पुरुषों से बोला होगा तो कामिनी बोल दिया, कि कंचन-कामिनी में फँसे हुए हो तुम। पर कामिनी माने नारी ही नहीं, मनुष्य में देह की जो इतनी लिप्सा होती है, देह को हम जो इतना महत्व देते है, उसका प्रतीक है कामिनी।
तो पैसा और






