अहंकार के लिए समझना बहुत ज़रूरी है कि उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। अपने बारे में कल्पना में रहना कोई अच्छी बात नहीं। हमारी तो चेतना भी हमारे शरीर से उठी है। तुम प्रकृति से मुक्त कैसे हो जाओगे ?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
Originally published in Dainik Jagran on 24 March '23
विष्णु भगवान सो रहे हैं। तो इनके कानों के मैल से दो असुर पैदा हो गए, मधु और कैटभ। इन्होंने बड़ा उत्पात मचाया। और ये ब्रह्मा को मारने को तत्पर हो गए। और लगे हैं पीछे ब्रह्मा के, ब्रह्मा वहाँ से भागे और विष्णु के पास आए, देखा कि विष्णु अपनी योग निद्रा में हैं।
तब उन्होंने महामाया की स्तुति की और बोले कि आप से ऊँचा कौन हो सकता है! आपमें वह शक्ति है कि आप स्वयं भगवान को भी निद्रा में डाल सकती हैं।
ये सारी बातें सांकेतिक हैं। तो फिर महामाया विष्णु जी की आँखों से और भौंहों से प्रकट हो करके बाहर आईं और विष्णु भगवान जग बैठें। जब उठ बैठें तो ब्रह्मा जी ने उनको सारा हाल सुनाया। और फिर कहानी कहती है कि मधु-कैटभ से विष्णु जी का पाँच हजार साल तक युद्ध हुआ और तब भी वह दोनों हारे नहीं।
जब हारे नहीं तो महामाया का खेल, उन्होंने मधु-कैटभ की मति ऐसी कर दी कि उनको लगा कि विष्णु तो बड़े वीर योद्धा हैं, हम दोनों जैसे पराक्रमी असुरों से इतने दिनों से, इतने वर्षों से अकेले ही युद्ध कर रहे हैं। तो वो दोनों प्रसन्न हो गए और विष्णु से बोले, माँगो, क्या वरदान माँगते हो ? विष्णु तो अब माया से मुक्त हैं, बोलते हैं कि मुझे एक ही वरदान चाहिए, तुम दोनों मेरे ही हाथों मरो। फँस गए दोनों बेचारे।




