दीपावली पर घर साफ होते हैं, पुरानी वस्तुएं हटती हैं, कोने चमकते हैं। उधर बाजार कपड़ों, आभूषणों और उपहारों से भर जाते हैं। एक ओर घर से अनावश्यक सामान निकालते हैं, दूसरी ओर नई वस्तुओं से उसे फिर भरते हैं। लेकिन जिस गंभीरता से घर साफ करते हैं, क्या उसी गंभीरता से अपने जीवन की भी जांच करते हैं? दीपावली प्रकाश का पर्व है।
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Originally published in Rajasthan Patrika on 4 Nov '26
दीपावली पर घर साफ होते हैं, पुरानी वस्तुएं हटती हैं, कोने चमकते हैं। उधर बाजार कपड़ों, आभूषणों और उपहारों से भर जाते हैं। एक ओर घर से अनावश्यक सामान निकालते हैं, दूसरी ओर नई वस्तुओं से उसे फिर भरते हैं। लेकिन जिस गंभीरता से घर साफ करते हैं, क्या उसी गंभीरता से अपने जीवन की भी जांच करते हैं? दीपावली प्रकाश का पर्व है। लेकिन प्रकाश तभी सार्थक है, जब अंधकार पहचाना जाए। घर का अंधेरा दिख जाता है, भीतर का नहीं। जिस अहंकार के कारण अंधकार है, वही अपने को सही मानता है। हम लोभ को जरूरत, भय को समझदारी और आसक्ति को प्रेम कह देते हैं। मान लेते हैं कि कुछ और सुविधाएं, थोड़ी और सफलता मिल जाए तो सब ठीक हो जाएगा। क्या दीपावली इस विश्वास की जांच का अवसर नहीं?
अहंकार से दूरी
इस पर्व से जुड़ी मान्यता है कि चौदह वर्ष के वनवास के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे और उनके स्वागत में दीप जले। लेकिन उनके उत्सव में यह भी पूछें कि राम हमारे लिए क्या अर्थ रखते हैं। राम उस दिशा का नाम भी हैं, जिसमें मनुष्य भय, स्वार्थ और झूठी पहचान से मुक्त हो अहंकार को क्षीण करने की ओर बढ़े। राम का नाम लेना सहज है, उस दिशा में बढ़ना कठिन। विडंबना देखिए। राम का स्मरण हमें अपने भ्रमों की जांच के लिए प्रेरित करे, लेकिन उनके उत्सव में हम सोना, सजावट और खर्च का हिसाब लगाने लगते हैं। कितना खरीदा, घर कितना भव्य दिखा, उत्सव यहीं सिमट जाता है। लेकिन अपने किसी स्वार्थ या प्रिय मान्यता पर प्रश्न उठाने का साहस नहीं होता। यदि लोभ और भय जस-के-तस रहें, तो बाहरी आयोजन से रामत्व कैसे आएगा? इसका अर्थ यह नहीं कि नए कपड़े पहनना, मिठाई बांटना या उपयोगी वस्तु खरीदना गलत है। प्रश्न वस्तु का नहीं, उसे चाहने वाले का है। एक व्यक्ति जरूरत के लिए उपकरण खरीदता है, दूसरा इसलिए कि पड़ोसी के पास भी है। बाहरी कर्म समान, नीयत अलग। दूसरे को वस्तु से अधिक यह भरोसा चाहिए कि वह किसी से कम नहीं। अहंकार इसी तरह बाहरी वस्तुओं से अपने को पूरा करना चाहता है, जबकि वे ऐसा कर नहीं सकतीं।




