
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आज दीवाली है, मेरे मन में ये प्रश्न आ रहा है कि क्या हम त्योहारों को उनके सही अर्थों में मनाते भी हैं या नहीं?
आचार्य प्रशांत: अगर धर्म वास्तव में ये है - ईमानदार, बोधपूर्ण, एकांत तो ये दिन (त्योहार) हमें और धार्मिक बनाते हैं या…
















Acharya Prashant: (Reading, Salok Mahalla 9 Guru Teg Bahadur)























लोकोऽपि तावदेव भोजनादि- व्यापारस्त्वाशरी रधारणावधि।।१४


पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम्। इह संसारे बहुदुस्तारे कृपयापारे पाहि मुरारे।।



सेई तुधुनो गावही जो तुधु भावनी रते तेरे भगत रसाले।।
हनुमान चालीसा की शुरुआत ही, "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर" से होती है। पहला ही शब्द 'ज्ञान' है। जब ज्ञान रहता है, तो ये भूत-प्रेत आदि व्यर्थताएँ दिमाग़ में आती ही नहीं। भूत-पिशाच आदि का कोई अस्तित्व नहीं होता, लेकिन जिसका अंधविश्वास है कि भूत-प्रेत तो होते ही हैं, उसको संतों ने कहा कि हनुमान जी का जाप करोगे तो भूत-प्रेत निकट नहीं आएँगे। हनुमान, श्रीराम तक पहुँचने का साधन हैं। एक बार श्रीराम के निकट आ जाओगे, तो अंधविश्वास से स्वयं ही मुक्त हो जाओगे।
To the one who believes in ghosts (Bhūta-Piśāca) — for him, they exist. When you are asleep and are engaged in some nightmare, you feel it actually exists. Bhūta-Piśāca Nikata Nahiṁ Āve, Mahāvīra Jab Nāma Sunāve: Mahavira Hanuman, devoted to Shri Ram, is to be taken as the representative of Truth. If you can be close to the representative of the Truth, you will get rid of all nonsensical and horrifying imaginations.
Fight, and perish fighting. If you win, glory is yours. If you perish, at least all suffering is gone. Is that not a great way to live? Fight, and fight so hard that you either win, or perish.
जैसे शरीर को पोषण देते हैं, वैसे ही मन को पोषण दीजिए। फ़िल्म देखने से मन को पोषण नहीं मिल जाना है, मैच देखने से नहीं मिल जाना है। पार्टी करने से, ख़रीददारी करने से भी नहीं मिल जाना है। जहाँ मिलना है, वहाँ जाइए। वो मैंने करा है, इसीलिए आपसे बड़े अधिकार और बड़े विश्वास के साथ कहता हूँ कि आप भी करिए।
मन जिस आयाम को देख सकता है, वो द्वैत का ही आयाम है। वहाँ उसे वो नहीं मिलता जिसकी उसे तलाश है। हमको तलाश तो सत्य की ही है, पर तरीके अनुचित हैं, क्योंकि हम होश में नहीं है। गुरु तुम्हें कुछ देता नहीं है, वो सिर्फ़ इशारा करता है कि गलत जगह खोज रहे हो। तलाश तो तुम्हारी सपना टूटने पर ही बुझेगी।
Prayer is not an activity; it is your very being. "So you cannot pray; you can only be full of prayer." Prayer is the silent call of the mind. The deeper the silence, the truer the prayer. The noisier the mind, the more it is desire, not prayer. True prayer asks for nothing; it’s simply being prayerful in every movement of the mind—eating, walking, talking.
धुरी करमु जिना कउ तुधु पाइआ ता तिनी खसमु धिआइआ ||
“Dhuri Dhuri karam jinaa ka-o tuDh paa-i-aa taa tinee khasam Dhi-aa-i-aa.”
(Only those whose karma You have pre-ordained from the very beginning, O Lord, meditate on You.
~ Asa di Vaar (Guru Granth Sahib)
Questioner: What does Karma being…
ये युग, मूल्यों के संक्रमण का युग है। मूल्य संकुचित होते जा रहे हैं और राम जिन मूल्यों के प्रतिनिधि हैं, वो मूल्य हमें नहीं पसंद आने वाले भाई! कदम-कदम पर राम, कर्तव्य पर चलते हैं। वो ये नहीं देखते कि उन्हें लाभ क्या होगा? वो ये नहीं देखते कि उन्हें सुख, खुशी, प्रसन्नता मिलेगी कि नहीं मिलेगी। वो ये देखते हैं कि कर्तव्य क्या है ये बताओ? मैं तो अपने कर्तव्य का पालन करूँगा। आज कौन अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहता है? तुम अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करना चाहते तो राम क्यों अच्छे लगेंगे तुमको?
Intelligence isn’t the same as knowledge. Knowledge relies on history, memory, and experience, while intelligence allows one to relate to others in the present moment. Knowledge helps with comprehension, but true understanding comes from intelligence, which goes beyond knowledge. Even without knowing the language, intelligence can still enable a deep connection. If knowledge is there—wonderful! Even without knowledge, intelligence isn’t limited or lame. It can still operate effectively, allowing one to relate and understand fully.
आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) कह रहे हैं कि आप कहते हैं कि महिलाओं का कमाना उनकी आन्तरिक और भौतिक प्रगति के लिए ज़रूरी है, पर हमारी प्राचीन देवियाँ जैसे माँ सीता, देवी अनुसुइया, यहाँ तक कि साध्वियाँ जैसे मीराबाई भी कभी कमाती तो नहीं थीं, तो क्या वो सब…
Dhhoop Malaaanalo Pavan Chavaro Karae Sagal Banaraae Foolanth Jothee ||1||
The fragrance of sandalwood in the air is the temple incense, and the wind is the fan.
All the plants of the world are the altar flowers in offering to You,
O Luminous Lord. ||1||
~Aarti, Guru Granth Sahib
Questioner:…
Question: Acharya Ji, Pranaam! While reading and meditating on Nitnem, something happened within me which is difficult to explain. And this happening is same while we were reading Ashtavakra Gita and Upanishads.
These words do not create any images, but they take away my chains and cut me down. Whatever…
एह वसतु तजी नह जाई नित नित रखु उरि धारो ॥
Ėh vasaṯ ṯajī nah jāī niṯ niṯ rakẖ ur ḏẖāro.
This thing can never be forsaken; keep this always and forever in your mind.
Raag Mundaavanee, Fifth Mehl
Rahras Sahib, Nitnem (Guru Granth Sahib, Page 1429)
Question: Pranaam…
ऊडे ऊडि आवै सै कोसा तिसु पाछै बचरे छरिआ ॥Ūde ūd āvai sai kosā ṯis pācẖẖai bacẖre cẖẖariā.The crane flies hundreds of miles, leaving its young one behind.
तिन कवणु खलावै कवणु चुगावै मन महि सिमरनु करिआ ॥३॥Ŧin kavaṇ kẖalāvai kavaṇ cẖugāvai man mėh simran kariā. ||3||…
sir sir rijak sambaahay thaakur kaahay man bha-o kari-aa.
~ Rehraas Sahib, Fifth Mehala (Nitnem)
The Lord and provides sustenance to everyone, then why should you worry my mind?
~ Rehraas Sahib, Fifth Mehala (Nitnem)
सिर सिर रिजक सम्बाहयठाकुर कहाय मन भाओ करीआ
~ रहरास साहिब, पाँचवा महला…
(Hindi- “harsh, shok vyape nahin bairi meet saman”).
(Reading question) "If friendship and…
जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥Je mohākā gẖar muhai gẖar muhi piṯrī ḏee.The thief robs a house, and offers the stolen goods to his ancestors.
अगै वसतु सिञाणीऐ पितरी चोर करेइ ॥Agai vasaṯ siñāṇīai piṯrī cẖor karei.In the world hereafter, this is recognized,…
**ਅਉਧ ਘਟੈ ਦਿਨਸੁ ਰੈਣਾਰੇ ॥ ਮਨ ਗੁਰ ਮਿਲਿ ਕਾਜ ਸਵਾਰੇ ॥ ਰਹਾਉ ॥
a-oDh ghatai dinas rainaaray. man gur mil kaaj savaaray. rahaa-o.
The life passes day and night. My mind, meet the Guru so that he sets things right: meet the Guru so that he attaches you…
अउध घटै दिनसु रैणारे ॥मन गुर मिलि काज सवारे ॥१॥ रहाउ ॥जा कउ आए सोई बिहाझहु हरि गुर ते मनहि बसेरा ॥
~ राग गौरी पूरबी, पाँचवा महला, सोहिला साहिब
Translation:
The life passes day and night.My mind, meet the Guru so that he sets things right.…
He himself acts, and he himself contemplates.He Himself is the Master of both worlds. He plays and He enjoys; He is the Inner-knower, the Searcher of hearts. As He wills, He causes actions to be done. Nanak sees no other than Him. ||2||
Tell me – what can a…
जो किछ कराय सो भला कर माने-ई हिकमत हुक्म हुक्म चुकाइये
~ तिलांग, पहला महला, शब्द हज़ारे (नितनेम)
Those God-Oriented people will tell that to attain God, we should accept as good whatever He does, and stop our own cleverness and will.
~ Tilang, 1st Mehla, Shabad Hazare (Nitnem)
Question:…
Questioner (Q): Dear Acharya Ji, Pranaam!
For three months we have been studying Guru Granth sahib, and my mind is filled with love for God, his name, and devotion for Guru. Today is the last class, so I wished to conclude all that I have learned and listened to so…
In good times, there are many companions around, but in bad times,there is no one at all.Says Nanak, vibrate, and meditate on the Lord;He shall be your only Help and Support in the end. ||32||
~ Guru Tegh Bahadur Ji, Salok Mahalla
Guru Granth Sahib Ji, Ang…
ਕਰਮੀ ਆਵੈ ਕਪੜਾ ਨਦਰੀ ਮੋਖੁ ਦੁਆਰੁ ॥
karmee aavai kaprhaa nadree mokh du-aar
By good karma, the Saropa, which is this body, the robe of honor, is obtained, and by His kindness, the door to salvation opens.
~ Guru Granth Sahib 2-5 (Japji Sahib, Nitnem)
✥ ✥ ✥
Questioner (Q):…
People make all sorts of efforts to find peace and pleasure, but no one tries to earn the pain.
Says Nanak, listen, mind: whatever pleases God comes to pass. ||39||
~ Guru Tegh Bahadur Ji, Salok Mahalla
Guru Granth Sahib Ji, Ang 14128
Question: Acharya Ji, please clarify what is…
गोबिंद मिलण की इह तेरी बरीआ ॥Gobinḏ milaṇ kī ih ṯerī barīā.This is your chance to meet the Lord of the Universe.
अवरि काज तेरै कितै न काम ॥Avar kāj ṯerai kiṯai na kām.Other efforts are of no use to you.
मिलु साधसंगति भजु केवल नाम…
आयहू हर रस कर्मी पाइआ सतगुर मिलाई जिस आय
~तिलांग, पहला महला, शब्द हज़ारे ( नितनेम)
The Essence: Name of the Lord, His love, is obtained by good luck, good deeds,
when the True Guru: the True Master, meets and tells you to recite the Name of God.
~ Tilang,1st…
घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन्ह गोपाल ॥Gẖaṛīā sabẖe gopīā pahar kanĥ gopāl.All the hours are the milk-maids, and the quarters of the day are the Krishnas.
गहणे पउणु पाणी बैसंतरु चंदु सूरजु अवतार ॥Gahṇe pauṇ pāṇī baisanṯar cẖanḏ sūraj avṯār.The wind, water and fire are the…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न युग के बारे में है। जैसे हम पढ़ते हैं, चार युग होते हैं– सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। और जो एक युग होता है उसको लगभग लाखों वर्षों का मानते हैं। जबकि एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) के अनुसार जो स्टार्स (तारों) की पोजीशन (स्थिति) है,…
संजोगु विजोगु दुइ कार चलावहि लेखे आवहि भाग। ~ जपुजी साहिब (नितनेम)
आचार्य प्रशांत: फ़्री विल (मुक्त इच्छा) भी एब्सोल्यूट्ली फ़्री (पूर्णत: मुक्त) है। आपकी जो फ़्री विल है, वो भी इस मामले में तो बाउन्डेड (सीमित) है ही कि वो आपकी नहीं है। जो आपकी इच्छा है वो तो…
गुर परसादी हरि मंनि वसिआ पूरबि लिखिआ पाइआ।।
~ नितनेम (अनंदु साहिब)
बाइ गुरुज़ ग्रेस द लॉर्ड अबाइड्स विदिन द माइंड, एंड वंस प्री-ऑर्डेंड डेस्टिनी इज़ फ़ुलफ़िल्ड।
“गुरु के अनुग्रह से ईश्वर मन में बसता है, और व्यक्ति पूर्वनिर्धारित नियति को प्राप्त कर लेता है।”
प्रश्नकर्ता: ग्रेस (अनुग्रह) और प्री-ऑर्डेंड…
वजाइया वाजा पउण नउ दुआरे परगट कीए दसवा गुपतु रखाइआ।। ~ नितनेम (अनंदु साहिब)
आचार्य प्रशांत: ‘आनन्द साहिब’ से है कि उसने शरीर के वाद्य यन्त्र में साँस फूँकी और नौ द्वार खोल दिये लेकिन दसवें को छुपाकर रखा। दसवाँ द्वार कौनसा है? कौनसा हो सकता है दसवाँ द्वार? मन…
विणु गुण कीते भगति न होई। अर्थ: बिना गुण के भक्ति नहीं हो सकती। (जपुजी साहिब)
आचार्य प्रशांत: आप दीवार के पास बैठे हैं और आप ऊँघ जाते हैं और आपके सिर पर दीवार लगती है ज़ोर से। क्या आप दीवार से कहते हो कि कमीनी मेरे ही घर की…
दुख विसारणु सेविआ सदा सदा दातारु ~ शबद हज़ारे (नितनेम)
मैं उसकी सेवा करता हूँ, जो मेरे सारे दुखों को विस्मृत कर देता है और जो सदा-सदा से देने वाला है।
आचार्य प्रशांत: मैं उसकी सेवा करूँगा, करता हूँ, जो मेरे सारे दुखों को विस्मृत कर देता है और जो…
”हुकमी हुकमु चलाये राहु।” ~ जपुजी साहिब
आचार्य प्रशांत: वो अपने हुक्म से राह पर चलता है। राह तो सामने ही है। जहाँ खड़े हो, वहीं से चलती है। हुक्मी स्वभाव ही है, तो कहीं दूर जाना नहीं है पूछने। हुक्म तब भी उल्टा-पुल्टा हो जाता है, क़दम फिर इधर-उधर…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। कई भ्रांतियाँ मैंने देखी है कि फैली हुई हैं। जैसे कि उत्तरकांड को बहुत से लोग रामायण का हिस्सा नहीं मानते। कहते हैं, रामायण युद्धकांड पर समाप्त हो जाती है, वाल्मीकि जी ने उससे आगे उसको नहीं कहा था।
ऐसे ही कुछ सनातन धर्म पर आक्षेप…
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। कल का सत्र बहुत अच्छा था और जब सत्र में जुड़ने करने के लिए हम आवेदन करते हैं, मेल भेजते हैं, उसमें सबसे पहला सवाल पूछा जाता है कि आपकी अपेक्षा क्या है सत्र में भाग लेने से? मेरी जो अपेक्षा थी, वो पहले दस मिनट…
आचार्य: हर शब्द का अपना एक माहौल होता है, एक पृष्ठभूमि होती है, वो कहाँ से आ रहा है। तो जब मन में बहुत कुछ भरा रहे, संसार बहुत अर्थपूर्ण लगे तब शून्यता शब्द की प्रासंगिकता है।
जब लगे कि आगे-पीछे जो कुछ है, ऊपर-नीचे जो कुछ है, स्मृतियों में…
प्रश्नकर्ताः तुलसीदास जी ने कहा है : 'नहिं कलि करम न भगति बिबेकू, राम नाम अवलंबन एकू।' आपका भी वीडियो सुना जहाँ कहीं भी राम नाम का शीर्षक मिला कि राम नाम एक ऐसी चीज़ है जो निराकार और साकार दोनों के बीच का है। तो मैं बच्चों को ये…
आचार्य प्रशांत: जी, स्वागत है! बताइए।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार, सर। कल मेरी एक ऑनलाइन प्रतिभागी सोमेश जी से बात हो रही थी, तो मैंने पूछा कि आज की कार्यशाला के लिए उनका प्रश्न क्या है। एक अजीब-सी बात उन्होंने कही कि आचार्य जी ने गीता पर जो चर्चा करी है उससे…
प्रश्नकर्ता: नमस्ते, सर। मैं शायद उत्तर भारत के जो करोड़ों लोग हैं, उनमें से ही एक हूँ जिन्हें बचपन से ही हनुमान चालीसा सुन-सुन कर याद हो जाती है या याद करा दी जाती है। पर मैंने देखा कि हाल ही तक ही मुझे हनुमान चालीसा की जो चौपाइयाँ हैं,…
प्रश्नकर्ता: मेरा सवाल ये है कि बहुत सारी कहानियों में, जैसे राम और कृष्ण की कहानी हम पढ़ते हैं या कोई और भी। इन अवतारों को बचपन से ही बहुत ऐसे दिखाया जाता है कि इनमें बचपन से ही सारे गुण थे, या ये बचपन से ही अच्छे थे, निपुण…
भिन्न-भिन्न लोकों…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, नितनेम साहिब ग्रन्थ को ध्यान में रखते हुए आज का मनुष्य समय में रहते हुए समयातीत को कैसे याद रख सकता है?
आचार्य प्रशांत: कह रहे हो समय में रहते हुए समयातीत को कैसे याद रखें? समय परेशान करेगा इसलिए समयातीत को याद रखना पड़ेगा; समय ही…
हे परमपूज्य परमात्मा! मुझे अपनी शरण में ले लो। मैं इस जन्म और मृत्यु के चक्कर से मुक्ति प्राप्त करना चाहता हूँ। मुझे इस संसार रूपी विशाल समुद्र को पार करने की शक्ति दो ईश्वर।
~ भज…
सोचै सोचि न होवई जे सोची लख वार ॥ चुपै चुप न होवई जे लाइ रहा लिव तार ॥ भुखिआ भुख न उतरी जे बंना पुरीआ भार ॥ सहस सिआणपा लख होहि त इक न चलै नालि ॥ किव सचिआरा होईऐ किव कूड़ै तुटै पालि ॥ हुकमि रजाई चलणा नानक…
आचार्य प्रशांत: केंद्रीय बात क्या है?
श्रोता: हर एक नश्वर चीज़ों से, पदार्थों से, व्यक्तियों से हमारा नाता है, तो मृत्यु का भय तो रहेगा?
आचार्य प्रशांत: वो नाता जो है उसको सिर्फ़ नीति के आधार पर नहीं अनुचित ठहराया जा रहा। वो नाता भूल है। वो नाता होना ही…
सुणिऐ सिध पीर सुरि नाथ ।। सुणिऐ धरति धवल आकास ।। सुणिऐ दीप लोअ पाताल ।। सुणिऐ पोहि न सकै कालु ।। नानक भगता सदा विगासु ।। सुणिऐ दूख पाप का नासु ।।८।।
सुणिऐ ईसरु बरमा इंदु ।। सुणिऐ मुखि सालाहण मंदु ।। सुणिऐ जोग जुगति तनि भेद ।। सुणिऐ…
जो तुझे भाते हैं वही तुझे गाते हैं। तेरे भक्त तेरे रस में डूबे होते हैं।
~ जपुजी साहिब
आचार्य प्रशांत: पहली पंक्ति का अनुवाद ये है, 'जो तुझे भाते हैं वही तुझे गाते हैं।' "रते तेरे भगत रसाले" —…