लेकिन जो समझदार हो जाता है, उसके लिए शुभ बात या बड़ी बात ये नहीं होती कि शारीरिक रूप से दुनिया में आ गए। उसके लिए बड़ी बात ये होती है कि मानसिक रूप से दुनिया से प्रस्थान कर गए। अध्यात्म आने का नाम नहीं है; अध्यात्म एक अंतिम विदाई का नाम है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
Originally published in Lokdesh on 8 September '22
पहली बात तो ये है कि आप शरीर हैं – यही आपका मूल कष्ट है। दूसरी बात जब तक आप अपने-आपको जानते नहीं हैं, बाकी सब लोगों को शरीर ही मानते रहते हैं, तब तक आपके लिए सबसे बड़ी बात यही होती है कि किसी जीव का शारीरिक-आगमन हो जाए। लेकिन जो समझदार हो जाता है, उसके लिए शुभ बात या बड़ी बात ये नहीं होती कि शारीरिक रूप से दुनिया में आ गए।
उसके लिए बड़ी बात ये होती है कि मानसिक रूप से दुनिया से प्रस्थान कर गए। जो लोग इस बात की खुशी मनाते हैं कि उनका शरीर इस दुनिया में आ गया, वो शरीर ही बनकर लगातार मौत जैसे कष्ट भोगते हैं। और जो समझ जाते हैं कि अपने-आपको शरीर समझना भूल है, वो फिर आने की खुशी नहीं मनाते, वो जाने की साधना करते हैं।
अध्यात्म आने का नाम नहीं है; अध्यात्म एक अंतिम विदाई का नाम है। सांसारिक आदमी या देहाभिमानी आदमी इसी चक्कर में लगा रहता है कि जन्म होता रहे इसी को तो जन्म-मरण का चक्र कहते हैं। प्रकृति आपसे चाहती ही यही है। आप जिस भी प्रजाति के हों, प्रकृति की आपसे अपेक्षा ये रहती है कि आप अपनी प्रजाति के ही और सदस्य पैदा करते जाएँगे।




