Suffering

ज़िंदगी में मुश्किलें रहेंगी, कोई बात नहीं
ज़िंदगी में मुश्किलें रहेंगी, कोई बात नहीं
15 min
इंसान होने का मतलब ही है बहुत कुछ होगा जो तुम्हारे सामर्थ्य से बाहर का होगा। एक चीज़ है तुम्हारे हक़ में। क्या? घटना कुछ भी घट रही हो, उस घटना को उत्तर क्या देना है। तुम्हारा प्रतिसाद, तुम्हारी प्रतिक्रिया, ये तुम्हारे अधिकार में हो सकते हैं। बिल्कुल संभव है कि बाहर बड़ी से बड़ी कठिनाई हो, कष्ट हो; भीतर तुम्हारे एक अस्पर्शित शांति बनी ही रहे। जो ऐसा कर ले गया, वो न सिर्फ़ जी गया, वो जीवन के पार निकल गया। सिर्फ़ उसी का जीवन सार्थक हुआ।
दुख के कारण को समझो
दुख के कारण को समझो
21 min
छोटे बच्चे हैं; मिर्ची लग गई। मम्मी भाग के आती है तो क्या करती है उसके मुँह में? ले, चीनी खा। ये सुख है। यह जीवन जीने की हमारी आम विधि रहती है। हमें सुख चाहिए ही इसीलिए होता है क्योंकि हम दुख में हैं। पर हम यह नहीं करते कि दुख के कारणों को ही समझ लें। जब दुख हो तो सुख की तरफ़ भागने की अपेक्षा दुख के कारणों की तरफ़ भागो, दुख के भीतर की ओर भागो। और वहाँ पता चलेगा दुख किसलिए है। पता चलते ही दुख घटना शुरू हो जाएगा। तुमने कुछ करा नहीं; तुमने सिर्फ़ जाना और जानने भर से दुख मिट गया।
What Is A Doctor’s Responsibility?
What Is A Doctor’s Responsibility?
21 min
As a doctor, can we limit our responsibility to the one particular body or to the set of few bodies that come to us for treatment? Or is the patient actually a representative of an entire society, an entire ecosystem? Can I really be a good doctor of the lungs, if I support a society that pollutes the environment in the name of development? So, if I'm a doctor, then health is my responsibility in the holistic sense, not just one patient.
प्यार, मासूमियत, भोलापन - या छिपी हुई चालाकी?
प्यार, मासूमियत, भोलापन - या छिपी हुई चालाकी?
20 min
दुख रोकना है, सुख को पकड़ो; वहीं दुख छिपा हुआ है। धोखा रोकना है, भरोसे को पकड़ो; वहीं धोखा छिपा हुआ है। चोट से बचना है, तो सहलाने वालों से बचो; वहीं से चोट आने वाली है। और चालाकी से बचना है, तो अपने भोलेपन को ध्यान से देखो; वहीं चालाकी छुपी हुई है। अज्ञान से बचना है, तो अपने ज्ञान को देखो; वहीं मूर्खता बैठी हुई है। और दुश्मनों से बचना है, तो दोस्तों से बचो। लूटने से बचना है, तो इकट्ठा करने से बचो।
You Want to Save Your Child? First, Let It Hurt – Children’s Day Special
You Want to Save Your Child? First, Let It Hurt – Children’s Day Special
9 min
It’s not going to be right when the patient starts playing the doctor. We need to grow up; and having a kid, in that sense, is an opportunity. You want to be of some use to the kid, then grow up with the kid.
अतीत की कठपुतली नहीं बनना है
अतीत की कठपुतली नहीं बनना है
14 min
ये समझना होता है कि past has a way of becoming the present. जो हमारी शरीर और मन की पूरी संरचना है, इस तरह से डिज़ाइन्ड नहीं है कि ये पास्ट को पास्ट में छोड़ दे। अगर पास्ट ही प्रेज़ेंट बन रहा है तो फ्रीडम कहाँ है? अतीत की कठपुतली बनने से मुक्त होने के लिए आपको चैतन्य प्रयास करना पड़ेगा। जो लोग वो चैतन्य प्रयास नहीं कर रहे, उन्हें ये दावा करने का कोई हक़ नहीं है कि वो फ़्री लाइफ़ जी रहे हैं। मुक्ति और क्या है? जो भी कीमत देनी पड़े, दो; पर जो स्वभाव नहीं है, उसको बर्दाश्त मत करो।
जिया नहीं जाता
जिया नहीं जाता
37 min
किस-किस की ज़िंदगी से कोई विदा हुआ है, जिसकी विदाई पर रोए थे? वो अभी भी उतना ही याद आता है जितना विदाई के चार महीने तक आता था? शरीर नहीं, तुम्हारी याद भी मिट जाएगी। तुम भी किसी को याद नहीं आने वाले, पागल। यही है भविष्य। खूबसूरत फंदों में फँसना सीखो। बस फंदा इस लायक होना चाहिए कि फँसा जाए। भगत सिंह ने भी फंदा ही तो चुना था, फंदा माने बंधन। पर वैसा बंधन चुनो तो क्या बात है! फिर उसके बाद शिकायत नहीं रह जाएगी कि ज़िंदगी रुखी है, बेरौनक है, ‘जिया नहीं जाता।’
कोई भी आपकी उम्मीदों के हिसाब से नहीं चलेगा
कोई भी आपकी उम्मीदों के हिसाब से नहीं चलेगा
20 min
हम सोचते हैं, हमारी जैसी चाहत है, ये सामने वाला व्यक्ति वैसा व्यवहार करे। वो आपकी चाहत के हिसाब से नहीं चलने वाला। आप चाहते रहो कुछ भी, कुछ भी चाहते रहो। एक ही बार में टूट जाने दो न दिल को, जग की मरनी क्यों मरे दिन में सौ-सौ बार। किसी को कुछ देना चाहते हो तो दे दो, उम्मीद क्यों कर रहे हो? और जहाँ आप सचमुच चाहते हो कि बदल जाए बंदा, अब लग गया है दिल, है कोई बात, नहीं छोड़ सकते ये कहकर कि जैसा पहले था, आगे भी वैसा ही रहेगा। जहाँ पर ये आपने रुख ले लिया हो, वहाँ पर साधन बस एक है। क्या? अध्यात्म।
अतीत की यादें और भविष्य का डर
अतीत की यादें और भविष्य का डर
6 min
ये मत कहिए कि पीछे से कुछ आ जाता है और आपको ले जाता है। जो सामने है, आप अपने आप को उससे बचा लेते हो। अगर आपने अपने आप को पूरा-पूरा जीवन को सौंप दिया होता, तो फिर कुछ बचता ही नहीं, जिसको भूत या भविष्य ले जाए। 'लैक ऑफ इंटरेस्ट' चाहिए और वो तब होता है, जब सामने कुछ होता है जो आपका पूरा अटेंशन ले ले। ज़िंदगी में जो ज़रूरी है, उसको स्वीकार करिए और उसमें कूद जाइए, फिर इधर-उधर की झंझटें ख़ुद ही याद आनी बंद हो जाएँगी।
आसमान चाहिए तो पिंजरे से नफ़रत करना सीखो!
आसमान चाहिए तो पिंजरे से नफ़रत करना सीखो!
10 min
आकाश से कोई प्रत्यक्ष प्रेम नहीं कर सकता। आकाश से प्रेम है कि नहीं, वो बस इसी से पता चलेगा कि पिंजरे को देखकर आग उठती है कि नहीं, पिंजरे के प्रति विरोध, विद्रोह उठता है कि नहीं। वही प्रेम का सूचक है।
एडिक्शन छोड़ना मुश्किल क्यों?
एडिक्शन छोड़ना मुश्किल क्यों?
7 min
शराब पीने से, मूवी देखने से, कोई भी एंटरटेनमेंट से क्या होता है? आप थोड़ी देर के लिए सब भूल जाते हो, यही तो होता है। इसका मतलब आपके पास कुछ है भूलने लायक, अपनी ज़िंदगी बर्दाश्त नहीं हो रही। जब तक आप व्यक्तित्व और पूरे माहौल को ही नहीं बदलोगे, तब तक जो भी लत लगी हुई है, वो लगी रहेगी। कोई आपका बहुत-बहुत गहरे आनंद का क्षण हो, उसमें आप बेहोश होना चाहोगे क्या? उसमें तो आप नींद को भी भगा देते हो, भगाते हो कि नहीं?
मेरे पास दुख नहीं है, तो फिर अध्यात्म में क्यों आऊँ?
मेरे पास दुख नहीं है, तो फिर अध्यात्म में क्यों आऊँ?
5 min
ऐसा कोई नहीं होता, जिसके जीवन में दुख न हो। हम पैदा ही दुख में होते हैं। दुख एक डिफ़ॉल्ट स्टेट है, जो सबकी ज़िंदगी में होगा ही होगा। यह और ज़्यादा ख़तरनाक बात है कि दुख है, लेकिन या तो आपने उसको दबा रखा है, या आप उसके ऑपोज़िट एंड, सुख पर जाकर किसी तरीके से बचने की कोशिश करते रहते हैं। कोई बोले, “मेरे पास दुख नहीं है, तो मैं अध्यात्म में क्यों आऊँ?” तो उसको फिर अपनी ज़िंदगी का पता ही नहीं है कि उसको कितना दुख है।
जीवन का उद्देश्य: अस्तित्ववाद से अध्यात्म तक
जीवन का उद्देश्य: अस्तित्ववाद से अध्यात्म तक
65 min
"हम बंधन में हैं, बंधन ही दुख है और जिज्ञासा उस दुख के पार जाने का उपाय है। अस्तित्ववादी विचारकों ने कहा था कि वास्तव में एक ही प्रश्न है — “To be, or not to be?” दुख इतना है कि इसके साथ जिएँ भी या न जिएँ? फिर कामू इसका उत्तर देते हैं, “जीना तो ऐसे ही पड़ेगा, बस अपनी हालत पर हँसकर जियो।” जो कुछ भी हो रहा है, उसे समझना तुम्हारा दायित्व है। जब समझकर सहते हो तो मुस्कुराहट आ जाती है। श्रीकृष्ण कहते हैं, “इस जीवन में जो इंसान प्राकृतिक वेगों को तितिक्षा से सहने में सक्षम हो जाता है, वह जीवन-मुक्त है।”
On Suicide
On Suicide
24 min
A suicide is a sad event because it prevents us from realizing our possibility and potential — there was an opportunity to live, learn, grow, realize, and be liberated, but it was wasted. But how many of us actually manage to realize our potential even if we live to 80 years? Hardly anybody. For our species, the extent of aliveness is proportional to the freedom and height of our consciousness. So ask yourself honestly: How close am I to the best I could have been?
अतीत से कैसे पीछा छुड़ाएँ?
अतीत से कैसे पीछा छुड़ाएँ?
25 min
अतीत शरीर में बैठा हुआ है; उसका मिटना बड़ा मुश्किल है। आपने जैसी ज़िंदगी जी होती है, वो आपकी देह में घुस जाती है। कोई भी पल कभी पूरे तरीक़े से बीत नहीं जाता, वो शरीर पर अपना निशान छोड़ जाता है। जिन चीज़ों को आप पीछे छोड़ आए हो, वो बीच-बीच में फिर सर उठाती दिखाई दें तो निराश मत हो जाना। आध्यात्मिक प्रक्रिया जंग जैसी होती है; उठोगे–गिरोगे, पर मैदान मत छोड़ना। ज़िंदगी ऐसी कर लो कि जो कुछ भी अतीत कह रहा है, उनके लिए समय ही कम से कम बचे।
अतीत का बोझ तुम्हारी कमज़ोरी है
अतीत का बोझ तुम्हारी कमज़ोरी है
16 min
जो कुछ भी मानसिक है, वही तो मायावी है। जो कुछ भी मन में आ सकता है, छवि, चित्र, कल्पना के तौर पर, सिद्धांत के तौर पर, वही तो माया है, और क्या है।
गलत निर्णयों को कैसे सुधारें?
गलत निर्णयों को कैसे सुधारें?
12 min
यह जगते हुए आदमी का लक्षण है कि उसे बार-बार शक होता है, कहीं वह बेहोश तो नहीं है। जब आप कहते हैं, कुछ फ़ैसले नादानी, नासमझी में हो गए, तो छुपा दावा यही है कि बाक़ी समझदारी में किए हैं। गड़बड़ यही है — सब कुछ ही बेहोशी में हुआ है, क्योंकि करने वाला ही बेहोश था। अगर दिखने लगे कि निर्णय गड़बड़ थे, तो यह दुख नहीं, सौभाग्य है। नई शुरुआत करिए — पुराना जो था, सो था; 'अब मैं नया, मेरी कहानी नई, लिखते हैं फिर से, मज़ा आएगा।'
आज़ाद जीती हूँ तो अंदर से विरोध उठता है
आज़ाद जीती हूँ तो अंदर से विरोध उठता है
8 min
कमजोर हो इसलिए तुम सहारे नहीं पकड़ते, सहारे पकड़ते हो इसलिए कमजोर हो। जो तुम्हारा सहारा बनकर बैठा है तुम्हारे भीतर, वही कारण है तुम्हारी कमजोरी का। उसी को दफ़ा करो, चाहे वो व्यक्ति हो, चाहे सिद्धांत हो, चाहे वस्तु हो, चाहे ज्ञान हो, चाहे कुछ हो। जिसका भी सहारा लिए बैठे हो न, वही कमजोरी है तुम्हारी।
You’re Still Hurt Because They Still Rule Your Heart
You’re Still Hurt Because They Still Rule Your Heart
6 min
The hurt that you have received is a result of your own lack of understanding about the nature of life. This is an opportunity to understand life. It is an opportunity to not let the previous mistakes be repeated.
सुन भी लिया, समझ भी गया —और फिर सो गए?
सुन भी लिया, समझ भी गया —और फिर सो गए?
20 min
इंसान के लिए बड़ी ये विडंबना की कह लो या मज़े की बात कह लो, ये है कि अगर उसको मुक्ति चाहिए तो उसे "सही बंधन" चुनना पड़ेगा। और कुछ ऐसे उत्साही होते हैं वो कहते हैं, "जब मुक्ति लक्ष्य है, तो बंधन क्यों चुनें?" साहब, मुक्ति, मैं कई बार चेता चुका हूँ मुक्ति कुछ नहीं होती बंधन ही बंधन होते हैं, या तो सही बंधन या ग़लत बंधन। जो सही बंधन चुन लेता है वो मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ता रहता है, और जो मुक्ति को चुन लेता है वो गहरे बंधनों में फँस जाता है।
You’re Not Addicted to Your Phone - It’s Something Deeper
You’re Not Addicted to Your Phone - It’s Something Deeper
8 min
I'm not asking you to be a loner or an avoider of human company. It's just that things must be given their due place — and their due place depends on their quality. If you do not have good quality people around you, there are many other better options. Why not spend your evenings learning to swim or sing? And there could be so many other things. I mean, you would know better.
आज के युवा इतने बेचैन क्यों हैं?
आज के युवा इतने बेचैन क्यों हैं?
38 min
आज के युवा के पास अपनी ऊर्जा को अनेक दिशाओं में बिखेर देने के लिए जितने विकल्प उपलब्ध हैं, उतने विकल्प पहले कभी नहीं थे। लेकिन आपके भीतर कोई है जो कहता है कि ये नहीं, ‘कुछ और’ चाहिए। यह ‘कुछ और’ ही जीवन का उद्देश्य है; उसको नहीं पाओगे, तो अंजाम यही होगा — अवसाद, तनाव और जीवन की बर्बादी। जवानी संघर्ष करने के लिए मिली है, बाज़ार का ख़रीदार बनने के लिए नहीं। जिनके जीवन में बाहर संघर्ष नहीं, वो भीतर से बहुत बेचैन जिएँगे।
दुख को जड़ से कैसे ख़त्म करूँ?
दुख को जड़ से कैसे ख़त्म करूँ?
36 min
जिसका मूल्य समय पर, स्थिति पर आश्रित हो, उसको अस्तित्वगत रूप से शून्य महत्त्व देना — ये सीख है। शून्य महत्त्व देना माने ये नहीं कि उसको थप्पड़ मार दिया, तू कुछ है ही नहीं, तो पटाक! ये नहीं। अस्तित्वगत महत्त्व क्या? कि तेरे होने से मेरी हस्ती का सत्यापन नहीं हो पाएगा। तुझसे जुड़ने से मेरी हस्ती को पूर्णता तो नहीं मिल पाने वाली, तो मैंने तुझसे ये आशा हटा दी, ये है महत्त्व को शून्य कर देना। इस अर्थ में महत्व को शून्य कर देना कि तुझसे ये आशा नहीं रखेंगे कि तुझे जीवन में ले आएँ, तो भीतर जो तमाम तरह के रोग लगे हुए हैं — उदासी, लटका हुआ मुँह, सूनापन ये सब दूर हो जाएँगे, कुछ नहीं दूर होना है।
Are the Gita and Vedanta Outdated?
Are the Gita and Vedanta Outdated?
25 min
The parts of the Upanishads that do not deal with self-enquiry can be taken as outdated. They do not want to address things that change with time. Mankind today is more prosperous than it has ever been in its history — but internally, are you not still afraid? Are you still not greedy? That’s the problem of the self that the scriptures seek to address. The Upanishads are dealing with a very peculiar problem that time alone cannot address — and that is the problem of fundamental human suffering.
संसारी का दुख, और संत का दुख
संसारी का दुख, और संत का दुख
29 min
पीड़ा का एक सागर है मन। इसीलिए उसको नाम दिया गया है — भवसागर। होना ही पीड़ा है। जिन्हें दुख से बचना हो, उन्हें दुख से हटकर सुख की ओर नहीं भागना होता। उन्हें योग की ओर जाना होता है। योग है, दुख से निवृत्ति। दुख से बचोगे सुख की ओर जाकर नहीं, दुख से बचोगे योग की ओर जाकर। और योग का क्या अर्थ है? योग का अर्थ है, मन को आत्मा में लीन कर देना। यही योग है।
How to Deal with Trauma from the Past?
How to Deal with Trauma from the Past?
16 min
Whenever the past bothers you, you should immediately know that some danger is lurking in the present. Had the right thing been happening to you right now, then you couldn’t have been bothered with the past. And that is what the past does. It serves as a very deceptive distraction from the present. Figure out what is happening today.
Why Am I Unable to Deal with Suffering?
Why Am I Unable to Deal with Suffering?
4 min
The reason is that we have internalized a utopian image of a suffering-free life. And our current state of suffering, compared with the utopian heaven, makes us very frustrated. So, keep this comparison aside by seeing that this utopia is purely imaginary. You are not born to be in bliss. In fact, suffering is an inevitable part of life. Take life as it is, and then do your best to raise it as much as possible — this is excellence.
क्या आपके जीवन में दुख है? यही तो संकेत है!
क्या आपके जीवन में दुख है? यही तो संकेत है!
15 min
स्वयं को जानना और बाहर मदद का होना — ये तो हमने कहा, सब एक साथ है। तुम्हारा लक्ष्य होता है स्वयं को जानना, तुम इधर को देखते हो लेकिन बाहर की मदद अपने आप होनी शुरू हो जाती है। वो कोई एक अलग काम थोड़ी है जो करना है।
हीन भावना से कैसे बाहर आएं?
हीन भावना से कैसे बाहर आएं?
19 min
हीन भावना बहुत तगड़ी ज़िद होती है, जो आपका ही चुनाव होता है। हीनता नहीं होती है, स्वार्थ होते हैं। जो भी चीज़ आपको सता रही है, उसमें आपकी सहमति शामिल है। देखिए, आपका स्वार्थ कहाँ है? ज़रूर कोई फ़ायदा है हीन बने रहने में, इसलिए तुम हीन बने हुए हो। आपकी हर बेबसी, हर कमज़ोरी में आपका लालच मौजूद है। तुम अनंत हो, और जो अनंत है, वो किसी से छोटा हो सकता है क्या?
Cross the river and burn the bridges
Cross the river and burn the bridges
2 min

Question: What do I do to cross the river? To me, it is such a challenge.

Acharya Prashant: Crossing the river is easy. Just hold the hand of someone who knows the other side, and cross. You have already crossed the river a thousand times with me. Your failure is

नशा कैसे छूटे?
नशा कैसे छूटे?
14 min
असली के साथ रहे आओ, नकली से लड़ने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी, वो झड़ जाएगा। तुम्हें पता भी नहीं चलेगा, वो जीवन से कहाँ चला गया। उसका खयाल आना बन्द हो जाएगा। जिनकी ज़िन्दगी में मोहब्बत आ जाती है, यकीन मानो, उनका पीना अपने आप छूट जाता है। उन्हें पता ही नहीं चलता कहाँ चला गया। और जिनकी ज़िन्दगी से प्रेम चला जाता है, तुम गौर करोगे, वो तुरन्त शराब की ओर भागते हैं। तो शराब क्या है? प्रेम का अभाव।
Why Should I Trust you, Acharya Prashant? Why Should I Trust the Gita?
Why Should I Trust you, Acharya Prashant? Why Should I Trust the Gita?
26 min
The same suffering that we hide behind so many things— entertainment, even knowledge, so-called distractions, achievements, pleasures, accumulations, prestige, sanctions, and approvals from all around. We hide that fact of human suffering behind all these things. So, it's a big problem. It's a big problem that we want to address. So now, I want to look at — why am I suffering? Why am I suffering?
When Will Life Be Sorted for Good?
When Will Life Be Sorted for Good?
7 min
There has never, ever been anybody 100% sorted. There are always challenges, and those challenges arise from the body itself; your enemy is within you, and it will remain as long as you are alive. So, learn to revel in this situation — it's called life. And instead of asking for a final victory, start asking for a good battle — battles where, even in your pain, you can say, “This one was good!”
बदले की आग में जलता है मन
बदले की आग में जलता है मन
10 min
अतीत की बुरी घटनाओं को याद करके तुम अपने वर्तमान को भी खराब कर रहे हो। जो बीत गया, वह अतीत है, लेकिन प्रतिशोध के विचार तुम्हारे इस पल को भी प्रभावित करते हैं। तुम्हारे विचार जिस स्तर के होते हैं, तुम्हारा मन भी वैसा ही बन जाता है। प्रतिशोध का ख्याल दिल की आग को ठंडा नहीं करता। यह आग केवल आत्मज्ञान, बोध और अपने आप को जानने से शांत होती है।
Sexual Predators Within the Family
Sexual Predators Within the Family
15 min
And with human beings becoming more powerful technologically, economically, the little being at home is even more staggeringly at the mercy of the grown-ups. The little one is absolutely at the mercy of everybody else. And these grown-ups, they have so much today. Don't you see how human consciousness and the corruption within it is manifesting itself in a 100 ways and sexual exploitation of vulnerable sections is just one way this corruption is manifesting itself.
एक की पत्नी छोड़ गई, दूजे की ज़िंदगी में मौज है: कथा माया की
एक की पत्नी छोड़ गई, दूजे की ज़िंदगी में मौज है: कथा माया की
48 min
फिल्मी बातें वही पूरा का पूरा लोकधर्म भी क्या है? प्लेजेंट एक्सपीरियंसेस, द रोमांस ऑफ लोक धर्म। तुम्हें अपनी जिंदगी खराब करनी है, समय नष्ट करना है तो कर लो। कितना भी इसमें समय लगा सकते हो। कोई अंत नहीं है। कोई शारीरिक काम हो तो शरीर थक भी जाता है। मन तो अतल कुआं है। उसमें कितना भी आप शायरी डाल दो, रोमांस डाल दो, भावनाएं डाल दो, रील्स डाल दो, यही सब होता है। वो थोड़ी कभी भी भरता है।
क्या शारीरिक दुःख के बीच अध्यात्म संभव है?
क्या शारीरिक दुःख के बीच अध्यात्म संभव है?
8 min
पीड़ा दुख तब बनती है जब आप पीड़ा के साथ जीने से इनकार करते हो। और पीड़ा के साथ जीने से इनकार आप अक्सर इसलिए करते हो क्योंकि अध्यात्मवादियों ने आपको बता दिया है कि जीवन आनंद है। तो आप कहते हो, आनंद तो मिल नहीं रहा, गुरु जी तो बता गए थे फूल बरसेंगे, फुहारें उठेंगी, जीवन नृत्य है, और वो तो कहीं दिख नहीं रहा। यहाँ तो कभी यहाँ (कोहनी में) दर्द होता है, कभी धूप लगती है, कभी कोई बीमारी लग जाती है, कभी कहीं शोर होता है, कभी कहीं कोई मौत देख लेते हैं। यहाँ तो जिधर देखो वहीं मौत का नाच चल रहा है। मृत्यु लोक ही है।
अय्याशी पूरी है, फिर भी 'बेचैनी’ क्यों है?
अय्याशी पूरी है, फिर भी 'बेचैनी’ क्यों है?
8 min
मनुष्य के मन की बेचैनी का अय्याशी समाधान होती तो अमेरिका में सब एकदम प्रसन्न ही नहीं, आनंदित होते। लेकिन मानसिक समस्याएँ भारत की तुलना में अमेरिका में और अधिक पाई जाती हैं। आदमी अय्याशी इसलिए नहीं करता कि उसे अय्याशी से प्रेम है, वह अय्याशी इसलिए करता है क्योंकि वह भीतर से बहुत दुखी है। सारी समस्या बस यही है कि आँखें बाहर देख सकती हैं, भीतर नहीं देख सकतीं। अय्याशी कोई समाधान नहीं है, क्योंकि यदि उसमें सच में कुछ सार्थक मिलता, तो बुद्ध और महावीर अपना विलासितापूर्ण, वैभवपूर्ण जीवन छोड़कर जंगलों की ओर न जाते।
लोग शराब क्यों पीते हैं?
लोग शराब क्यों पीते हैं?
7 min
शराबी वह है, जिसे पता चल गया है कि उसे कुछ चाहिए, जो मिल नहीं रहा। उसे कुछ ऐसा चाहिए, जो उसकी चेतना को ज़रा बदल दे। शराब का काम ही यही है—जो चेतना की अवस्था होती है, उसे बदल देना। इससे बहुत-सी बातें भुला दी जाती हैं, और बहुत सारे बंधन व बोझ हट जाते हैं। तो Alcoholism या किसी भी तरह का नशा वास्तव में एक आध्यात्मिक कमी को ही दर्शाता है। यदि उसे पहले ही अध्यात्म मिल गया होता, तो उसने कभी Drugs या Alcohol को हाथ नहीं लगाया होता।
Why Life Seems to Involve Pain?
Why Life Seems to Involve Pain?
4 min
You didn't have anything special in the past. Had we had anything special in the past, then we wouldn't have come to the state of suffering we find ourselves in today. So, the past is not the solution. You have to realize how things are with you today. You have to look at your interactions with human beings today. You have to see how you relate to your body, to your friends, to your workplace—all these things. And from there, you—you develop an insight, and that insight offers, some freedom.
Instagram Fame, and Anxiety Pills
Instagram Fame, and Anxiety Pills
7 min
Shallow philosophies and false treatments do not work for anybody. It's another matter if we want to keep fooling ourselves. There has to be self-love. There has to be courage. One has to say it's all right to be devastated and destroyed but it's not all right to keep yielding moment by moment the way I do.
अतीत की गलतियाँ कैसे सुधारें?
अतीत की गलतियाँ कैसे सुधारें?
16 min
अतीत की कोई गलती आपको परेशान करने नहीं आती। अगर आप इस वक्त परेशान हैं, तो इस वक्त ही कोई गलती हो रही है। तकलीफ़ अतीत की किसी घटना की वजह से है या वर्तमान में उस घटना को पकड़े रहने की वजह से? आप अतीत का रोना इसलिए रोते हैं ताकि वर्तमान में अतीत का मुआवज़ा वसूल सकें। थोड़े से मुआवज़े के लिए ज़िन्दगी खो देते हो। अपनी जो भी हालत है, उसका जिम्मेदार दूसरों को ठहराना छोड़िए, अपनी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना सीखिए।
Ditch the Trauma: Embrace Your New Self!
Ditch the Trauma: Embrace Your New Self!
4 min
Outgrow. Outgrow your past. Look at your past and say, ‘Oh, she's a different girl. She's not me. And, I find no pleasure even looking at her. I mean, all right, she's a younger self, some kind of a younger sister— cute, all right, but nothing of much interest to me now. I have better things to look at. I have more important stuff to attend to.’
Are We Trapped by Romanticized Illusions?
Are We Trapped by Romanticized Illusions?
18 min
It's a very, very dangerous notion if you say—"You know, all the fun, all the pinkness, all the tenderness lies in stupid kind of notions. And everything that is conscious, elevated, sublime—is dry." It's very dangerous and you are becoming a victim of the propaganda of the juice sellers. There is nothing more fascinating than the truth. Go ask that to those who have dedicated their lives to the service of truth—exploration, discoveries.
हम सब इतने नाराज़ क्यों हैं? Road Rage की वजह क्या?
हम सब इतने नाराज़ क्यों हैं? Road Rage की वजह क्या?
31 min
प्रमुख वज़ह ये है कि आमतौर पर आप जिस वज़ह से सड़क पर निकले ही हो न, वो वज़ह ही गलत है। आप सड़क पर होते ही गलत वज़ह से हो। भीतर-ही-भीतर कुछ आपके बड़े कष्ट में होता है और बड़े क्रोध में होता है। ऐसा नहीं कि किसी ने आपका बंपर छू दिया पीछे से, तो इस वज़ह से आपको बहुत गुस्सा आ गया। आप बहुत पहले से गुस्सा थे। आप बहुत क्रोध से भरे हुए थे कि आप क्यों नहीं लात मार सकते हो इस ज़िंदगी को। और आप अपनी बेबसी पर नाराज़ थे कि छोटे से लालच के पीछे आप कैसी ज़िंदगी बिता रहे हो? बिता नहीं रहे हो, रोज़ यही करते हो।
Want a Life Free Of Suffering?
Want a Life Free Of Suffering?
7 min
Laugh with no care at all. Why take oneself so seriously? What hurt, what wound can be so big? When we fully well know that the only thing that really is the Truth. Can there be two truths? The truth and the wound. The wound has to be a lie. But it will continue to pretend to be the truth as long as you avoid looking at it. The more you look at it, the more you will see that the wound is just some kind of dressing up that has been needlessly done.
जिन्हें भविष्य की चिंता ज़्यादा सताती हो
जिन्हें भविष्य की चिंता ज़्यादा सताती हो
27 min
आप के सवाल का जवाब यही है कि ये सवाल आए ही नहीं। जिसको ये सवाल आ गया, अब उसको कोई जवाब नहीं दिया जा सकता। ये सवाल ही अपने आप में चोरी है एक तरह की ये। तो ये कोई करके आ गया है। इस सवाल का दिमाग में आना ही समझिए जैसे कि हो गई गड़बड़। कुछ विचार ऐसे होते हैं जिनका दिमाग में; हम कहते हैं ना कि विचार यदि कर्म बन गया तब गड़बड़ हुई, तब पाप हुआ, अपराध हुआ। आवश्यक नहीं है। विचार कर्म बन जाए तभी अपराध नहीं होता। ज़्यादातर विचार ऐसे हैं जिनका दिमाग में आना ही अपराध होता है।
Suffering under peer pressure? || IIT Bombay (2022)
Suffering under peer pressure? || IIT Bombay (2022)
9 min

Questioner (Q): Man is typically a social animal who seeks to coexist with the society around him. I am a vegan but many people around me are not, and that creates a difficulty for me. I want to speak out my thoughts on animal cruelty and get into animal activism,

How to Overcome Sadness?
How to Overcome Sadness?
6 min
Why do you have so much personal time? How are you available to grief? Your consciousness is too self-centered; it needs expansion. Even as you grieve over one death, billions of goats, rabbits, lambs, fish, cows, and chickens are slaughtered. Commit your time. Dedicate it to a higher purpose. We attach great sanctity to our personal lives. Give it up!
How to Handle Insults?
How to Handle Insults?
20 min
Any kind of harm that comes to you can only come due to a lack of self-knowledge. If you do not know who you are, you will be forced to believe whatever others tell you about yourself. We don’t even realize how big a slavery that is! Every time you allow circumstances to rule you, you are actually acting like a dead object. You are alive only if you have something within that circumstances cannot touch.