महिलाओं को यह जानना चाहिए कि तन और मन में प्राथमिकता हमेशा मन की है, क्योंकि आप देह नहीं हैं, आप चेतना हैं। कोई आपकी देह के ख़िलाफ़ अपराध कर दे—बलात्कार वगैरह—तो वह निश्चित रूप से एक अपराध है, पर उससे कहीं बड़ा अपराध यह है कि कोई आपकी चेतना को सीमित और संकुचित कर दे, आपको पढ़ने-लिखने न दे, आपके पर कतर दे, आपको जीवन में अनुभव न लेने दे, या आपको घर में क़ैद कर दे। यह बलात्कार से कहीं अधिक जघन्य अपराध है।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न स्त्री देह के प्रति जो कामना होती है और उसका जो स्तर होता है, उसके बारे में है। जैसे कि कोई भी आपसे कामवासना के बारे में जब कोई प्रतिभागी प्रश्न करता है, तो आप उसे बड़ी सहजता से लेते हैं और उसका उत्तर देते हैं, जिससे कि प्रश्नकर्ता को भी सहजता होती है। पर समाज में ये देखा गया है कि जो स्त्री देह के प्रति किसी पुरुष की जो कामवासना होती है, उसे बड़ी गंदी नज़र से देखा जाता है, अन्य कामनाओं की तुलना में।
जैसे कि कई बार ऐसा देखा गया है कि किसी जेल में बलात्कार का कोई आरोपी है तो उसे, बाकी जो दूसरे आरोपी हैं, वो उसे अच्छी नज़र से नहीं देखते हैं। और ऐसा भी मैंने एक न्यूज़ चैनल में सुना था कि एक बलात्कारी को, बाकी जो आरोपी थे, उन्होंने मार दिया।
ऐसे ही एक घटना अभी महाराष्ट्र में हुई जहाँ पर एक एम.एल.ए थे, उन पर तथाकथित तौर पर एक स्त्री ने माॅलेस्टेसन (छेड़छाड़) का आरोप लगाया और केस भी रजिस्टर हुआ। तो उसके बाद उस पॉलिटीशन (राजनीतिज्ञ) ने इमिडिएटली (तुरंत) एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स लिया और कहा कि और कोई भी अन्य आरोप लगता मुझ पर तो मैं सहन कर सकता था, पर ये जो मॉलेस्टेसन (छेड़छाड़) का आरोप है, ये मैं सहन नहीं कर सकता।




