Social Issues

तुम सुविधा और सुरक्षा चाहते हो, इसीलिए लोग तुम्हें दबाते हैं (झुकना छोड़ो!)
तुम सुविधा और सुरक्षा चाहते हो, इसीलिए लोग तुम्हें दबाते हैं (झुकना छोड़ो!)
31 min
सामंजस्य, एडजस्टमेंट नहीं कर लेना चाहिए। जहाँ किसी तरीके से झुकना भी पड़े, दबना भी पड़े, डरना भी पड़े, वहाँ कम से कम अपने लिए नापसंद तो उठे। इतना तो हो कम से कम। मेरे भी थे ऑफिस में लोग, जिनको न चाहते हुए भी ‘सर’ बोलना पड़ता था। बहुत लंबे समय तक नहीं बोला, पर जितने समय तक बोला, उतने समय तक बोलना भी ऐसा था कि सिर भनना जाए।
बलात्कार और हमारा आक्रोश
बलात्कार और हमारा आक्रोश
10 min
किसी महिला को पढ़ाई, नौकरी, खेल से वंचित कर दिया गया, यह अत्याचार नहीं है क्या? पर इन अत्याचारों को तो हम अत्याचार मानते ही नहीं। चूँकि हमने महिला की पूरी आइडेंटिटी को उसकी सेक्सुअलिटी से ही बाँध दिया है। उसी का नतीजा यह होता है कि कहीं पर भी दंगा-फसाद हो, उसमें महिलाओं का बलात्कार अक्सर देखने को मिलता है। लेकिन महिला सिर्फ अपने जेंडर या सेक्स से तो आइडेंटिफाइड नहीं होती न! हमें उसके व्यक्तित्व के बाकी आयामों को भी सम्मान देना सीखना होगा।
राजनीति में अध्यात्म क्यों ज़रूरी?
राजनीति में अध्यात्म क्यों ज़रूरी?
9 min
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।
असमानता का वास्तविक कारण
असमानता का वास्तविक कारण
17 min
एक कागज़ पर समानता शब्द लिख भर देने से समानता नहीं आ जाएगी। जो समानता के आदर्श को पसंद करते हों, उनकी बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वो समझें, सर्वप्रथम, कि असमानता, भेद कहाँ से आते हैं। वो आते हैं, अहम् से। अहम् विभाजन पर पलता है। उसको जीने के लिए सीमाएँ चाहिए, वर्ग चाहिए, कुछ ऊँचा, कुछ नीचा चाहिए। सिर्फ़ आत्मा वो बिंदु है, जहाँ सब एक और एक समान हैं। इसीलिए, अगर भारत को या दुनिया के किसी भी राष्ट्र को समानता चाहिए, तो उसे आत्मिक होना पड़ेगा।
शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चूक
शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चूक
8 min
दुनिया के बारे में तो तुम्हें वर्तमान शिक्षा व्यवस्था ही खूब पढ़ा देती है। तुम कौन हो, कैसे हो, मन क्या चीज़ है, इसके बारे में कुछ नहीं बताती। तो इसीलिए अपूर्ण है ये व्यवस्था। देखो कि बच्चे को उसका सारा मानसिक भोजन कहाँ से मिल रहा है। तुम्हें बच्चे को कुछ नया सिखाने की ज़रूरत तो है, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा बड़ी ज़रूरत है उन सब रास्तों को रोकने की, जिनसे ज़हर बच्चे में प्रवेश करता है। जो-जो कर सकते हो, सब कुछ करिए। यही वास्तविक अध्यात्म है, यही वास्तव में पुण्य का काम है।
आपका शोषक ही, आपका रोल मॉडल है
आपका शोषक ही, आपका रोल मॉडल है
30 min
आप आज के कैपिटलिस्ट को रोल मॉडल क्यों बोलते हो? अगर यह रोल मॉडल है, तो अंग्रेज़ भी रोल मॉडल हैं। द ब्रिटिश एंपायर वाज़ द बिगेस्ट कैपिटलिस्ट ऑफ़ इट्स टाइम। कैपिटल अपने आप में बुरी नहीं है। पर तुम्हारे भीतर एक बेहूदा अंधकार है, जिसमें तुम पैसा ठुँसे जा रहे हो। तुम दुनिया की आधी प्रजातियाँ ख़त्म करके खा चुके हो। तुम अब पूरी पृथ्वी को खा जाओगे, फिर भी तुम्हारा पेट नहीं भरेगा। आप एक्सप्लॉइटेड हो क्योंकि आप ख़ुद वैसा ही बनना चाहते हो जैसा आपका एक्सप्लॉइटर है। आपका एक्सप्लॉइटर ही आपका रोल मॉडल है।
Rape: Not an Incident, A Continuity
Rape: Not an Incident, A Continuity
17 min
If you leave yourself weak and vulnerable, you are submitting to the ecosystem of rape. What’s worse? It won’t even be reported. The first thing is: empower yourself through education, through exposure, through wisdom. When it comes to sexual urges, no lessons of morality really succeed. You’ll just be left complaining to the benevolent power up there, “You know, I’m such a pious woman. Why was I violated?” Because that’s how it happens in the jungle. That’s the answer. That’s all.
हवस और हिंसा रोकने के लिए ये सज़ा दो
हवस और हिंसा रोकने के लिए ये सज़ा दो
31 min
तुम ये माने बैठे हो कि समाज बहुत अच्छा है, क़ानून में बस कमी है। क्यों अपने आपको कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट दे रहे हो? क्यों कह रहे हो कि इस समाज का चरित्र बहुत अच्छा है? क्यों समाज को एक चरित्र प्रमाणपत्र दे रहे हो? मत दो भाई। इस समाज को अच्छा कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट देने की कोई ज़रूरत नहीं है। जो मामले होते हैं न, वो प्रतिनिधि मामले हैं — वे रेप्रेजेंटेटिव मामले हैं। वो ऐसा नहीं कि यूँही कोई आसमान से गिरा एलियन है जो आकर रेप कर गया। वो इसी समाज, इसी मिट्टी से उठा हुआ अपराधी है।
आतंकवादी कैसे पैदा होते हैं?
आतंकवादी कैसे पैदा होते हैं?
30 min
हम अपनी देह के साथ डर लेकर पैदा होते हैं। चूँकि हम में डरने की वृत्ति है, इसलिए समाज भी हमें डरा लेता है। डर से मान्यता आती है, और वही मान्यता आतंकवादी भी बनाती है। चेतना का धर्म आनंद की ओर जाना है। यदि किसी के भीतर यह मान्यता बैठ गई है कि कुछ लोग दुश्मन हैं और उन्हें मारकर आनंद या जन्नत मिलेगी, तो वह मारेगा। आतंकवादी भी अपनी सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं का गुलाम है। अज्ञान ही हर हिंसा का कारण है, और अज्ञान का अर्थ ही मान्यता है।
भारत में हर साल 40 लाख बलात्कार? दिल दहला देने वाला सच!
भारत में हर साल 40 लाख बलात्कार? दिल दहला देने वाला सच!
47 min
जबकि ये जानी-समझी बात है कि स्मृति में जो कुछ लिखा है, उसे श्रुति-सम्मत होना चाहिए, और स्मृति अगर श्रुति का उल्लंघन कर रही है तो स्मृति को हटा दो, श्रुति की बात मानी जाएगी, क्योंकि श्रुति वो देती है जो कालातीत सत्य है। और स्मृति वो बातें कहती है जो उस समय के समाज में प्रचलित हैं। उस समय समाज में जो प्रचलित है, उन चीज़ों को माध्यम बनाकर, सहारा बनाकर, उन चीज़ों को भी सम्मान देकर किसी तरह से धर्म को अशिक्षित लोगों तक भी पहुँचा सको, इसके लिए स्मृति थी।
Rape, Social Stigma, Dependency
Rape, Social Stigma, Dependency
8 min
You know, if your husband is gone, your finances are gone. Therefore, you will guard your husband very, very strongly, very possessively. It’s not love, it’s dependence. In love, you often allow the other to fly free. But if you are acting as that possessive wife or girlfriend or whatever, that is also because you are dependent, and that is violence, is it not?
दलित महिला कब तक अतीत की कैद में रहेगी?
दलित महिला कब तक अतीत की कैद में रहेगी?
23 min
इससे बड़ी विडम्बना नहीं हो सकती कि जिस ज़मीन पर ‘अहम् ब्रह्मास्मि’ उच्चारित हुआ, उस ज़मीन पर जाति और लिंग आधारित इतनी क्रूरता चली। कोई दलित महिला अतीत से बंध कर रहे, इससे ज़्यादा ताज्जुब की बात नहीं हो सकती। आपके लिए अतीत में रूढ़ियों और बंधनों के अलावा है क्या? उनसे आपको कुछ नहीं मिलने वाला। जितना उनका मुँह देखोगे, उतना आपका दिल टूटेगा। अपने आपको सही ज़मीन और सही आसमान दीजिए। अतीत को तोड़कर उड़ जाओ, इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है।
Something is hiding behind the smoke, and we're missing it
Something is hiding behind the smoke, and we're missing it
10 min
The biggest problem is when we succeed in these little acts of charity, goodness, kindness. Had you succeeded in somehow persuading the kids away, you wouldn’t even have raised this question, and a self-awarded sense of morality and righteousness would have held you high. That’s the whole problem. When you said the kids wouldn’t go away because it is a festival and it is crackers, then do we really understand why the kids wouldn’t go away?
समलैंगिकता पर विशेष बातचीत
समलैंगिकता पर विशेष बातचीत
17 min
ये जो पूरा मुद्दा ही है, ये कोई बहुत ऊँचे तल का नहीं है। रिश्ता कैसा भी हो, समाज को स्वीकार हो, नैतिक हो, अनैतिक हो, पता नहीं कैसा है। सवाल ये है कि आप जिसकी ओर जा रहे हो, वो इंसान आपको क्या देने वाला है? ऊँचाई देने वाला है?
⁠सेक्स का हौवा, और स्त्री देह के प्रति पाखंड
⁠सेक्स का हौवा, और स्त्री देह के प्रति पाखंड
37 min
मेंस्ट्रुएशन को लेकर जो बड़ा हौवा है, उसको जो एक टैबू की तरह हम देखते हैं, उसका कारण ये नहीं है कि हम मेंस्ट्रुएशन को लेकर अनकंफ़र्टेबल रहते हैं। उसका कारण ये नहीं है कि हमें अजीब लगता है, असंगत लगता है कि ये मेंस्ट्रुएशन क्या चीज़ होती है। उसका कारण थोड़ा उससे आगे का है एक कदम, हम सेक्स को लेकर ही अभी तक सहज नहीं हो पाए हैं। हमारी असहजता मेंस्ट्रुएशन, मासिक-चक्र से उतनी नहीं है, हमारी असहजता सीधे-सीधे सेक्स से है। और उसके पीछे बड़ा गहरा कारण है, जो अगर हम समझेंगे तो जीवन को ही समग्रता से समझने में मदद मिलेगी।
गड़बड़ व्यवस्थाओं से संतुलन — क्षमता या श्राप?
गड़बड़ व्यवस्थाओं से संतुलन — क्षमता या श्राप?
18 min
देखो, जितनी भी व्यवस्थाएँ होती हैं, वो ट्रैफिक जाम हो, चाहे सरकारी दफ्तरों का भ्रष्टाचार हो, अव्यवस्था हो, चाहे प्राइवेट सेक्टर की मनमर्जी हो, चाहे रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर जो हो रहा होता है, वो हो — वो सब कुछ उन लोगों का प्रतिबिंब होता है जो लोग उस व्यवस्था को बना और चला रहे हैं। ख़राब व्यवस्था है, माने लोग ख़राब हैं। सीधी-सी बात, कोई बहुत गहरा कारण नहीं है। सड़क ख़राब है, माने बंदा ख़राब है। जिस क्षेत्र की सड़कें बहुत ख़राब पाई जाएँ, जान लो कि वो लोग भी बहुत अच्छे नहीं हो सकते।
जातिगत जनगणना: समाधान या संकट?
जातिगत जनगणना: समाधान या संकट?
34 min
अध्यात्म वहाँ भी बहुत ज़रूरी है, ताकि तुम्हें पता चले कि अगर तुमने विक्टिम होने को अपनी पहचान बना लिया, तो तुम अपनी ज़िंदगी ख़राब कर रहे हो। तो इसलिए अध्यात्म सबके लिए ज़रूरी है। उनके लिए भी, जिनको हम प्रिविलेज्ड क्लास कहते हैं। उनके लिए भी, जो ऑप्रेस्ड रहे हैं और जिनमें अब हीन भावना, इन्फ़िरिऑरिटी आ गई है। और उनके लिए भी, जो अब रेडिकलाइज़ हो रहे हैं, अपने आप को विक्टिम बोलते हैं और अब अग्रेसिव होना चाहते हैं। अध्यात्म उनके लिए भी बहुत ज़रूरी है। अध्यात्म सबके लिए बहुत ज़रूरी है।
बच्चों के कारण घरेलू हिंसा सहना उचित है?
बच्चों के कारण घरेलू हिंसा सहना उचित है?
10 min
ये तर्क गलत है कि बच्चों की ख़ातिर महिला घर में मारपीट बर्दाश्त करे। घरेलू हिंसा हो रही है तो स्त्री को समझना होगा कि उस घर में बच्चों का भी कोई हित नहीं है, वे सुरक्षित नहीं हैं। जितना झेलोगे, उतना पछताओगे। भूल हुई, ग़लत शादी की, लेकिन अब बाहर निकलो, कमाओ। तुम्हारी बाहों की ताक़त सीमित हो सकती है, पर हृदय की नहीं।
सिगरेट, शराब, ड्रग्स - क्यों चाहिए जवानी को नशा?
सिगरेट, शराब, ड्रग्स - क्यों चाहिए जवानी को नशा?
50 min
ये जो पैसे की अंधाधुंध दौड़ है, प्लेसमेंट, प्लेसमेंट — ये नशा कैसे नहीं है? बताओ न!
जाति है कि जाती नहीं
जाति है कि जाती नहीं
35 min
श्रुति ने कहा है — आप जन्म से ब्राह्मण नहीं हो जाते। श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में ब्राह्मण की तो बड़ी ऊँची परिभाषा बताई है — कहते हैं कि जो असली ज्ञानी होता है, वो तो ब्राह्मण, चांडाल, कुत्ते, गाय — सबको एक दृष्टि से देखता है। जाति का रिश्ता देह से ही बताया जाता है, और अध्यात्म इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वो सीधे-सीधे देह-भाव पर ही सवाल उठाता है। जब तुम देह नहीं, तो तुम्हारी जात कैसे हो सकती है?
Sex and Menstruation: Why Is Religion so Obsessed?
Sex and Menstruation: Why Is Religion so Obsessed?
27 min
You have inflated the reproductive process much beyond its worth. Psychologically, a girl carries it throughout her life as something big, whereas it's nothing — just another process in the human body. And because of the stigma you have attached to this purely biological thing, countless women suffer silently because they can't openly talk about gynaecological problems. Indian philosophical systems have zero space for any belief, assumption, or tradition. So, obviously, this culture has to be outrightly rejected.
पीरियड्स में महिलाएँ चाण्डालिनी बन जाती हैं?
पीरियड्स में महिलाएँ चाण्डालिनी बन जाती हैं?
27 min
महिला मासिक धर्म के पहले दिन चाण्डालिनी होती है, या महिला घूंघट कितना लंबा निकाले — ये सब बातें अध्यात्म में नहीं आती हैं। प्रेसिडेंट से लेकर सीईओ तक महिलाएँ हैं, वो पीरियड्स के दिनों में ऑफिस नहीं जातीं? कितना कमज़ोर हो जाती हैं, बताओ? श्रुति सारे धार्मिक मसलों का सर्वोच्च न्यायालय होती है। जब सर्वोच्च न्यायालय ने बोल दिया कि, “महिला और पुरुष देह से अलग होंगे, चेतना से एक हैं और देह का महत्त्व नहीं — महत्त्व चेतना का है,” तो अब नीचे वाले कुछ बोलते रहें, उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?
आरक्षण नीति क्यों है?
आरक्षण नीति क्यों है?
11 min
रिज़र्वेशन इसलिए है, ताकि एम्पावरमेंट हो पाए। और जब वास्तविक सशक्तिकरण होने लगता है, तो उसका एक लक्षण यह सामने आता है कि लोग फिर आरक्षण, अनुदान लेने से स्वैच्छिक रूप से मना करने लगते हैं। इंसान कहता है — ‘मैं आज़ाद आदमी हूँ। अब और किसी से नहीं लूँगा, मैं तो अब दूँगा।’ ऐसे जीने में अपनी एक शान होती है। और यह तब होगा, जब स्पिरिचुअल एम्पावरमेंट होगा।
डर के नाम पर बेटियों की आज़ादी छीन ली — ये कैसी सुरक्षा?
डर के नाम पर बेटियों की आज़ादी छीन ली — ये कैसी सुरक्षा?
22 min
बाहर की बात तो ये बिल्कुल ठीक है कि बाहर निकलो तो वर्कप्लेस पर हरासमेंट हो जाता है। कोई चिकोटी काट लेता है, कोई आँख मार देता है, कोई कुछ आपको अश्लील संदेश भेज देता है, ये सब हो जाता है बाहर ठीक है, बिल्कुल होता है। और बाहर बहुत बुरी दुनिया है, ये सब चल रहा है। ऑटो वाला आपको, आप बैठ गए ऑटो में तो वो रियर व्यू से आपको देख रहा है, ये सब हो सकता है। लेकिन बाहर माने किसकी तुलना में बाहर? भीतर की तुलना में बाहर ना। तो भीतर की बात कौन करेगा?
जाति का दाग लगा है? तो ऐसे रगड़ कर साफ़ करें
जाति का दाग लगा है? तो ऐसे रगड़ कर साफ़ करें
19 min
ध्यान और प्रेम, इनके सामने ये जाति जैसा कचरा टिकेगा क्या? तो अगर जाति हटानी है तो इनको ही लाना पड़ेगा — एक ध्यान और एक प्रेम।
डार्क कॉमेडी: बोलने की आज़ादी या समाज को हानि?
डार्क कॉमेडी: बोलने की आज़ादी या समाज को हानि?
9 min
ज़्यादातर लोग हँस रहे हैं, क्यों हँस रहे हैं? क्योंकि जिन चीज़ों को तुम भाव से या संवेदना से जोड़ रहे हो, या पवित्र मान रहे हो, वो वास्तव में किसी के लिए पवित्र, वग़ैरह है ही नहीं, ऊपर-ऊपर से लोग पाखंड कर देते थे। तो जब कोई आकर के उस पाखंड का नक़ाब उतार देता है तो लोग कहते हैं, “चलो, अच्छा हुआ, हँस ही लो इस पर।”
Violent Family Murders
Violent Family Murders
20 min
Just because we don't hear gunshots doesn't mean that things are peaceful between partners or between parents and kids — especially daughters. Not at all. There are clear boundaries and those boundaries have been mined. As long as you remain within the boundaries, you will entertain the illusion that you are free and loved. Try to step out, and you'll be blown to pieces. So, the violence was always cooking but you didn't see it because you were blinded by your emotions, need for security, and conditioning.
What Does Vedanta Say About Feminism?
What Does Vedanta Say About Feminism?
11 min
Vedanta says that the body of the woman is her cage, just as the body of the man is the man's cage. Vedantic feminism would say, ‘Disown your physical self — you are much beyond that, girl.’ As long as you identify with the body, enjoy being called a girl or woman, there’s no freedom for you, and the same goes for the man. Saying, ‘I am the woman, I am the man’ is the real problem. Equality is a high ideal, but liberation is the purpose of life.
बलात्कार में दोषी कौन? छोटे कपड़े या छोटी मानसिकता?
बलात्कार में दोषी कौन? छोटे कपड़े या छोटी मानसिकता?
11 min
प्रेम तो होश की बात होती है, हम तुम्हें छुएँगे भी सिर्फ़ तब जब तुम अपने पूरे होशो-हवास में हो और प्रेम का क्षण है। नहीं तो इंसान कैसा है, जो किसी बेहोश इंसान को छू भी सकता है।
Abortion Rights: Who Decides — Country, Religion or Society?
Abortion Rights: Who Decides — Country, Religion or Society?
10 min
The building is raised on a weak foundation, and now you want to penalize everybody who comes and shakes it up even a little? You don't do this. Why did you allow this building to stand on such a weak foundation, and now you are trying to protect it through legislation? What kind of stupidity is this?
Do We All Participate in Rape Culture?
Do We All Participate in Rape Culture?
13 min
We don't really look at a woman as a human being, but rather as her physical identity. Even in murder, we fail to see the human being. The sexual lenses are always on. Sri Ramakrishna Paramhans, the great saint, used to say that the ordinary person is driven by two objectives — kanchan (money) and kamini (lucrative girl). Sex is not so much a need of the body, it's a need of the mind. Unless this thinking changes, we'll have to live through the pain of seeing more such incidents.
क्या हमारे समाज में 'रेप कल्चर' है?
क्या हमारे समाज में 'रेप कल्चर' है?
22 min
भारत में हर 15 मिनट में एक रेप हो रहा है। ये बस रजिस्टर्ड आँकड़े हैं, अनरजिस्टर्ड आँकड़ों का तो कोई हिसाब ही नहीं है। ये चीज़ तब तक नहीं हो सकती, जब तक इसको एक वाइडर सोशल सैंक्शन न मिला हो। हमारा कल्चर कहीं न कहीं रेप की तरफ़ परमिसिव है। इसकी जड़ बॉडी आइडेंटिफिकेशन में है। जब तक हमारा कल्चर कॉन्शियसनेस-सेंट्रिक नहीं होगा, तब तक बलात्कार होते रहेंगे। बात रेप की नहीं है, बात इस पूरी संस्कृति को ही बदलने की है।
बड़ा मकान और महँगी शादी
बड़ा मकान और महँगी शादी
15 min
दो चीज़ें होती हैं, जिसमें इंसान फँसता है। एक — बहुत बड़ा मकान, और दूसरा — लाखों-करोड़ों की शादी, जिसमें विलासिता का प्रदर्शन करना अनिवार्य है। इन दोनों के लिए बहुत पैसा चाहिए, जिसकी ख़ातिर आप ज़िंदगी भर ग़ुलामी करते हो। अध्यात्म इन मोटे खर्चों से बचने का नाम है। अगर ये मोटे खर्चे न हों, तो आप जितना कमाते हो, ज़िंदगी उससे आधे में भी चल जाए, क्योंकि वे खर्चे जो ज़िंदगी को बिल्कुल मस्त और आनंदमय बनाते हैं, वो बहुत बड़े नहीं होते।
महिलाओं के प्रति छुपी हुई हिंसा
महिलाओं के प्रति छुपी हुई हिंसा
7 min
एक बार में किसी को मार दो, तो दिखाई पड़ता है — ‘हत्या हो गई,’ पर धीरे-धीरे करके किसी को कुपोषण से मार दो, तो थोड़ी पता चलेगा। भारत में आधे से ज़्यादा महिलाएँ एनीमिया, आयरन डेफिशिएंसी से पीड़ित हैं। उनको ठीक से खाने को ही नहीं दे रहे। हिंसा लगातार हो रही है, लेकिन हम चौंकते सिर्फ़ तब हैं, जब बलात्कार या हत्या हो जाती है। ये सब प्रेम की कमी है और कुछ नहीं। हमें बुनियाद से ही कुछ चीज़ें बदलनी पड़ेंगी।
जाति-प्रथा कैसे मिटेगी?
जाति-प्रथा कैसे मिटेगी?
18 min
जाति मानसिक कल्पनाओं और अंधविश्वासों में होती है। आप जैसे ही समझने लग जाते हो कि जाति सिर्फ़ मन का खेल है, फिर जाति पीछे छूटती है। जाति को दो ही चीज़ें तोड़ सकती हैं — पशुता या चेतना। जो ऊँचा उठ गया, वो भी जाति का ख़्याल नहीं करता और जो एकदम गिर गया, वो भी जाति का ख़्याल नहीं करता। अध्यात्म कहता है, सबको इतना उठा दो कि सब एक बराबर हो जाएँ। अध्यात्म ही जाति-प्रथा को मिटा सकता है, और कुछ नहीं।
तीर्थयात्रा के नाम पर मज़ाक
तीर्थयात्रा के नाम पर मज़ाक
8 min
तीर्थ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर हैं और पूरे रोपवे बना दिए गए हैं, खच्चर-घोड़े पर अत्याचार करके वहाँ तक जाते हैं — ये पशुपति के प्रेम का प्रतीक है? तीर्थ वहाँ स्थापित किया गया था कि जा सकते हो अगर, तो पैरों पर चलकर जाओ। यह रेगुलेट होना चाहिए, चार-चार महीने की वेटिंग लगनी चाहिए ताकि जो सचमुच गंभीर हो, वही लोग जाएँ। पहाड़ के लोगों को सब्सिडीज़ दो, उनकी ज़िंदगी आर्थिक रूप से भी बेहतर हो जाएगी लेकिन पहाड़ क्यों बर्बाद कर रहे हो?
लड़के छेड़ते हैं, क्या शादी कर लूँ?
लड़के छेड़ते हैं, क्या शादी कर लूँ?
16 min
जीवन में कोई श्रीकृष्ण जैसा ही आ जाए, तो बिल्कुल करो शादी, पर ये कोई वजह नहीं है कि 'मैं निकला करती थी, मुझे लड़के छेड़ते थे, तो मैंने शादी कर ली।' यदि कोई छेड़छाड़ करे, तो विरोध करो, मार्शल आर्ट्स सीखो, इतनी मज़बूत बनो कि एक लगाओ अच्छे से। लेकिन इसके बावजूद भी कोई छेड़ के चला गया, तो उसे बहुत भाव मत देना, क्योंकि यह इतनी बड़ी बात नहीं कि इसकी वजह से ज़िन्दगी के निर्णय बदल दिए जाएँ।
Why Do We Treat Women as Property?
Why Do We Treat Women as Property?
12 min
It is our animal tendency to be territorial and to really want to control the other gender — so that we can maximize our own pleasure. When you own something, then there is a sense of security and that's why men want to control women's sexuality. You can dispel that by understanding that you can have no lasting pleasure by owning anything — including a person of the other gender.
बाल उत्पीड़न को कैसे रोकें?
बाल उत्पीड़न को कैसे रोकें?
17 min
हम सोचते हैं, आदमी कितना भी बुरा हो, अपने घर वालों के लिए तो अच्छा ही होता है — ऐसा नहीं होता। जो दुनिया के लिए बुरा है, वही घर पर फिर चाइल्ड मॉलेस्टेशन भी करता है। इसीलिए बच्चों का सबसे ज़्यादा शोषण परिवार के भीतर ही होता है। आज ऑनलाइन अब्यूज़, ऑनलाइन कचरा आपके घर की दीवारें बिल्कुल लाँघ करके आपके घर आ रहा है। सब के विरुद्ध एक ही सुरक्षा है — अध्यात्म। बच्चे ने अगर उपनिषदों सरीखे कुछ मूलभूत सवाल पूछने सीख लिए, तो फिर कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
औरतों का श्मशान घाट जाना वर्जित क्यों है?
औरतों का श्मशान घाट जाना वर्जित क्यों है?
26 min
जहाँ कहीं भी जीवन की सच्चाई सामने आती हो, वहाँ तो हमें विशेष कर जाना चाहिए; श्मशान में वो ज़्यादा साफ़ दिखाई पड़ता है। श्मशान जाकर पता चलता है कि शरीर तो राख जैसी चीज़ है। जो इस बात को जान गया, वह आज़ाद हो जाता है। महिलाओं को वहाँ जाने से वही रोकेगा, जिसका महिलाओं को गुलाम बनाए रखने में स्वार्थ होगा। जो मृत्यु को नहीं समझा, वो मरे-मरे जीता है। जो महिलाओं का मित्र होगा, वो उससे कहेगा कि आओ, मृत्यु को समझते हैं, मृत्यु बहुत ज़रूरी है।
If you want security in life
If you want security in life
5 min

Acharya Prashant (AP): The Ego wants to hedge its bets. Because it is born in insecurity and gains its sustenance from insecurity, therefore insecurity is its very life-stuff. Now look what happens, if insecurity is the life-stuff of the Ego then what kind of security will it seek? It

फुले, अंबेडकर, मनुस्मृति और महिला: कुछ जलते हुए सवाल
फुले, अंबेडकर, मनुस्मृति और महिला: कुछ जलते हुए सवाल
77 min
असल में स्त्रियों दलितों की क्या दुर्दशा थी? जिन्हें हम शूद्र कहते हैं वो आबादी का 40 से 50% हैं। 10-12% एससी और एसटी हैं, जिनको अछूत कहा गया, अनटचेबल कहा गया तो 70% तो यही हो गए और बाकी 30% में भी आधी स्त्रियाँ हैं। तो माने 85 से 90% लोगों की दुर्दशा थी। अब ये मानना हमारे स्वाभिमान को बड़ी चोट पहुँचाता है कि हमने अपने राष्ट्र का ये हाल कर रखा था। तो हम आँख मूंद लेना चाहते हैं। हम ऐसा अभिनय करना चाहते हैं कि जैसे बस सब कुछ बड़ा अच्छा-अच्छा था हमारे अतीत में।
Why does mainstream education neglect wisdom studies? || IIT Kanpur (2020)
Why does mainstream education neglect wisdom studies? || IIT Kanpur (2020)
27 min

Questioner: Sir, I have been reading Krishnamurti and Vivekananda for the past three years and having learned from them, I genuinely feel that the teachings of such great teachers should be at the core of our education system. I personally feel that my decisions regarding my career and life would

Hijab and Burqa - choice and controversy || Acharya Prashant, at Delhi University (2023)
Hijab and Burqa - choice and controversy || Acharya Prashant, at Delhi University (2023)
5 min

Questioner (Q): Good evening, sir. My question is, recently there were huge protests going on in Iran against the imposition of the hijab. There were many people who talked about the hijab as an imposition on women; while others, including women, consider it to be their right of choice—whether

दुनिया की गंदगी से बचा लो इन बच्चों को
दुनिया की गंदगी से बचा लो इन बच्चों को
25 min
ये दुनिया बहुत गंदी है, बच्चे को ऐसे बड़ा करना होता है कि दुनिया का एक भी छींटा उस पर न पड़े। पागल-से-पागल माँ-बाप वो हैं, जो टीवी लगाकर बच्चे को सामने बैठा देते हैं या फिर आपस में बहस कर रहे होते हैं दुनियादारी की। बच्चे को ऊँची-से-ऊँची बातों का — सही किताबें, डॉक्युमेंट्रीज़, ई-बुक्स — इनका एक्सपोजर दीजिए। एक ऐसा बच्चा आपने निकाल दिया, तो वो सूरज की तरह चमकता है, पता नहीं कितनों को रोशनी दे देगा।
Why Does Caste Still Continue?
Why Does Caste Still Continue?
15 min
Caste is something that the Upanishads actively dismiss. So many of our saints came from the so-called lower castes and tried to purge Hinduism of its nonsense, but still, caste continues for two reasons. First, a human is born with an innate tendency to divide and separate. And second, a light has to be awakened in him, and that effort is called real education. We do not receive that education today.
Caste Exists Only in the Mind
Caste Exists Only in the Mind
12 min
Caste is not in the body, it is just in the mind. If you are interested in somebody’s caste, you are a casteist! You meet someone, the person is standing in front of you — assess him as good, bad, or whatever — but why do you want to know his caste? Caste should have been relegated to the museums and the history books by now. Drop it right now! But to drop it, you will need to have self-knowledge.
क्रिकेट और सट्टा
क्रिकेट और सट्टा
19 min
खेल बहुत प्यारी चीज़ है, पर खेल और विज्ञापन दिखाकर सट्टेबाज़ी करने में अंतर है। आज आपको क्रिकेट नहीं, उसके ज़रिए विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं। वही क्रिकेटर और सेलेब्रिटी आपको जुआ खेलने, सट्टा लगाने और पान मसाला खाने के लिए प्रेरित करते हैं। इनका अस्तित्व ही सिर्फ़ इसलिए है कि आपको विज्ञापन दिखाकर लूटते रहें। इससे बचने का एक ही समाधान है—भगवद्गीता, वेदांत और बोध ग्रंथों से जुड़ना।
जातिवाद: कारण और समाधान
जातिवाद: कारण और समाधान
22 min
मनुष्य चाहे किसी भी देश में हो, किसी भी परिस्थिति में हो, दुर्भाग्यवश विभाजन उसे सहज लगता है। जहाँ जाति के आधार पर विभाजन नहीं होता, वहाँ कोई और नाम लेकर यह प्रवृत्ति सामने आ जाती है। इन सभी बँटवारों का मूल स्रोत केवल मन की अज्ञानता और भ्रम है। जातिवाद मात्र एक लक्षण है, और मनुष्य को इससे नहीं, बल्कि समूची समस्या से मुक्ति चाहिए। इसका एकमात्र उपाय है—जीवन को गहराई से देखना, मन को समझना, जो वेदांत, गीता और उपनिषदों के अध्ययन से संभव है।
दहेज-प्रथा कैसे खत्म होगी?
दहेज-प्रथा कैसे खत्म होगी?
13 min
जब दूसरे के प्रति शोषण का नहीं, प्रेम का भाव होता है और इंसान को अपनी गरिमा की कुछ परवाह होती है, तब ये करना असंभव हो जाता है कि तुम किसी के साथ रहने के लिए उससे पैसे माँगो। हमारे समाज में लड़के को वैसे ही बड़ा करा जाता है जैसे कसाई अपने बकरे को बड़ा करता है कि एक दिन इसको वसूलूँगा! ये मुद्दा हमें कब का पीछे छोड़ देना चाहिए था। लोग पहले कुतर्क देते थे कि दहेज का एक इकोनॉमिक लॉजिक होता है। अब तो लड़की कमाती है, अब किस तर्क पर दहेज देते हो?