Shiva

Top Books on Lord Shiv By Acharya Prashant
Top Books on Lord Shiv By Acharya Prashant
5 min
Explore Books on Lord Shiv by Acharya Prashant, revealing deep Vedantic insights into Shiv’s true essence, symbols, and spiritual wisdom beyond misconceptions.
कावड़ यात्रा का वास्तविक अर्थ क्या है?
कावड़ यात्रा का वास्तविक अर्थ क्या है?
17 min
धर्म के साथ कई तरह की परंपराएँ जुड़ी हैं, जिनका उद्देश्य होता है — मन को भ्रम और दुख से मुक्ति देना। ‘शिव’ परम सत्य का दूसरा नाम है। यदि तीर्थाटन करने से मन साफ़ हो रहा है, आपके मन में सच्चाई दृढ़ता से स्थापित होती है, तो तीर्थयात्रा बहुत शुभ है — चाहे वह कावड़ यात्रा हो, अमरनाथ यात्रा हो, या केदार यात्रा। लेकिन यदि शिव का अर्थ बस मानसिक तल पर कुछ मान लिया है, उस पवित्रता से प्रेम ही नहीं, तो फिर क्या ही लाभ।
Shakti Is Movement, Shiva Is The Destination
Shakti Is Movement, Shiva Is The Destination
9 min
Shakti represents everything in motion, everything that can be experienced, everything in space-time. We move in search of a final destination. That point is symbolically represented by Shiva. Those who are inclined towards having the right kind of movement worship Shakti. Those who have fallen in love with the destination itself, worship Shiva. The fact is that the two are inseparable.
Shivling: Understanding Before the Debate
Shivling: Understanding Before the Debate
28 min
Now comes the deeper symbolism of Shivlinga. It says—look, if you have taken birth, then you are there in the body. But even while living in the body, you have to live as if you are without a body. So, the shape of the Yoni that you see in the Shivalinga is actually the world or the body, and this Lingam that you see in the middle of it is the Consciousness—the Consciousness which is located in the body.
फ़र्ज़ी बाबा को पहचानने के 9 सूत्र
फ़र्ज़ी बाबा को पहचानने के 9 सूत्र
95 min
हम वहाँ से शुरुआत करेंगे जहाँ पर कोई तर्क हो ही नहीं सकता। हम वहाँ से शुरुआत करेंगे जहाँ कोई मान्यता हो नहीं सकती और कौन सी हैं वो जगह ‘मैं’। बिल्कुल हो सकता है कि ये दीवारे न हो, ये मेरी मान्यता हो, आँखों का धोखा हो, सब कुछ झूठ हो सकता है। लेकिन एक चीज तो है न, जो है और उसी की खातिर मैं बात कर रहा हूँ, मैं हूँ और मैं हूँ। मुझे मेरे होने का दुख नहीं पता चलता है। मैं दुखी हूँ। यहाँ से सारा अध्यात्म शुरू होता है। बाकी सब नकली हो सकता है। आपको सामने वाले से एक बात पूछनी है दुखी हो? और ‘हो’। दुखी हो। उसमें अस्तित्व भी आ गया तुम्हारा। अहम। हो, हो माने अस्तित्व है तुम्हारा। अहम और दुख है। हाँ यही है अध्यात्म सारा।
शिव और शंकर में क्या अंतर है?
शिव और शंकर में क्या अंतर है?
11 min
आम जनमानस में तो ये एक ही हैं, पर अध्यात्म की दुनिया में बाकी सारे नाम सिर्फ नाम हैं, और शिव सत्य हैं। शिव कोई चरित्र नहीं हैं; शंकर का चरित्र होता है। शंकर किसी पुराण के केंद्रीय पात्र हो सकते हैं, शिव नहीं। शंकर मन की जितनी अधिकतम ऊँचाई पर उड़ सकता है, वह हैं। और शिव हैं उस मन का आकाश में विलीन हो जाना। तो विचार का उच्चतम बिंदु हुए शंकर, और निर्विचार हुए शिव।
Rishikesh: The City of Shiva
Rishikesh: The City of Shiva
24 min
Rishikesh is the city of Shiva; it is the city of ending. While many cities mark beginnings, Rishikesh is where you come to stop. Haven’t we already had enough beginnings? Things must end somewhere. Having passed through Brahma and Vishnu, it is now time to meet Shiva. Shiva is annihilation—a full stop.
महाशिवरात्रि का असली अर्थ क्या है?
महाशिवरात्रि का असली अर्थ क्या है?
14 min
महाशिवरात्रि का उत्सव मनाने का सार भीतर के अंधकार को पहचानना और उसे कम करने का प्रयास करना है, यह मानते हुए कि यह त्योहार केवल एक दिन का नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता की निरंतर यात्रा है। यह रात महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विनाश की एक धारा और नए आरंभ की दूसरी धारा के मिलन का प्रतीक है। किसी भी नए आरंभ के लिए, पहले पुराने, सड़े हुए और झूठे तत्वों को समाप्त करना आवश्यक है।
कौन हैं शिव?
कौन हैं शिव?
11 min
शिव कोई ऐसी इकाई नहीं हैं, जो अपना कोई निजी, पृथक या विशिष्ट व्यक्तित्व रखती हो। हम सब जहाँ पहुँचना चाहते हैं, हमारी एक-एक गतिविधि जिस अवस्था को हासिल करने के लिए है, उसका नाम है—शिव। सब समय, सब स्थान मन का विस्तार हैं और शिव मन का केन्द्र हैं। शिव इसलिए नहीं हैं कि उनके साथ और बहुत सारे किस्से जोड़ दो। शिव इसलिए हैं ताकि हम अपने किस्सों से मुक्ति पा सकें। शिव कोई देवता, भगवान या ईश्वर नहीं हैं, शिव सत्य मात्र हैं।
Are Shiv And Shankar Same?
Are Shiv And Shankar Same?
6 min
Shiv is unthinkable—beyond words, thought, and representation. He cannot be captured in pictures or idols. Yet, for most people, imagining truth without form feels impossible. This is where Shankar arrives. Shankar is the highest point a man’s imagination can reach. The maximum flight of the mind is Shankar, and Shiv is the disappearance of the mind into the sky.
How to Abide in The Shiva Truth? On Ribhu Gita
How to Abide in The Shiva Truth? On Ribhu Gita
11 min
So 'know', don’t try to know about Shiva. Shiva is not furniture. Shiva is not a tree. Shiva is not a cloud, not even the sky. How will you know Shiva? Do you know of anything that has no shape, no form, and is eternal? How will you know Shiva? But know, do know. What can you know? This world and yourself. Know that. That knowing is Shiva-ness. Shivatva.
शिव की तीसरी आँख का क्या रहस्य है?
शिव की तीसरी आँख का क्या रहस्य है?
14 min
दो आँखें सबके पास होती हैं, और ये सिर्फ़ दुनिया को देखती हैं, स्वयं को नहीं। शिव की तीसरी आँख एक प्रतीक है, जो बताती है कि आपकी ज़िंदगी में दुनिया से परे कुछ होना ज़रूरी है। क्योंकि जो केवल दुनिया को देखेगा, वह उसमें फँसकर दुख पाएगा। इसलिए दुनिया को और स्वयं को एकसाथ देखो। यही शिवत्व और शिव के तीसरे नेत्र का अर्थ है।
सपनों में भगवान मत देखो, जीवन में भगवान उतारो || आचार्य प्रशांत (2016)
सपनों में भगवान मत देखो, जीवन में भगवान उतारो || आचार्य प्रशांत (2016)
9 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सपनों में या ध्यान में किसी भी भगवान के दर्शन हो जाने को बड़ा महत्व दिया गया है, लोगों को ध्यान में शिव दिखते हैं और ऐसी बहुत कहानियाँ और भी प्रचलित हैं, ये सब क्या है कृपया स्पष्ट करें?

आचार्य प्रशांत: और शिव का भी वही

सच के सामने झुको, सच होने का दावा मत करो || आचार्य प्रशांत, निर्वाण षटकम् पर (2020)
सच के सामने झुको, सच होने का दावा मत करो || आचार्य प्रशांत, निर्वाण षटकम् पर (2020)
4 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। 'निर्वाण षटकम्' की एक पंक्ति है —

'न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम्।'

तो इसमें जो मोक्ष के विषय में कहा गया है कि मैं मोक्ष भी नहीं हूँ, तो क्या शिव को मोक्ष भी नहीं चाहिए?

आचार्य प्रशांत: हाँ,

शिव कौन हैं
शिव कौन हैं
69 min

आचार्य प्रशांत: महाशिवरात्रि का समय है और आपकी बहुत-सी जिज्ञासाएँ आयी हैं। आपने कहा कि जैसे अभी पूरी बात समझायी आपने कि ईश्वर माने क्या, आत्मा माने क्या, माया माने क्या, चार राम कौन से होते हैं — और श्री कृष्ण की गीता पर तो लंबे और पूरे व्याख्यान होते

जूता सर पर नहीं रखा जाता || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2020)
जूता सर पर नहीं रखा जाता || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2020)
24 min

आचार्य प्रशांत: आप मन का कोई विषय नहीं हैं। मन में कभी कोई विषय देखा है जो शाश्वत रहे कि अब आ गई मन में वो बात तो लगातार है, कोई भी ऐसी बात है? ज़िंदगी में आपको जो चीज़ सबसे प्यारी हो, वो भी क्या ऐसा होता है कि

शिवलिंग: बहस से पहले बोध || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
शिवलिंग: बहस से पहले बोध || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
28 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मेरा नाम परितोष त्रिपाठी है और मैं भी बनारस से ही आया हूँ।

आचार्य प्रशांत: हम भी बनारस से ही हैं।

(श्रोतागण हँसते हुए)

प्र: महर्षि वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण लिखा है जिसमें सात खंड हैं, जिसमें चौथा खंड काशी खंड है। और उसमें जो

रुद्राक्ष की विशेष शक्तियाँ? || आचार्य प्रशांत (2021)
रुद्राक्ष की विशेष शक्तियाँ? || आचार्य प्रशांत (2021)
8 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो रुद्राक्ष होता है उसके बारे में जैसे बचपन में मैंने भी सुना था, घर में कहते थे कि रुद्राक्ष को मंदिर में रखते हैं तो उससे जीवन में एक सकारात्मकता आती है।

आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं!

देखो, भारत एक विशेष जगह रहा है। यहाँ पर हमने

शिव का चरित्र ऐसा क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)
शिव का चरित्र ऐसा क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)
20 min

आचार्य प्रशांत: तुलसीदास उल्लेख करते हैं एक स्थान पर, वहीं से प्रश्नकर्ता ने ये सवाल रखा है: उल्लेख ये है कि ब्रह्मा जी पार्वती जी से शिकायत कर रहे हैं कि शिव आगा-पीछा देखे बिना, विचारे बिना, दान करते रहते हैं। इतना दान दे देते हैं कि उनके पास भी

ज़िंदगी की ठोकरें खा कर सीखो, या फिर ऐसे || आचार्य प्रशांत, गुरुपूर्णिमा पर (2020)
ज़िंदगी की ठोकरें खा कर सीखो, या फिर ऐसे || आचार्य प्रशांत, गुरुपूर्णिमा पर (2020)
25 min

प्रश्नकर्ता १: आचार्य जी, प्रणाम। आज गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर है। आपसे आज तक मिला तो नहीं हूंँ, लेकिन आपके वीडियोस व्याख्यान ही मेरे लिए गुरु समान हैं। सबसे पहले धन्यवाद!

श्री गुरुगीता में आया है —

"शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन। लब्ध्वा कुलगुरुं सम्यग्गुरुमेव समाश्रयेत्।।"

यदि

ईश्वर कौन? अवतार कौन? ब्रह्मा-विष्णु-महेश कौन? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
ईश्वर कौन? अवतार कौन? ब्रह्मा-विष्णु-महेश कौन? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
45 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं आपको पिछले छः महीने से सुन रही हूँ और मेरा प्रश्न पहले सत्र से जुड़ा हुआ है। तब आपने कहा था और मैं मानती भी हूँ कि जो ब्रह्म है वही सत्य है। और जो निराकार है, जिसे हम ईश्वर भी कहते हैं, सामान्य भाषा

जहाँ आत्मा है, मात्र वहीं बल है || आचार्य प्रशांत (2017)
जहाँ आत्मा है, मात्र वहीं बल है || आचार्य प्रशांत (2017)
16 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अनहद में नाचते समय जो ऊर्जा थी वह ऊर्जा हमेशा नाचने में क्यों नहीं होती?

आचार्य प्रशांत: तो ऊर्जा का संबंध फिर किससे हुआ? शांति से। मैं उसको थोड़ा और साफ़ करके बोलूँ तो ऊर्जा का संबंध हुआ आत्मा से। जब कुछ भी आत्मिक होता है तो

विधियों से आगे है ध्यान || आचार्य प्रशांत, विज्ञान भैरव तंत्र पर (2016)
विधियों से आगे है ध्यान || आचार्य प्रशांत, विज्ञान भैरव तंत्र पर (2016)
1 min
Related Articles
So, You Want To Change The World?
So, You Want To Change The World?
16 min
Every living being, from humans to the smallest species, is trying to change the world to suit its own needs. But this is not intended to do any good to the world, it is just coming from the little ego. And the ego will not say, “I'm not all right;” it will try to change the world. So, if your idea of ‘good’ is only relative to your personal self, is it right to impose it on others? You must be clear about why you aspire to change the world, and whether you have brought about any change in yourself first.
भगवान
भगवान
4 min
जो बाहर रहता है ना भगवान, जो आँखों से दिखाई देता है, जिसको तुम कहते हो, ‘यह जगह है, ये ऐसा-ऐसा;’ वो तो तुम्हारा भगवान है। तुम उस पर अपने सब पसंद–नापसंद आरोपित कर देते हो। उसकी सारी कहानियाँ तुम अपनी सुविधा के हिसाब से बना लेते हो। "हरि मरें तो हम मरें, और हमरी मरे बलाय। साँचे गुरु का बालका, मरे ना मारा जाय, कबीरा।।” यहाँ दिल में बैठा लिया है, यहाँ वाला जो भगवान होता है, वो राजा होता है। उसको तुम अपने हिसाब से नहीं चला सकते। तुम्हें उसके हिसाब से चलना होता है।
मेरा भगवान मेरा प्यार मेरी ज़िम्मेदारी — किसी और पर क्यों छोड़ दूँ?
मेरा भगवान मेरा प्यार मेरी ज़िम्मेदारी — किसी और पर क्यों छोड़ दूँ?
45 min
प्यार होना चाहिए न। बात सारी उस ज़िंदगी की है, जिसके दिल में प्यार धड़क रहा हो। मैं साधारण प्यार की बात कर रहा हूँ, अभी मान लीजिए आदमी–औरत वाले ही प्यार की। आपको प्रेम है किसी से, पंद्रह लोग आकर कह रहे हैं, “इसको हमारे हवाले कर दो।” छोड़ोगे क्या? मैं बताता हूँ, छोड़ देते हो, क्योंकि अपनी ज़िंदगी में तुम अपने दम पर, अपने पुरुषार्थ पर, एक लड़की को भी नहीं रख सकते, तो भगवान को कैसे रखोगे? जैसे अपना प्यार समाज के सुपुर्द कर देते हो न, वैसे ही फिर अपना भगवान भी समाज के सुपुर्द कर देते हो।
तुम मजबूर हो नहीं, बस मजबूरी पकड़ रखी है
तुम मजबूर हो नहीं, बस मजबूरी पकड़ रखी है
32 min
गिरोगे, मिट्टी लगेगी चेहरे पर, क्रोध भी आएगा, हारते हुए भी प्रतीत होओगे। ये सब अनुभव होंगे, और जब अनुभव हों तो ये मत सोच लेना कि प्रक्रिया टूट गई। होता है भाई। बल्कि हार रहे थे हारते-हारते जीत गए, तब तो और मज़ा है।
वासना और डर: एक ही जड़
वासना और डर: एक ही जड़
11 min
अगर आपको ये भी डर लग रहा है कि अज्ञात भविष्य में क्या होगा, तो आपने उस अज्ञात भविष्य के ऊपर अपनी ज्ञात कल्पनाएँ थोपी हैं, इसलिए आपको डर लग रहा है।
भगवान माने क्या!
भगवान माने क्या!
12 min

प्रश्न: ‘भगवान’ क्या हैं?

वक्ता: इसका जवाब देना बहुत आसान हो जाता अगर तुमको वाकई पता ही ना होता, अगर पहले ये शब्द कभी सुन ही न रखा होता। अगर कोई बिल्कुल साफ़ स्लेट के साथ ये सवाल पूछे, ‘भगवान का क्या मतलब है?’ तो इसका जवाब देना

आई टेक नथिंग पर्सनली
आई टेक नथिंग पर्सनली
30 min
चार्ली चैप्लिन की कॉमेडी होती है, उसमें वो बेचारे हमेशा गिर रहे होते हैं, पिट रहे होते हैं। मज़ा आता है या नहीं आता है? कितना हँसते हो। और अपने साथ हो जाता है तो? अपने साथ भी जब हो, तो यही मानो, दूसरे के साथ हुआ है। मैं सब कुछ ऐसे ही लेता हूँ, जैसे चार्ली चैप्लिन के साथ हो रहा हो, मेरे साथ नहीं हो रहा। आई टेक नथिंग पर्सनली। जितना दुनिया पर आश्रित रहोगे, दुनिया उतनी चोट मारेगी। और दुनिया पर आश्रित नहीं हो, तो दुनिया के भाँति-भाँति के रंग उल्लास की बात बन जाते हैं।
You Fear Death Because You’ve Never Lived
You Fear Death Because You’ve Never Lived
5 min
Death is certain for everybody in the future. What matters is that today, you are alive. Wasting time is bad even for an otherwise healthy young person. But when you know that your clock is ticking, then wasting time makes no sense at all. Let every day be a celebration of some kind or the other. Be free, sit together, eat together, travel together, and make the best use of whatever time is there.
तुम्हारी बर्बादी के दो कारण: झूठा आत्मविश्वास और बहाने
तुम्हारी बर्बादी के दो कारण: झूठा आत्मविश्वास और बहाने
15 min
वो जो भीतर बैठ के ये भी कह रहा है कि "मैं बर्बाद हो गया," वो बस यही कह रहा है कि जो ऑब्जेक्ट मुझे अच्छा लगता था, मुझे वो नहीं मिला। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उसके पास अब कोई ऑब्जेक्ट नहीं है। इसका मतलब ये है कि वो अभी भी कोई और ऑब्जेक्ट पकड़ कर बैठा ही हुआ है। तो सारे दुख की वजह ये नहीं होती कि ऑब्जेक्ट नहीं है। उसकी वजह होती है कि ईगो अभी भी है, डिज़ायर अभी भी है। और "मुझसे कुछ नहीं होगा" ये आईडिया अभी भी है।
Why Do We Go to the Upanishads?
Why Do We Go to the Upanishads?
17 min
Joy is not a problem. Suffering is a problem. I am the sufferer. And if this ‘I’ is the problem, the sufferer, then firstly the ‘I’ itself has to be approached. And when I find that my efforts are getting saturated, I will have to go to a book that talks exclusively of the ‘I.’ The Upanishads are such books, because their subject matter is nothing but the ‘I.’ So, if you come across something that is dealing in stories, beliefs, and deviating from the self, you must know that it is not Vedanta at all.
मौत नहीं, अधूरी कहानी डराती है
मौत नहीं, अधूरी कहानी डराती है
21 min
मृत्यु डरावनी होती ही इसीलिए है, क्योंकि वह एक अधूरी कहानी का अंत होती है। जब कोई अपना चला जाता है, तो हम रोते हैं कि अभी सोचा था इनके साथ यह बातें करेंगे, नहीं कर पाए। अभी सोचा था, इनको साथ ले वहाँ घूम आएँगे, नहीं घूम पाए। बहुत कुछ संभव था, जो हो नहीं पाया। मृत्यु का कष्ट है ही अधूरेपन में, तो मरने से पहले ही पूरे हो जाओ। मरो मरो हे जोगी मरो, मरो मरण है मीठा — मुक्त हो जाओ।
Stop Chasing Praise – Know about Ego and Validation
Stop Chasing Praise – Know about Ego and Validation
3 min
The theoretical reply would be that if condemnation hurts you, then somewhere you are looking for praise. Even if it’s implicit praise or subtle praise, there is some hunger for praise. Or the inner condition that the ego has set is, don’t give me praise, but don’t condemn me either. So there is some condition that the ego is setting on the world. The fact is, the world has a movement, a flow of its own. You cannot set any condition on it. If you are getting hurt, it means there is an expectation, a condition.
कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर कैसे निकलें?
कम्फ़र्ट ज़ोन से बाहर कैसे निकलें?
6 min
अहंकार पूरी ज़िंदगी आत्मरक्षा के अलावा और कुछ नहीं कर रहा होता। 'मुझे अपने आप को बचाना है,' और अगर उसे अपने आप को बचाना है, तो वो अपने लिए कोई कठिन लक्ष्य चुनेगा क्या? यह मत कहो कि 'मुझे जो पसंद है, मैं वो काम करूँगा,' तुम वो काम करोगे तो फिर कुछ बदलेगा भी नहीं। जहाँ दिख रहा है कि कमज़ोरी है, वहाँ जाओ — भले ही वहाँ कुछ लाभ न हो रहा हो, भले ही वहाँ कोई पूछने वाला न हो। वहाँ पर ठीक है, पोल खुलेगी, थोड़ी बेइज़्ज़ती होगी, लेकिन कमज़ोरी टूटेगी।
Living in Security And Freedom
Living in Security And Freedom
26 min
At the level of the body, this world will have an influence on you, and there is no need to even contest that. Let it happen, because it is going to happen anyway. But inwardly, let there be a place so sacred that nobody is allowed to enter — not even you. And when that is there, you can freely participate in the world because you'll no longer be afraid. You'll say, “Come what may, I'm secure within.” Then you will live in deep security, and we all know how pleasing security is.
Self-Worth Is a Lie You've Been Sold
Self-Worth Is a Lie You've Been Sold
41 min
The self is a hollow, incomplete thing by its own admission. It has no free existence of its own; it is nothing but associations with the objects around it, absorbing its worth from the environment. To hide this absence of self-worth, you keep running after all kinds of things, yet the promise of fulfillment is never kept, and you are deceived. Therefore, to have any self-worth, you must have clarity about the self. All wisdom literature is about clearing away your false notions of the self.
सोशल एंग्ज़ायटी कैसे दूर करें?
सोशल एंग्ज़ायटी कैसे दूर करें?
8 min
सोशल एंग्ज़ायटी इसलिए है क्योंकि तुम्हारे पास जो है, वो बस सोशल ही सोशल है — सोशल मीडिया, सोशल इन्फ्लुएंसर्स, सोशल लाइफ़। ये जितने लोग जो तुम्हारे रोल मॉडल बने हैं, ये सब तुम्हें जीने के गलत तरीकों से लगातार भरे हुए हैं; उनको बर्ख़ास्त करो। अपने सामान्य ज्ञान को गहरा करो। विज़डम लिटरेचर और साधारण आध्यात्मिक कहानियों से होते हुए उपनिषदों तक पहुँचो। वो डर का आख़िरी इलाज है।
ईर्ष्या का आख़िरी इलाज
ईर्ष्या का आख़िरी इलाज
8 min
जब अपनी ज़िंदगी का पता होता है तो दूसरों से ईर्ष्या नहीं होती। दूसरों से आप बहुत तुलना करना ही नहीं चाहते क्योंकि अब ‘me versus you’ नहीं होता, अब ‘me versus me’ होता है। दूसरे को देखकर आप एक प्रेरणा ले सकते हो, लेकिन उसकी जो तरक़्क़ी देखोगे, वो उसकी तुलना में देखोगे। हम गड़बड़ ये कर देते हैं कि उसकी तुलना अपने आप से करने लगते हैं, जबकि हर व्यक्ति की स्थिति और स्थान बिल्कुल विशिष्ट होता है।
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
6 min

Question: If love is death of ego, then how will we live? Man is made of only these things. So, the only thing left will be ‘soul’. So we can say that we have moksha (liberation).

Speaker: The question is: If love is death of ego, then a loving man

Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
Observing the world, one comes to the ego. Observing ego, one comes to the Self || Acharya Prashant
6 min

Questioner: If love is death of ego, then loving man will be just soul. So, is love Moksha (Salvation)?

Acharya Prashant: Everything that you just said, is a concept in your mind. Ego lives on concepts; ego lives on thoughts—concepts are thoughts.

What is the definition of a concept? Where

सच्चा आस्तिक ही ‘नास्तिक’ क्यों कहलाता है? एक प्राचीन राज़!
सच्चा आस्तिक ही ‘नास्तिक’ क्यों कहलाता है? एक प्राचीन राज़!
40 min
बहुत ज़रूरी है कि सनातन धर्म को रिक्लेम किया जाए। उसको वापस ऋषियों के पास पहुँचाया जाए। नहीं तो ये जो उल्टा-पुल्टा अर्थ चल गया है, आस्तिकता-नास्तिकता का। अभी तो चलिए, फिर भी मेरे जैसे कुछ हैं जो बता देंगे। काल की धार आगे बढ़ेगी, ये बताने वाला भी कोई नहीं रहेगा। आने वाली पीढ़ियों को यही लगेगा कि यही होती है आस्तिकता, कि जैसे पश्चिम में गॉड बिलीवर और गॉड फियरिंग होता है। इसी को आस्तिक बोलते हैं भारत में। वो यही मानने लग जाएँगे।
देवी का रहस्य क्या? शक्ति का अर्थ क्या? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - तृतीय चरित्र (2022)
देवी का रहस्य क्या? शक्ति का अर्थ क्या? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - तृतीय चरित्र (2022)
59 min

आचार्य प्रशांत: तो आज हम दुर्गा सप्तशती के तीसरे चरित्र में प्रवेश कर रहे हैं और पिछले चरित्र का और पिछले अध्याय का अन्त किसके वध पर हुआ था?

श्रोता: महिषासुर।

आचार्य प्रशांत: महिषासुर के वध पर हुआ था, तो महिषासुर का वध हो गया था और देवता लोग प्रसन्न

Who Am I?
Who Am I?
7 min
You are the quality of your present action. You are, right now, attention itself, if you are indeed listening to me. Unfortunately, this identity won't last. Soon you will be distracted. You'll become somebody else. The discipline lies in holding on to the highest identity possible, that which you know to be the highest, given your limited capacity. That's who you should be. That's the answer to — ‘Who am I?’
श्राद्ध का असली महत्त्व क्या है?
श्राद्ध का असली महत्त्व क्या है?
10 min
हम सब जिनको चाहते हैं, या तो वह हमसे पहले चले जाते हैं या हम उनसे पहले चले जाते हैं। यह विदाई बताती है कि जैसे तुमने मुझे चाहा, लेकिन पाया कि मैं खो गया, वैसे ही तुम जो कुछ भी चाह रहे हो, वह सब खो जाना है, नष्ट हो जाना है। तो जाने वाला अपनी अन्तिम और उच्चतम इच्छा आपको बता रहा है कि कुछ ऐसा चाह लो, जो विदा न हो सकता हो, जिसको मौत भी तुमसे न छीन सके। तुम सही ज़िंदगी जियो, अपना जीवन पूर्ण करके दिखाओ — यही वास्तविक श्रद्धांजलि है।
Are Death Rituals Important?
Are Death Rituals Important?
5 min
Death has a certain significance. But rituals, whether at the time of birth or death, mean nothing to Prakriti. And even at the level of the Truth, where there is neither birth nor death, rituals don’t matter. In between these two is the level of the social mind — this is where rituals seem to matter. Not an absolute significance but if you are heavily influenced by society, going against it has consequences. Those who still can't take blows don't need to get into needless rebellions. There are bigger battles to fight. But those who are ready; there has to be resolve within and tact outside.
अहंकार रहित काया मंदिर, अहंकार का मिटना ही पूजा
अहंकार रहित काया मंदिर, अहंकार का मिटना ही पूजा
14 min
आप मुक्त हो तो आपकी आँखें सुंदर, आपकी काया सुंदर, आपके कर्म सुंदर, आपके वचन सुंदर, आपका जीवन सुंदर। अगर आप मुक्त हो तो आपका जो कुछ है, सब सुंदर हो जाएगा। और अगर आप मुक्त नहीं हो तो आपका जो कुछ है, वो सब बहुत ही विकृत और कुरूप रहेगा। आप मुक्त हो जाओ, आपका घर भी सुंदर हो जाएगा। आप मुक्त हो जाओ, आपका ग्रह भी सुंदर हो जाएगा। ग्रह भी और गृह भी।
सच्चा विद्रोह: अपने ख़िलाफ़ जाना
सच्चा विद्रोह: अपने ख़िलाफ़ जाना
13 min
अपने ख़िलाफ़ जाना ही सबसे मुश्किल होता है। जो अपने ख़िलाफ़ जा सकता है, वही ‘अपने’ को पाता है। आमतौर पर हम एक संस्कारित मशीन की भाँति पुराने बहाव में बहे चले जाते हैं। लेकिन अपनी वृत्तियों और संस्कारों के बहाव को तोड़ा जा सकता है। संस्कारों का तूफ़ान आता है और तुम उसमें थोड़ी देर के लिए अडिग खड़े हो जाओ — यह तुम्हारा विद्रोह हुआ। इसी विद्रोह का नाम अध्यात्म है।
Good, Evil, and the Ego
Good, Evil, and the Ego
4 min
In the universe, there is no good, no evil. Ask instead, ‘To whom is good, and to whom is evil?’ The self, the ‘I,’ the ‘me,’ the one who wants to define good, the one who wants to define evil — he is evil, because he does not exist. Spirituality is giving the evil something right to do. If you do not give the evil the right thing to do, it will pick something else, making itself feel relevant, whereas the fact is that it has zero relevance. Work to remove yourself. That's your task.