Shiva

Shiv: Beyond History And Myth
Shiv: Beyond History And Myth
6 min
Shiv isn’t a person who existed at some point in time. Shiv isn’t confined to a specific place. Stories are sometimes useful pointers to the truth, but in our ignorance, we take the pointers themselves as history, facts or Truth. Shiv is the joy of pure consciousness. When false identifications and attachments are dropped in the light of self-knowledge, what remains is called the untainted essence of Shiv.
Top Books on Lord Shiv By Acharya Prashant
Top Books on Lord Shiv By Acharya Prashant
5 min
Explore Books on Lord Shiv by Acharya Prashant, revealing deep Vedantic insights into Shiv’s true essence, symbols, and spiritual wisdom beyond misconceptions.
कावड़ यात्रा का वास्तविक अर्थ क्या है?
कावड़ यात्रा का वास्तविक अर्थ क्या है?
17 min
धर्म के साथ कई तरह की परंपराएँ जुड़ी हैं, जिनका उद्देश्य होता है — मन को भ्रम और दुख से मुक्ति देना। ‘शिव’ परम सत्य का दूसरा नाम है। यदि तीर्थाटन करने से मन साफ़ हो रहा है, आपके मन में सच्चाई दृढ़ता से स्थापित होती है, तो तीर्थयात्रा बहुत शुभ है — चाहे वह कावड़ यात्रा हो, अमरनाथ यात्रा हो, या केदार यात्रा। लेकिन यदि शिव का अर्थ बस मानसिक तल पर कुछ मान लिया है, उस पवित्रता से प्रेम ही नहीं, तो फिर क्या ही लाभ।
Shakti Is Movement, Shiva Is The Destination
Shakti Is Movement, Shiva Is The Destination
9 min
Shakti represents everything in motion, everything that can be experienced, everything in space-time. We move in search of a final destination. That point is symbolically represented by Shiva. Those who are inclined towards having the right kind of movement worship Shakti. Those who have fallen in love with the destination itself, worship Shiva. The fact is that the two are inseparable.
Shivling: Understanding Before the Debate
Shivling: Understanding Before the Debate
28 min
Now comes the deeper symbolism of Shivlinga. It says—look, if you have taken birth, then you are there in the body. But even while living in the body, you have to live as if you are without a body. So, the shape of the Yoni that you see in the Shivalinga is actually the world or the body, and this Lingam that you see in the middle of it is the Consciousness—the Consciousness which is located in the body.
फ़र्ज़ी बाबा को पहचानने के 9 सूत्र
फ़र्ज़ी बाबा को पहचानने के 9 सूत्र
95 min
हम वहाँ से शुरुआत करेंगे जहाँ पर कोई तर्क हो ही नहीं सकता। हम वहाँ से शुरुआत करेंगे जहाँ कोई मान्यता हो नहीं सकती और कौन सी हैं वो जगह ‘मैं’। बिल्कुल हो सकता है कि ये दीवारे न हो, ये मेरी मान्यता हो, आँखों का धोखा हो, सब कुछ झूठ हो सकता है। लेकिन एक चीज तो है न, जो है और उसी की खातिर मैं बात कर रहा हूँ, मैं हूँ और मैं हूँ। मुझे मेरे होने का दुख नहीं पता चलता है। मैं दुखी हूँ। यहाँ से सारा अध्यात्म शुरू होता है। बाकी सब नकली हो सकता है। आपको सामने वाले से एक बात पूछनी है दुखी हो? और ‘हो’। दुखी हो। उसमें अस्तित्व भी आ गया तुम्हारा। अहम। हो, हो माने अस्तित्व है तुम्हारा। अहम और दुख है। हाँ यही है अध्यात्म सारा।
शिव और शंकर में क्या अंतर है?
शिव और शंकर में क्या अंतर है?
11 min
आम जनमानस में तो ये एक ही हैं, पर अध्यात्म की दुनिया में बाकी सारे नाम सिर्फ नाम हैं, और शिव सत्य हैं। शिव कोई चरित्र नहीं हैं; शंकर का चरित्र होता है। शंकर किसी पुराण के केंद्रीय पात्र हो सकते हैं, शिव नहीं। शंकर मन की जितनी अधिकतम ऊँचाई पर उड़ सकता है, वह हैं। और शिव हैं उस मन का आकाश में विलीन हो जाना। तो विचार का उच्चतम बिंदु हुए शंकर, और निर्विचार हुए शिव।
Rishikesh: The City of Shiva
Rishikesh: The City of Shiva
24 min
Rishikesh is the city of Shiva; it is the city of ending. While many cities mark beginnings, Rishikesh is where you come to stop. Haven’t we already had enough beginnings? Things must end somewhere. Having passed through Brahma and Vishnu, it is now time to meet Shiva. Shiva is annihilation—a full stop.
महाशिवरात्रि का असली अर्थ क्या है?
महाशिवरात्रि का असली अर्थ क्या है?
14 min
महाशिवरात्रि का उत्सव मनाने का सार भीतर के अंधकार को पहचानना और उसे कम करने का प्रयास करना है, यह मानते हुए कि यह त्योहार केवल एक दिन का नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता की निरंतर यात्रा है। यह रात महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विनाश की एक धारा और नए आरंभ की दूसरी धारा के मिलन का प्रतीक है। किसी भी नए आरंभ के लिए, पहले पुराने, सड़े हुए और झूठे तत्वों को समाप्त करना आवश्यक है।
कौन हैं शिव?
कौन हैं शिव?
11 min
शिव कोई ऐसी इकाई नहीं हैं, जो अपना कोई निजी, पृथक या विशिष्ट व्यक्तित्व रखती हो। हम सब जहाँ पहुँचना चाहते हैं, हमारी एक-एक गतिविधि जिस अवस्था को हासिल करने के लिए है, उसका नाम है—शिव। सब समय, सब स्थान मन का विस्तार हैं और शिव मन का केन्द्र हैं। शिव इसलिए नहीं हैं कि उनके साथ और बहुत सारे किस्से जोड़ दो। शिव इसलिए हैं ताकि हम अपने किस्सों से मुक्ति पा सकें। शिव कोई देवता, भगवान या ईश्वर नहीं हैं, शिव सत्य मात्र हैं।
Are Shiv And Shankar Same?
Are Shiv And Shankar Same?
6 min
Shiv is unthinkable—beyond words, thought, and representation. He cannot be captured in pictures or idols. Yet, for most people, imagining truth without form feels impossible. This is where Shankar arrives. Shankar is the highest point a man’s imagination can reach. The maximum flight of the mind is Shankar, and Shiv is the disappearance of the mind into the sky.
How to Abide in The Shiva Truth? On Ribhu Gita
How to Abide in The Shiva Truth? On Ribhu Gita
11 min
So 'know', don’t try to know about Shiva. Shiva is not furniture. Shiva is not a tree. Shiva is not a cloud, not even the sky. How will you know Shiva? Do you know of anything that has no shape, no form, and is eternal? How will you know Shiva? But know, do know. What can you know? This world and yourself. Know that. That knowing is Shiva-ness. Shivatva.
शिव की तीसरी आँख का क्या रहस्य है?
शिव की तीसरी आँख का क्या रहस्य है?
14 min
दो आँखें सबके पास होती हैं, और ये सिर्फ़ दुनिया को देखती हैं, स्वयं को नहीं। शिव की तीसरी आँख एक प्रतीक है, जो बताती है कि आपकी ज़िंदगी में दुनिया से परे कुछ होना ज़रूरी है। क्योंकि जो केवल दुनिया को देखेगा, वह उसमें फँसकर दुख पाएगा। इसलिए दुनिया को और स्वयं को एकसाथ देखो। यही शिवत्व और शिव के तीसरे नेत्र का अर्थ है।
सपनों में भगवान मत देखो, जीवन में भगवान उतारो || आचार्य प्रशांत (2016)
सपनों में भगवान मत देखो, जीवन में भगवान उतारो || आचार्य प्रशांत (2016)
9 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सपनों में या ध्यान में किसी भी भगवान के दर्शन हो जाने को बड़ा महत्व दिया गया है, लोगों को ध्यान में शिव दिखते हैं और ऐसी बहुत कहानियाँ और भी प्रचलित हैं, ये सब क्या है कृपया स्पष्ट करें?

आचार्य प्रशांत: और शिव का भी वही

सच के सामने झुको, सच होने का दावा मत करो || आचार्य प्रशांत, निर्वाण षटकम् पर (2020)
सच के सामने झुको, सच होने का दावा मत करो || आचार्य प्रशांत, निर्वाण षटकम् पर (2020)
4 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। 'निर्वाण षटकम्' की एक पंक्ति है —

'न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम्।'

तो इसमें जो मोक्ष के विषय में कहा गया है कि मैं मोक्ष भी नहीं हूँ, तो क्या शिव को मोक्ष भी नहीं चाहिए?

आचार्य प्रशांत: हाँ,

शिव कौन हैं
शिव कौन हैं
69 min

आचार्य प्रशांत: महाशिवरात्रि का समय है और आपकी बहुत-सी जिज्ञासाएँ आयी हैं। आपने कहा कि जैसे अभी पूरी बात समझायी आपने कि ईश्वर माने क्या, आत्मा माने क्या, माया माने क्या, चार राम कौन से होते हैं — और श्री कृष्ण की गीता पर तो लंबे और पूरे व्याख्यान होते

जूता सर पर नहीं रखा जाता || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2020)
जूता सर पर नहीं रखा जाता || आचार्य प्रशांत, वेदान्त पर (2020)
24 min

आचार्य प्रशांत: आप मन का कोई विषय नहीं हैं। मन में कभी कोई विषय देखा है जो शाश्वत रहे कि अब आ गई मन में वो बात तो लगातार है, कोई भी ऐसी बात है? ज़िंदगी में आपको जो चीज़ सबसे प्यारी हो, वो भी क्या ऐसा होता है कि

शिवलिंग: बहस से पहले बोध || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
शिवलिंग: बहस से पहले बोध || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
28 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मेरा नाम परितोष त्रिपाठी है और मैं भी बनारस से ही आया हूँ।

आचार्य प्रशांत: हम भी बनारस से ही हैं।

(श्रोतागण हँसते हुए)

प्र: महर्षि वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण लिखा है जिसमें सात खंड हैं, जिसमें चौथा खंड काशी खंड है। और उसमें जो

रुद्राक्ष की विशेष शक्तियाँ? || आचार्य प्रशांत (2021)
रुद्राक्ष की विशेष शक्तियाँ? || आचार्य प्रशांत (2021)
8 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो रुद्राक्ष होता है उसके बारे में जैसे बचपन में मैंने भी सुना था, घर में कहते थे कि रुद्राक्ष को मंदिर में रखते हैं तो उससे जीवन में एक सकारात्मकता आती है।

आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं!

देखो, भारत एक विशेष जगह रहा है। यहाँ पर हमने

शिव का चरित्र ऐसा क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)
शिव का चरित्र ऐसा क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)
20 min

आचार्य प्रशांत: तुलसीदास उल्लेख करते हैं एक स्थान पर, वहीं से प्रश्नकर्ता ने ये सवाल रखा है: उल्लेख ये है कि ब्रह्मा जी पार्वती जी से शिकायत कर रहे हैं कि शिव आगा-पीछा देखे बिना, विचारे बिना, दान करते रहते हैं। इतना दान दे देते हैं कि उनके पास भी

ज़िंदगी की ठोकरें खा कर सीखो, या फिर ऐसे || आचार्य प्रशांत, गुरुपूर्णिमा पर (2020)
ज़िंदगी की ठोकरें खा कर सीखो, या फिर ऐसे || आचार्य प्रशांत, गुरुपूर्णिमा पर (2020)
25 min

प्रश्नकर्ता १: आचार्य जी, प्रणाम। आज गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर है। आपसे आज तक मिला तो नहीं हूंँ, लेकिन आपके वीडियोस व्याख्यान ही मेरे लिए गुरु समान हैं। सबसे पहले धन्यवाद!

श्री गुरुगीता में आया है —

"शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन। लब्ध्वा कुलगुरुं सम्यग्गुरुमेव समाश्रयेत्।।"

यदि

ईश्वर कौन? अवतार कौन? ब्रह्मा-विष्णु-महेश कौन? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
ईश्वर कौन? अवतार कौन? ब्रह्मा-विष्णु-महेश कौन? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
45 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं आपको पिछले छः महीने से सुन रही हूँ और मेरा प्रश्न पहले सत्र से जुड़ा हुआ है। तब आपने कहा था और मैं मानती भी हूँ कि जो ब्रह्म है वही सत्य है। और जो निराकार है, जिसे हम ईश्वर भी कहते हैं, सामान्य भाषा

जहाँ आत्मा है, मात्र वहीं बल है || आचार्य प्रशांत (2017)
जहाँ आत्मा है, मात्र वहीं बल है || आचार्य प्रशांत (2017)
16 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अनहद में नाचते समय जो ऊर्जा थी वह ऊर्जा हमेशा नाचने में क्यों नहीं होती?

आचार्य प्रशांत: तो ऊर्जा का संबंध फिर किससे हुआ? शांति से। मैं उसको थोड़ा और साफ़ करके बोलूँ तो ऊर्जा का संबंध हुआ आत्मा से। जब कुछ भी आत्मिक होता है तो

विधियों से आगे है ध्यान || आचार्य प्रशांत, विज्ञान भैरव तंत्र पर (2016)
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मैं हूँ और यह दुनिया है, तो सबको यह सवाल उठेगा कि, “डज़ गॉड एग्ज़िस्ट?” अब इसमें तुमने सवाल लगाया है ‘गॉड’ पर। यह छोड़ो कि गॉड माने क्या, पहले बताओ ‘एग्ज़िस्टेन्स’ माने क्या? इसलिए फ़िलॉसफ़ी ज़रूरी है। उसके बिना ये सारी जो बहसें हैं, ये बस ऐसे ही हैं, बेकार की बात, दोनों तरफ़ से। आस्तिकता बिल्कुल अलग बात है, ईश्वरवादिता बिल्कुल अलग बात है। आस्तिक होने का अर्थ है, सत्य को समर्पण। मेरी निष्ठा सत्य के प्रति है। तुम अगर गॉड, गॉड करोगे भी, तो मैं कहूँगा, सत्य ही गॉड है।
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When the person is dead, you remember that person. But when the person is alive, do you remember death? Who is not dying every moment? Please tell me. Then why do you want to believe that the person, as you see him right now, would be carried over to the future? No one gets carried over to the future. No one. Death has to be seen as a fact, not a fact at the end of a string, but as a present reality. It is not death that scares us. Unlived life is what we grieve for.
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Nothing Is Beyond Inquiry
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15 min
Beliefs can’t talk to each other. You will say, ‘The world was created on a Sunday.’ He’ll say, ‘No, on a Monday.’ He’ll say, ‘Tuesday.’ He’ll say, ‘Wednesday.’ Now talk, how will you reconcile this? You can only fight. Why do you need to believe? You look at the question, "What should I believe in?” Well, nothing.
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मौत से कैसा डर?
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अगर बीमारी वह चीज़ होती है, जिसके बाद मौत आती है, तो ज़िंदगी ही बीमारी है। तो एक तरह से सभी बीमार हैं। और उस बीमारी का नाम ही क्या है? लाइफ़। सबको ही जाना है। प्रश्न मृत्यु का नहीं है, प्रश्न जीवन का है। बात यह है कि जब तक हम जी रहे हैं, तब तक कैसे जी रहे हैं? मरने से आधे घंटे पहले भी जीवन की बात करो। जब मर जाएँगे, उसके बाद हम मौत की बात करेंगे। अध्यात्म सही जीवन जीने की कला है; इतना सही जीना, इतना सही जीना, कि मौत भूल ही जाए। और कोई मौत याद दिलाए, तो मौत चुटकुले जैसी लगे।
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अगर एक कमरा खाली है, उसमें मुझे घुसने से डर लग रहा है, तो इसका मतलब ये है कि कमरा अज्ञात नहीं छोड़ा मैंने। मैंने उसके ऊपर अपनी ज्ञात कल्पनाएँ डाल दीं, और अब मैं कह रहा हूँ कि इस कमरे के भीतर शेर है, या चोर है, या भूत है, या कुछ है। अगर आप भविष्य को अज्ञात का अज्ञात ही रहने दें, तो डर कहाँ से आएगा? ये होता है आत्म-अवलोकन, कि पीछे जाकर देखना कि ये जो एंड प्रॉडक्ट निकला है, फियर नाम का, ये किन-किन चीज़ों के कॉम्बिनेशन से आ रहा है। और आप जैसे ही ये देख लेते हो, आज़ाद हो जाते हो।
तुम्हें एक ज़बरदस्त उद्देश्य चाहिए
तुम्हें एक ज़बरदस्त उद्देश्य चाहिए
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यह जो ‘मैं’ है, जिसे सेल्फ कहते हैं, यह अपने आप में बहुत तपती हुई और अशांत चीज़ है। यह निरुद्देश्य हो कैसे सकती है? जैसे किसी आदमी को एक-सौ-चार डिग्री बुखार हो और वो कहे कि मैं डिज़ीज़लेस हूँ। एक-सौ-चार डिग्री बुखार हो तो आपके पास एक धधकता हुआ उद्देश्य होना चाहिए। क्या? बुखार उतारना है भाई! इसी तरह से जब तक ‘मैं’ है, उद्देश्य होना चाहिए। और वो उद्देश्य होगा उस ‘मैं’ की शांति।
Don't Suppress, Understand Your Feelings
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A thousand feelings: envy, fear, hatred, competition will come to you. You cannot fight them all, and there is no need to fight them. Be courageous when that feeling comes, and sit down like friends and talk. Be honest that you are the one who is nurturing that feeling all the time. Be aware that it is coming. Let it not enter like a thief. And when it comes, don’t feel small. You only need to understand, not control.
So, You Want To Change The World?
So, You Want To Change The World?
16 min
Every living being, from humans to the smallest species, is trying to change the world to suit its own needs. But this is not intended to do any good to the world, it is just coming from the little ego. And the ego will not say, “I'm not all right;” it will try to change the world. So, if your idea of ‘good’ is only relative to your personal self, is it right to impose it on others? You must be clear about why you aspire to change the world, and whether you have brought about any change in yourself first.
भगवान
भगवान
4 min
जो बाहर रहता है ना भगवान, जो आँखों से दिखाई देता है, जिसको तुम कहते हो, ‘यह जगह है, ये ऐसा-ऐसा;’ वो तो तुम्हारा भगवान है। तुम उस पर अपने सब पसंद–नापसंद आरोपित कर देते हो। उसकी सारी कहानियाँ तुम अपनी सुविधा के हिसाब से बना लेते हो। "हरि मरें तो हम मरें, और हमरी मरे बलाय। साँचे गुरु का बालका, मरे ना मारा जाय, कबीरा।।” यहाँ दिल में बैठा लिया है, यहाँ वाला जो भगवान होता है, वो राजा होता है। उसको तुम अपने हिसाब से नहीं चला सकते। तुम्हें उसके हिसाब से चलना होता है।
मेरा भगवान मेरा प्यार मेरी ज़िम्मेदारी — किसी और पर क्यों छोड़ दूँ?
मेरा भगवान मेरा प्यार मेरी ज़िम्मेदारी — किसी और पर क्यों छोड़ दूँ?
45 min
प्यार होना चाहिए न। बात सारी उस ज़िंदगी की है, जिसके दिल में प्यार धड़क रहा हो। मैं साधारण प्यार की बात कर रहा हूँ, अभी मान लीजिए आदमी–औरत वाले ही प्यार की। आपको प्रेम है किसी से, पंद्रह लोग आकर कह रहे हैं, “इसको हमारे हवाले कर दो।” छोड़ोगे क्या? मैं बताता हूँ, छोड़ देते हो, क्योंकि अपनी ज़िंदगी में तुम अपने दम पर, अपने पुरुषार्थ पर, एक लड़की को भी नहीं रख सकते, तो भगवान को कैसे रखोगे? जैसे अपना प्यार समाज के सुपुर्द कर देते हो न, वैसे ही फिर अपना भगवान भी समाज के सुपुर्द कर देते हो।
तुम मजबूर हो नहीं, बस मजबूरी पकड़ रखी है
तुम मजबूर हो नहीं, बस मजबूरी पकड़ रखी है
32 min
गिरोगे, मिट्टी लगेगी चेहरे पर, क्रोध भी आएगा, हारते हुए भी प्रतीत होओगे। ये सब अनुभव होंगे, और जब अनुभव हों तो ये मत सोच लेना कि प्रक्रिया टूट गई। होता है भाई। बल्कि हार रहे थे हारते-हारते जीत गए, तब तो और मज़ा है।
भगवान माने क्या!
भगवान माने क्या!
12 min

प्रश्न: ‘भगवान’ क्या हैं?

वक्ता: इसका जवाब देना बहुत आसान हो जाता अगर तुमको वाकई पता ही ना होता, अगर पहले ये शब्द कभी सुन ही न रखा होता। अगर कोई बिल्कुल साफ़ स्लेट के साथ ये सवाल पूछे, ‘भगवान का क्या मतलब है?’ तो इसका जवाब देना

आई टेक नथिंग पर्सनली
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30 min
चार्ली चैप्लिन की कॉमेडी होती है, उसमें वो बेचारे हमेशा गिर रहे होते हैं, पिट रहे होते हैं। मज़ा आता है या नहीं आता है? कितना हँसते हो। और अपने साथ हो जाता है तो? अपने साथ भी जब हो, तो यही मानो, दूसरे के साथ हुआ है। मैं सब कुछ ऐसे ही लेता हूँ, जैसे चार्ली चैप्लिन के साथ हो रहा हो, मेरे साथ नहीं हो रहा। आई टेक नथिंग पर्सनली। जितना दुनिया पर आश्रित रहोगे, दुनिया उतनी चोट मारेगी। और दुनिया पर आश्रित नहीं हो, तो दुनिया के भाँति-भाँति के रंग उल्लास की बात बन जाते हैं।
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