प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सपनों में या ध्यान में किसी भी भगवान के दर्शन हो जाने को बड़ा महत्व दिया गया है, लोगों को ध्यान में शिव दिखते हैं और ऐसी बहुत कहानियाँ और भी प्रचलित हैं, ये सब क्या है कृपया स्पष्ट करें?
आचार्य प्रशांत: और शिव का भी वही… read_more
प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। 'निर्वाण षटकम्' की एक पंक्ति है —
'न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम्।'
तो इसमें जो मोक्ष के विषय में कहा गया है कि मैं मोक्ष भी नहीं हूँ, तो क्या शिव को मोक्ष भी नहीं चाहिए?
आचार्य प्रशांत: हाँ,… read_more
आचार्य प्रशांत: महाशिवरात्रि का समय है और आपकी बहुत-सी जिज्ञासाएँ आयी हैं। आपने कहा कि जैसे अभी पूरी बात समझायी आपने कि ईश्वर माने क्या, आत्मा माने क्या, माया माने क्या, चार राम कौन से होते हैं — और श्री कृष्ण की गीता पर तो लंबे और पूरे व्याख्यान होते… read_more
आचार्य प्रशांत: आप मन का कोई विषय नहीं हैं। मन में कभी कोई विषय देखा है जो शाश्वत रहे कि अब आ गई मन में वो बात तो लगातार है, कोई भी ऐसी बात है? ज़िंदगी में आपको जो चीज़ सबसे प्यारी हो, वो भी क्या ऐसा होता है कि… read_more
प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मेरा नाम परितोष त्रिपाठी है और मैं भी बनारस से ही आया हूँ।
आचार्य प्रशांत: हम भी बनारस से ही हैं।
(श्रोतागण हँसते हुए)
प्र: महर्षि वेदव्यास जी ने स्कन्द पुराण लिखा है जिसमें सात खंड हैं, जिसमें चौथा खंड काशी खंड है। और उसमें जो… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो रुद्राक्ष होता है उसके बारे में जैसे बचपन में मैंने भी सुना था, घर में कहते थे कि रुद्राक्ष को मंदिर में रखते हैं तो उससे जीवन में एक सकारात्मकता आती है।
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं!
देखो, भारत एक विशेष जगह रहा है। यहाँ पर हमने… read_more
आचार्य प्रशांत: तुलसीदास उल्लेख करते हैं एक स्थान पर, वहीं से प्रश्नकर्ता ने ये सवाल रखा है: उल्लेख ये है कि ब्रह्मा जी पार्वती जी से शिकायत कर रहे हैं कि शिव आगा-पीछा देखे बिना, विचारे बिना, दान करते रहते हैं। इतना दान दे देते हैं कि उनके पास भी… read_more
प्रश्नकर्ता १: आचार्य जी, प्रणाम। आज गुरु पूर्णिमा का पावन अवसर है। आपसे आज तक मिला तो नहीं हूंँ, लेकिन आपके वीडियोस व्याख्यान ही मेरे लिए गुरु समान हैं। सबसे पहले धन्यवाद!
श्री गुरुगीता में आया है —
"शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन। लब्ध्वा कुलगुरुं सम्यग्गुरुमेव समाश्रयेत्।।"
यदि… read_more
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं आपको पिछले छः महीने से सुन रही हूँ और मेरा प्रश्न पहले सत्र से जुड़ा हुआ है। तब आपने कहा था और मैं मानती भी हूँ कि जो ब्रह्म है वही सत्य है। और जो निराकार है, जिसे हम ईश्वर भी कहते हैं, सामान्य भाषा… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अनहद में नाचते समय जो ऊर्जा थी वह ऊर्जा हमेशा नाचने में क्यों नहीं होती?
आचार्य प्रशांत: तो ऊर्जा का संबंध फिर किससे हुआ? शांति से। मैं उसको थोड़ा और साफ़ करके बोलूँ तो ऊर्जा का संबंध हुआ आत्मा से। जब कुछ भी आत्मिक होता है तो… read_more
प्रश्न: ‘भगवान’ क्या हैं?
वक्ता: इसका जवाब देना बहुत आसान हो जाता अगर तुमको वाकई पता ही ना होता, अगर पहले ये शब्द कभी सुन ही न रखा होता। अगर कोई बिल्कुल साफ़ स्लेट के साथ ये सवाल पूछे, ‘भगवान का क्या मतलब है?’ तो इसका जवाब देना… read_more