Rashtriya Sahara
19 Oct '23

शिव-शक्ति

Acharya Prashant

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शिव-शक्ति
शिव स्थिर, अचल और अगम्य सत्य हैं, जबकि शक्ति मन, संसार और जीवन की समस्त अभिव्यक्तियाँ हैं। शिव तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग शक्ति से होकर जाता है। नवरात्र के नौ रूप यही सिखाते हैं कि जीवन के हर अनुभव सुख, दुख, आंसू, मुस्कान सभी पूजनीय हैं। संसार से भागना सत्य से दूर होना है। जीवन में पूरी तरह डूब जाना ही मुक्ति का मार्ग है। यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।

नवरात्र का माहौल है। शक्ति के बारे में कुछ बातें करना प्रासंगिक रहेगा। शिव केंद्र हैं, शिव सत्य हैं। शिव वो हैं जिन तक मन, 'मन' रह कर नहीं पहुंच सकता। शिव को तो रहस्य रहना है सदा। शक्ति, मन है, संसार है। शिव में स्थिरता है, अचलता है।

शक्ति में गति है, चलनशीलता है। शक्ति जीवन है, शक्ति वो सब कुछ है जिससे आप एक मनुष्य हो कर के संबंध रख सकते हैं। शक्ति में संसार के सारे उतार-चढ़ाव हैं, आंसू हैं, और मुस्कुराहटें हैं। नवरात्र के इन नौ दिनों में, शक्ति के नौ रूपों की पूजा बताती है हमें कि संसार के, जीवन के समस्त रूप पूजनीय हैं।

कहा गया है कि सत्य अरूप है, अचिंत्य है, निर्गुण है, निराकार है। लेकिन जब आप शक्ति के नौ रूपों को पूजते हो तो आपसे ज्यादा सार्थक और उपयोगी बात कही जा रही है। सत्य होगा अरूप, पर हम रूपों में जीते हैं। सत्य होगा अचिंत्य, पर हम विचारों और भावों में जीते हैं। सत्य होगा निराकार, पर हम आकार, रंग और देह में जीते हैं। सत्य होगा असीम, पर हमारा तो सब कुछ सीमित है। अरूप तक जाने का एक मात्र मार्ग, रूप है। सत्य तक जाने का, एक मात्र मार्ग संसार है।

शिव के अन्वेषण का एक मात्र मार्ग, शक्ति है। जिन्होंने संसार से किनारा कर लिया, वो संसार के साथ-साथ सत्य से भी और दूर हो गए। वास्तविक रूप से धार्मिक व्यक्ति जीवन के साथ एक होता है। वो जीवन के सहज प्रवाह में निर्विरोध बह रहा होता है, और जीवन एक सीमित व्यक्ति, एक सीमित मन के साथ जितने भी अनुभव हो सकते हैं, वो सारे अनुभव दिखाएगा। इन्हीं में जीना और इन्हीं के विरोध से मुक्त रहना धार्मिकता है।

जो दायराबद्ध, वो कष्ट में और जो दायरों से मुक्त, वो ब्रह्म के आनंद में। यदि आपके जीवन का कोई पक्ष आतंकित कर जाता है तो सत्य आपके लिए नहीं है क्योंकि शिव की अभिव्यक्ति ही तो है शक्ति। शिव का वो रूप जो आपके सामने आ सके, जिसे मन जान सके, जिसे इंद्रियां पहचान सके उसको शक्ति कहते हैं। शक्ति के नौ रूप बताते हैं कि जीवन अपने समस्त रंगों में सम्माननीय है, पूजनीय है। महागौरी के साथ-साथ काली भी प्यारी हैं। जो पूरा समा गया, वो तर गया। डूब जाओ बिल्कुल, मिल जाएगा किनारा।

This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant
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