Shri Ram

इस दीवाली पर ‘राम निरंजन’ या सिर्फ़ ‘मनोरंजन’?
इस दीवाली पर ‘राम निरंजन’ या सिर्फ़ ‘मनोरंजन’?
11 min
साल भर जो निरंजन में जिया है, उसके लिए कल राम निरंजन; और साल भर जिसने मनोरंजन ही पाला है, उसके लिए फिर पर्व भी मनोरंजन। अंजन माने क्या होता है? कालिमा। तो राम निरंजन न्यारा रे, अंजन सकल पसारा रे। समझ रहे हो? अब आपको तय करना है कि सकल पसारा माने चहुदिश जो ये व्याप्त है, आपको इसका होना है या इससे न्यारा होना है। न्यारा माने अलग, अस्पर्शित।
श्रीराम: सगुण या निर्गुण
श्रीराम: सगुण या निर्गुण
26 min
हम अपने आराध्यों की कथा, चरित्र, मूर्ति, छवि अपने ही हिसाब से बना देते हैं। हम अपनी सहूलियत, मान्यता और स्वार्थ के अनुसार कालातीत को भी बदल डालते हैं। यह समस्या राम के निर्गुण–निराकार रूप के साथ बिल्कुल नहीं है क्योंकि जो निर्गुण और निराकार है, उसकी कोई मूर्ति ही नहीं, कोई छवि ही नहीं; तुम उसको कैसे ख़राब कर लोगे? इसलिए ज्ञानियों ने कहा कि उनको तो ब्रह्मस्वरूप ही मानना — “राम ब्रह्म परमारथ रूपा, अबिगत अलख अनादि अनूपा।” मात्र वही राम हैं जो कालातीत हैं।
Excellence Begins with Shri Ram
Excellence Begins with Shri Ram
9 min
Shri Ram is the source of all excellence—Kabir Sahab’s excellence, the excellence of an astronaut, the excellence of a deep-sea diver, the excellence of a professional, etc. If you don’t have excellence in what you do, it is because you have been disloyal to Ram. Without Ram, you can’t do anything nicely.
श्री राम को कैसे प्राप्त करें?
श्री राम को कैसे प्राप्त करें?
18 min
राम कोई खिलौना थोड़ी ही हैं, जो कहीं से "मिल जाएँगे"। राम की प्राप्ति जैसा कुछ नहीं होता, अहंकार को मिटाना होता है, और इसी को ‘रामत्व’ कहते हैं। अपनी रोज़मर्रा की हरकतों को देखिए—सुबह से शाम तक क्या किया, क्या सोचा, क्या अनुभव किया; तो पता चलेगा कि बड़ा अंधकार है। और वह स्वयं को जानने से ही मिटेगा। उसके बाद जो शेष बचेगा, उसी को 'राम' बोलते हैं।
सीता मैया नहीं कमाती थीं, तो हम क्यों कमाएं?
सीता मैया नहीं कमाती थीं, तो हम क्यों कमाएं?
12 min

आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) कह रहे हैं कि आप कहते हैं कि महिलाओं का कमाना उनकी आन्तरिक और भौतिक प्रगति के लिए ज़रूरी है, पर हमारी प्राचीन देवियाँ जैसे माँ सीता, देवी अनुसुइया, यहाँ तक कि साध्वियाँ जैसे मीराबाई भी कभी कमाती तो नहीं थीं, तो क्या वो सब

Shopping and bling—the way of Rama?  || Neem Candies
Shopping and bling—the way of Rama? || Neem Candies
1 min

Rama’s festival has become the festival of shopping, shoppers and shopkeepers—Rama, who never had anything to do with shops; Rama, who was never a buyer or a seller or a consumer; Shri Rama, who stands for that which can neither be bought nor be sold. This festival has turned into

Is there Dharma in your life? || Neem Candies
Is there Dharma in your life? || Neem Candies
1 min

What is it that Shri Rama stands for? He stands for detachment. He stands for fearlessness. He stands for compassion. He stands for Dharma.

Is there Dharma really in your life? And by Dharma I do not mean a creed or a cult, or observation of certain rituals, or the

Rama is the source of real strength || Neem Candies
Rama is the source of real strength || Neem Candies
1 min

When you stand in front of a client and make a presentation, what is it that makes you go weak in the knees? Expectation. Greed. And there is only one solution to greed: Rama.

You try to feel like a champion, but in front of your boss you have feet

Why live 364 days without Rama? || Neem Candies
Why live 364 days without Rama? || Neem Candies
1 min

I say, if you have lived up to Rama for 364 days, only then must you celebrate the festival of Rama-ness. How is it that for 364 days your life had nothing to do with Shri Rama, and on the 365th day you jump up and join the bandwagon, the

Let’s apologize to Rama || Neem Candies
Let’s apologize to Rama || Neem Candies
1 min

Diwali, for most people, must be a festival of austerity, of repentance. We must, on this day, offer our prayers to Shri Rama and say, “We are very sorry, O Holy One! We are extremely sorry. We couldn’t live by your life, your message, your teachings. We are very sorry.

Have you lived up to Rama? || Neem Candies
Have you lived up to Rama? || Neem Candies
1 min

I say, if for 364 days you have really lived up to Rama, only then must you honestly celebrate the festival of ‘Rama-ness’. How is it that for 364 days your life really had nothing to do with Shri Rama, and on the 365th day you jump up and join

Where is Rama in your celebration? || Neem Candies
Where is Rama in your celebration? || Neem Candies
1 min

Just think if Rama was there in his bodily shape, in his mortal life, and were to see you celebrating his festival. What would he say? He would call you, “Hey you! Yes, you! Come here. You just did something taking my name? All this tamasha (commotion) is in my

राम अब भाते नहीं || आचार्य प्रशांत (2021)
राम अब भाते नहीं || आचार्य प्रशांत (2021)
21 min

प्रश्नकर्ता: पिछले बीस-चालीस साल से ऐसा क्यों हो रहा है कि लोगों को राम पसंद आने बहुत कम हो गए हैं? तो आम जनमानस को ख़ासतौर पर जो नई पीढ़ी है उसे तो नहीं ही पसंद आते राम, इधर पिछले बीस-चालीस साल के कुछ प्रसिद्ध गुरुओं ने भी राम का

हममें और चुन्ना भाई में कोई अंतर? || आचार्य प्रशांत (2019)
हममें और चुन्ना भाई में कोई अंतर? || आचार्य प्रशांत (2019)
5 min

आचार्य प्रशांत: (मुस्कुराते हुए) चुन्ना भाई की कहानी सुनेंगे? ये बड़ा गूढ़ रहस्य था, जो कभी कोई जान नहीं पाया कि चुन्ना भाई आठवीं कक्षा तक पहुँचे कैसे? मैं आठवीं की बात बता रहा हूँ। ब्रह्मांड के सब रहस्यों पर से पर्दा उठ सकता है, चुन्ना भाई आठवीं तक आ

तनाव कम करने के तीन तरीके (तीसरा खतरनाक है) || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
तनाव कम करने के तीन तरीके (तीसरा खतरनाक है) || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
15 min

आचार्य प्रशांत: जो तनावग्रस्त है, उसकी ज़िन्दगी में तनाव, चिंता और मनोविकार लगातार है। बस वो कुछ मौकों पर प्रदर्शित हो जाता है। ये आपके लिए कोई खुशखबरी नहीं है कि आपका तनाव दिन में दो-चार घंटे ही प्रकट होता है। ऐसे समझ लीजिए, यदि आपका तनाव चौबीस घंटे बना

यारां दे यार || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
यारां दे यार || आचार्य प्रशांत के नीम लड्डू
7 min

आचार्य प्रशांत: ऐसों से बचना जो मिलते ही ये कहते हैं कि चल यार, वीकेंड (सप्ताहान्त) पर पीते हैं। ऐसों से बचना जो जब तुमसे मिलने आते हैं तो तुम्हारे लिए साथ में गलौटी कबाब लेकर आते हैं, बचना। ये तो आया ही है देह का सुख साथ लेकर के।

श्रीराम ने बड़ा अन्याय किया? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
श्रीराम ने बड़ा अन्याय किया? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
12 min

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर! मेरा क्वेश्चन (प्रश्न) है मेरे सामाजिक जीवन से। सर! हमारे समाज में जैसे मैं ट्राइबल कम्यूनिटी (आदिवासी समुदाय) से आता हूँ, तो उसमें एक धारणा, एक मिथ (कल्पित कथा) है जो यह प्रचलित है सर! ये कि जो हमारे धार्मिक ग्रन्थों में जो हिंसा है जैसे— भगवान

दो छिपकलियों का प्यार, पहला नशा पहला खुमार || आचार्य प्रशांत (2023)
दो छिपकलियों का प्यार, पहला नशा पहला खुमार || आचार्य प्रशांत (2023)
15 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। हम जब बोलते हैं कि सुख और दुख की उपेक्षा भी नहीं करनी है, और उनको सिर पर भी नहीं चढ़ा लेना है। तो क्या मेरा अंडरस्टैंडिंग (समझ) करेक्ट (सही) है, कि फॉर एग्जांपल (उदाहरण के लिए) जब भी मुझे कुछ दुख हो रहा है, तो

राम और कृष्ण न आपका सहारा चाहते हैं, न आपकी सफ़ाई || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
राम और कृष्ण न आपका सहारा चाहते हैं, न आपकी सफ़ाई || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)
21 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। कई भ्रांतियाँ मैंने देखी है कि फैली हुई हैं। जैसे कि उत्तरकांड को बहुत से लोग रामायण का हिस्सा नहीं मानते। कहते हैं, रामायण युद्धकांड पर समाप्त हो जाती है, वाल्मीकि जी ने उससे आगे उसको नहीं कहा था।

ऐसे ही कुछ सनातन धर्म पर आक्षेप

क्या सिर्फ़ राम को याद रखना पर्याप्त है? || आचार्य प्रशांत, श्रीरामचरितमानस पर (2019)
क्या सिर्फ़ राम को याद रखना पर्याप्त है? || आचार्य प्रशांत, श्रीरामचरितमानस पर (2019)
16 min

प्रश्नकर्ताः तुलसीदास जी ने कहा है : 'नहिं कलि करम न भगति बिबेकू, राम नाम अवलंबन एकू।' आपका भी वीडियो सुना जहाँ कहीं भी राम नाम का शीर्षक मिला कि राम नाम एक ऐसी चीज़ है जो निराकार और साकार दोनों के बीच का है। तो मैं बच्चों को ये

राम, कृष्ण, शिव - सबमें खोट दिखती है? || आचार्य प्रशांत
राम, कृष्ण, शिव - सबमें खोट दिखती है? || आचार्य प्रशांत
13 min

प्रश्नकर्ता: मेरा सवाल ये है कि बहुत सारी कहानियों में, जैसे राम और कृष्ण की कहानी हम पढ़ते हैं या कोई और भी। इन अवतारों को बचपन से ही बहुत ऐसे दिखाया जाता है कि इनमें बचपन से ही सारे गुण थे, या ये बचपन से ही अच्छे थे, निपुण

राम से राम तक की यात्रा है जीवन || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण एवं कबीर साहब पर (2019)
राम से राम तक की यात्रा है जीवन || आचार्य प्रशांत, श्रीकृष्ण एवं कबीर साहब पर (2019)
19 min

प्रश्नकर्ता: प्रिय आचार्य जी, प्रणाम! गीता का पाठ संभव कर देने के लिए धन्यवाद। अध्याय ७, १३ और १५ में श्रीकृष्ण प्रकृति, दो प्रकार के पुरुष, और पुरुषोत्तम के बारे में बताते हैं और कबीर साहब ने चार रामों की बात कही है-

चार राम हैं जगत में, तीन राम

इन्हें पसंद नहीं मेरे राम || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2020)
इन्हें पसंद नहीं मेरे राम || आचार्य प्रशांत, बातचीत (2020)
19 min

आचार्य प्रशांत: राम आज ज़्यादातर लोगों को क्यों पसंद आएँगे? देखो हर युग, उस युग के मूल्यों के हिसाब से अपने आदर्शों को, नायकों को चुनता है। चुनता भी है, गढ़ता भी है। तो जिस युग के जो मूल्य होते हैं, जो वैल्यूज़ होती हैं उसी के हिसाब से उस

सत्य के ध्यान की विधि? || आचार्य प्रशांत (2018)
सत्य के ध्यान की विधि? || आचार्य प्रशांत (2018)
35 min

आचार्य प्रशांत: मुकेश पूछ रहे हैं कि क्या ध्यान करते समय किसी पर केंद्रित होना है? गिरेन्द्र कह रहे हैं कि मन एक बार में एक ही काम क्यों करना चाहता है? कहते हैं कि जब ईश्वर को याद करता हूँ तो संसार को भूलता हूँ। जब संसार याद आता

(गीता-14) चिंताओं की नदियाँ, समुद्र को चंचल नहीं कर पातीं || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर(2022)
(गीता-14) चिंताओं की नदियाँ, समुद्र को चंचल नहीं कर पातीं || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर(2022)
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आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमाप: प्रविशन्ति यद्वत्। तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी।।

जिस प्रकार अनेक नदियों का जल समुद्र में निरन्तर प्रविष्ट होता रहता है, किन्तु समुद्र उससे विक्षुब्ध नहीं होता अर्थात् बढ़ नहीं जाता, इस प्रकार आत्मज्ञान में प्रतिष्ठित जिस योगी के मन में विषय की चिन्ताएँ प्रविष्ट होकर

काम तो राम ही आएँगे || नीम लड्डू
काम तो राम ही आएँगे || नीम लड्डू
2 min

सागर पार करके लंका पहुँचने हेतु पुल बन रहा था। उसमें यह सब वानर, भालू सब लगे हुए थे, हनुमान तो थे ही, इंजीनियर थे नल-नील, यह सब। और वहाँ एक फुदकी गिलहरी, वो भी लगी हुई है साथ में पूँछ उठाए। वह क्या कर रही है? वह बालू के

सीता का मार्ग, और हनुमान का मार्ग || आचार्य प्रशांत, श्रीरामचरितमानस पर (2017)
सीता का मार्ग, और हनुमान का मार्ग || आचार्य प्रशांत, श्रीरामचरितमानस पर (2017)
12 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब सीता और हनुमान दोनों ही राम तक पहुँचने के मार्ग हैं, तो इनमें मूलभूत रूप से क्या अंतर है?

आचार्य प्रशांत: एक है अपने को मिटा देना, और दूसरा है अपने को मिला देना।

मिटा देना ऐसा है कि जैसे कोई सपने से उठ गया हो,

इसमें तेरा घाटा, उनका कुछ नहीं जाता || आचार्य प्रशांत (2020)
इसमें तेरा घाटा, उनका कुछ नहीं जाता || आचार्य प्रशांत (2020)
11 min

प्रश्नकर्ता: गर्भवती पत्नी को वन में छोड़ने पर भी राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। जुऐ में द्रौपदी को हारकर भी युधिष्ठिर धर्मराज कहलाए। अरे! अगर ये धर्म है तो, फिर अधर्म क्या है?

आचार्य प्रशांत: ताली बजादूँ डायलॉग पर या जवाब दूँ? चलो जवाब दिए देता हूँ।

क्रिकेट विश्व कप के

श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहते हैं? || आचार्य प्रशांत (2016)
श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहते हैं? || आचार्य प्रशांत (2016)
8 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, श्रीराम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है, जबकि उन्होंने सीता जी की अग्नि परीक्षा ली थी, और जब वो गर्भवती थीं तो उन्हें घर से निकाल दिया था। मैं श्रीराम के इस व्यवहार को ग़लत मानती हूँ। कृपया मेरी इस शंका को दूर कीजिए।

आचार्य प्रशांत: मर्यादा

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The one who is religion-less. A real Hindu does not have any religion. To go beyond all religions is to be a Hindu. There are religions that are on one plane, and then there is Sanatan Dharma, which is another dimension — the eternal religiousness. Liberation from religion is religiousness. Sanatan Dharma is awakened intelligence.
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अहंकार साधना भी करेगा तो इसलिए नहीं करेगा कि वो विसर्जित हो जाए, विगलित हो जाए, मिट जाए। वो साधना भी करेगा, श्रम भी करेगा तो इसीलिए करेगा कि वो बचा रहे बल्कि अमर हो जाए।
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ज़्यादातर लोग बाहर जी-तोड़ मेहनत करते हैं। लेकिन उनकी भीतरी दुनिया खाली, खोखली, कुछ नहीं, क्योंकि वो सारी मेहनत भीतर के केन्द्र को बदलने के लिए नहीं की गई होती है। वो जो आप बाहर खूब सारी मेहनत करके खूब सारे पैसे कमा रहे हैं, वो सिर्फ़ इसलिए कमा रहे हैं, क्योंकि आप अपनी आन्तरिक असुरक्षा को बचाए रखना चाहते हैं। आप भीतरी तौर पर एक डरे हुए आदमी हैं, इसीलिए बाहरी तौर पर आप बहुत मेहनत करते हैं। तो करते रहो बाहर कितनी भी मेहनत, आन्तरिक प्रगति कुछ नहीं होगी।
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एक आदर्श रहता है मन में कि ज़िंदगी ऐसी-ऐसी होनी चाहिए। और वो आदर्श लेकर आप पैदा नहीं हुए थे, वो आदर्श इधर-से-उधर-से आपके मन में आ गया। अब आपको ज़िंदगी नहीं चाहिए, अपने आदर्श जैसी ज़िंदगी चाहिए। उसमें ये भी शामिल है कि दोस्त ऐसे हों, पति ऐसा हो, जीवन ऐसा हो। और हमारे सारे आदर्श सामाजिक होते हैं। हमारा प्यार भी प्यार नहीं है, वो समाज का फ़रमान है, संस्कारों का आदेश है। इसके कारण जीवन जैसा सामने खड़ा होता है, वो हमें कभी-कभी दिखाई ही नहीं देता। हमारी ज़िंदगी बस एक तुलना बनकर रह जाती है।
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लड़का–लड़की का मिलन तो बहुत साधारण–सी बात होनी चाहिए; कुछ उसमें इतना विशेष नहीं कि उसका हव्वा बनाया जाए। आदमी है, औरत है, तो उनमें सेक्सुअलिटी भी होगी, वो ठीक है। लेकिन तुम उसको सेंटर बना देते हो कि यही सबसे बड़ी चीज़ है। हमारी परंपरा ने बीच में पर्दे डाल–डाल कर दोनों को इतना दूर कर दिया कि दोनों ने एक–दूसरे के बारे में फ़ैंटेसीज़ बना ली हैं। इंसान को इंसान की तरह देखो। ये सब जो तुमने कहानियाँ पाल ली हैं, ये तुम्हारा नासूर हैं। ये कहानियाँ हटा दो, देखो, जीवन कितना आसान हो जाता है।
क्या हिन्दू धर्म पिछड़ा हुआ है?
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समसामयिक हिन्दू धर्म पुराणों, स्मृति ग्रंथ और स्थानीय क़िस्म की परंपराओं पर चल रहा है। वो हिन्दू धर्म है ही नहीं। हिन्दू धर्म से अगर हमारा आशय है वेदों के दर्शन पर आधारित धर्म, तो हिन्दू धर्म न अगड़ा है, न पिछड़ा है; हिन्दू धर्म एकमात्र धर्म है। धर्म तो एक ही है, ये जो दुख में बैठा हुआ है, इसका दुख दूर करना। बाक़ी सब कुछ किसी धर्म, पंथ, मज़हब में हो रहा हो, वो सब अंधविश्वास है। हिन्दू धर्म कहता है, “वो है कौन जो दुःखी है? प्रश्न करो, और प्रश्न का जवाब परंपरा नहीं, प्रयोग देगा।”
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गीता की ब्रांडिंग एक लोकधार्मिक बुक के रूप में हो गई है। तो ये जो जेन-ज़ी है, जब लोकधर्म को ठुकराती है, तो लोकधर्म के साथ-साथ गीता को भी ठुकरा देती है। थ्रोइंग द बेबी अवे विद द बाथ-वॉटर। तो उनके लिए गीता, पुराण सब एक है। और जो चलती है, रावण संहिता उनके लिए वो सब एक है।
Are You Truly Religious?
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If you are religious, then shouldn’t you be truly religious? Religion is about a total commitment to the Truth. You’ll have to recognize that the objective of religion is not to attain heaven, not to please a holy figure, but to come to your own inner Truth. All good books exist to awaken your consciousness. When it comes to you and the Truth, do you want somebody in between? And wherever you spot fakeness, falseness, hollowness or ignorance, drop it.
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There is a search within the human being, always for the greatest, the absolute, and that is what differentiates humans from animals. India was fertile, and there was abundance. You had ample leisure, and in that leisure there was space for intellectual inquiry. The sages and the seers would talk to each other purposelessly. And from that purposeless discussion, from silent observation of life for hours, days, months, and years, came those insights that you today recognize as Indian philosophy.
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पर तुमने अगर मेरे साथ थोड़ा सुना है, पढ़ा है, अध्यात्म, उपनिषद्, गीता थोड़ा तुम्हारे भीतर उतरी है, तो मनुष्य क्या है? मनुष्य की पहचान क्या है? त्रिगुणात्मक प्रकृति क्या है? और किस तरीक़े से वो हमें संचालित करती है, ये सब समझ में आया होगा। तो फिर समझ पाओगे कि मैं तुम्हें क्या कह रहा हूँ। कुछ विशेष नहीं है बेटा यहाँ पर। क्या विशेष हो जाना है, बताओ न क्या विशेष हो जाना है?
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This has always been a hugely profit-making sector of all economies, just that it has always been a small sector controlled by the priestly class. Now the attempt is to make this sector really big and on an organized scale, because the profits are very tempting, and there is no quality control. There can be no external auditor. All kinds of objections, audits, and scrutinies are ruled out. Getting it? So it’s a very tempting sector.
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जीवन सही जियो, तो रिश्ते भी फिर सही बनाओगी। सही लोगों को ही अपनी ज़िंदगी में प्रवेश दोगी। गलत ज़िंदगी जीने के कई दुष्परिणाम होते हैं। उनमें से एक ये होता है कि तुम्हें सब गलत ही लोग मिलेंगे। अभी दिक़्क़त ये होती है कि खेल तो होता है सारा जिस्मानी, लेकिन तुमने अपने आप को ये समझा रखा होता है कि बात भावनाओं की है। तो फिर जब रिश्ता टूटता है जिस्मानी, तो तुमको ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी भावनाओं पर चोट हुई है। अरे, बात भावनाओं की कभी थी ही नहीं। क्यों व्यर्थ में भावनाओं को इसमें बीच में ला रहे हो।
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