पुरुषों की कामवासना से डर || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा सवाल इस संदर्भ में है कि बचपन से मैं बच्चों के प्रति जो हिंसा होती थी उसे पढ़ती थी न्यूजपेपर्स-मैगजींस (समाचार पत्र एवं पत्रिका) में। और मेरे भी ग्रोइंग ईयर्स (बढ़ती उम्र) में कुछ ऐसे अनुभव रहें। उसके बाद जब और ग्रोथ (प्रौढ़ता) हुई तो एक अविश्वास-सा डेवेलप (विकसित) हुआ। अभी तक मैं थर्टी सेवन (सैंतीस) की हो गई हूँ, पर अभी तक एक डर है मेरे अंदर कि कोई भी आदमी मेरे से बात करता है—अच्छे से या कैसे भी—या कोई बुज़ुर्ग भी सिर पर हाथ रखे, तो ऐसा लगता है कि कोई सेक्सुअल मोटिव (यौन मकसद) तो नहीं है पीछे। या इसका एक दूसरा—ख़ुद को लगता है कि क्या मेरे अंदर वासना है जो इस चीज़ को समझ नहीं पा रही है, ये डर है कि वासना है? तो उस पर थोड़ा प्रकाश डालिए।
आचार्य प्रशांत: आप सिर्फ़ सेक्सुअल मोटिव से हो क्यों घबरा रही हैं, और भी चीज़ें हैं घबराने के लिए न? मैं कहीं जा रहा हूँ, अपने लिए कोई क़ीमती चीज़ लाने या कोई महत्वपूर्ण काम करने, मान लीजिए। ठीक है? कोई मुझे मिलता है रास्ते में जो बोलता है कि ‘आओ शतरंज खेलें’; कोई मुझे मिलता है रास्ते में जो बोलता है कि ‘आओ राजनीति पर चर्चा करें’; और कोई मुझे मिलता है रास्ते में जो बोलता है कि ‘आओ सेक्स करें’; मैं इन तीनों को क्या अलग-अलग जवाब दूँगा? ये तीनों तो मेरे लिए एक बराबर हैं न?
ये तीनों ही मेरे लिए सही काम के अलावा कुछ और हैं, मुझे तीनों को ही नहीं देखना। मैं सेक्स वाले बंधु को ही विशेषकर दोषी क्यों बताऊँ? जो मुझे शतरंज खेलने को बुला रहा है, वो भी मेरे समय की बरबादी करेगा, मुझे सही काम से भटकाएगा। लेकिन ये मैं सिर्फ़ तब कह पाऊँगा जब मेरे पास पहले कोई सही काम हो। जब सही काम होगा तो मैं व्यर्थ की कामवासना से तो बचूँगा ही, सौ अन्य झंझटों से भी बच जाऊँगा।
फिर मैं वासना भर को विशेषतया दोषी नहीं ठहराऊँगा। क्योंकि ऐसा तो नहीं है न कि ज़िंदगी में एक ही समस्या है कि वासना है। न ऐसा है कि दुनियाभर में जितने लोग हैं, उनमें कुल मिलाकर एक ही ख़राबी है कि कामुक हैं। जो हममें मूल ख़राबी है वो सौ तरीक़े से अभिव्यक्त होती है। वासना की विक्षिप्तता भी उन सौ तरीक़ो में से एक है। जो हमारी मूल ख़राबी है हमारे भीतर, वो बहुत तरीक़ो से प्रकट होती है। कामांधता उनमें से सिर्फ़ एक तरीक़ा है। और भी तो इतने तरीक़े हैं: आलस, चोरी—गिन सकती हैं आप, न जाने कितने तरीक़े हैं—नशा।



