Clarity

Man and Woman Rise Together
Man and Woman Rise Together
2 min
There is nothing called woman’s liberation in isolation. Woman is oppressed and the man too is oppressed, albeit in a different way. Woman’s liberation is man’s liberation. Together they suffer, and together they will celebrate. Their attempts to have freedom only for themselves are their bondage. She is love, he is awareness. There is no love without awareness. Let both know, let both be with each other. In that alone lies liberation for both.
बदलाव चाहता हूँ, लेकिन बिना कुछ छोड़े!
बदलाव चाहता हूँ, लेकिन बिना कुछ छोड़े!
5 min
ये ऐसी सी बात है, कि “मैं क्या करूँ? मैं दस कदम आगे चलता हूँ। पीछे से वो कॉल करके पकड़ लेती है।” वो तुम्हें कॉल करके पकड़ रही है या पहले तुमने मोबाइल फोन पकड़ रखा है? वो तुम्हें पकड़ ले, इसका इंतजाम पहले से करके कौन बैठा है? तुम अगर चाहते ही होते कि वो तुम्हें न पकड़े, तो फोन पीछे नहीं छोड़ के आए होते।
How To Get Clarity?
How To Get Clarity?
19 min
Clarity is not a state. Clarity is like clean air, air free of pollutants. It is not something you arrive at. It is not a finality. There is a lot that you believe in, and you must keep testing it and rejecting it. You can never say, “I have achieved clarity.” It is a lifelong process, because pollutants keep entering the air continuously. So you have to keep clearing the air continuously. That is the process.
भावनाएँ परेशान करें तो?
भावनाएँ परेशान करें तो?
14 min
जब ये सब उठे, तो कहो, “तू उठ, तेरा काम है उठना पर तू मैं नहीं है।” और प्रमाण इसका ये है कि मैं तुझे देख सकता हूँ, मैं तेरी हर गतिविधि पर नज़र रख सकता हूँ। यही प्रमाणित करता है कि तुझमें और मुझमें भेद है। तू दृश्य है, मैं दृष्टा हूँ। हम दोनों एक नहीं हैं। मैं साक्षी हूँ तेरा, तू अपना काम कर, मैं बैठा-बैठा देखूँगा। मैं बैठा-बैठा देखूँगा तो मेरे पाँव मेरे पाँव हैं, और मेरा हाथ मेरा हाथ है, और मेरी ऊर्जा मेरी ऊर्जा है; वो तुझे नहीं मिलेगी। मैं तुझसे कोई रिश्ता बनाऊँगा ही नहीं।
जो गलत है, वो छूटता क्यों नहीं?
जो गलत है, वो छूटता क्यों नहीं?
18 min

प्रश्नकर्ता: जो इतने वर्षों में सीखा, घर में रहकर, दोस्तों के साथ, शिक्षा में, उसका बल इतना है कि लगता है कि वो गलत है; ये मैं अपना एक प्रोजेक्शन (प्रक्षेपण) कर रहा हूँ; गलत लगता तो छोड़ ही देता, लेकिन बल इतना है कि उसको गिराने के लिए अक्षम

Why don't people like me?
Why don't people like me?
12 min
Truth is not about lofty words and scholarly theories. Truth is, first of all, a deep desire to help. If they see that you want to help, they will listen. Then they will listen even if they are not able to make perfect sense of your words. To your words, people listen later. The first thing that they listen to is your empathy. They want to see whether your face and your eyes carry their pains. If your eyes contain not a bit of the pain that they live in, they will not be able to listen to you.
अध्यात्म: अपने ही विरुद्ध संघर्ष
अध्यात्म: अपने ही विरुद्ध संघर्ष
11 min
हम आमतौर पर बस ऐसे ही छवि बना लेते हैं कि संघर्ष या दबाव सिर्फ़ व्यवसाय में या सांसारिक मसलों में ही है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। दबाव और संघर्ष अध्यात्म में भी उतने ही करने पड़ते हैं, जितने कि संसार में, बस उसकी श्रेणी, उसकी गुणवत्ता अलग है। बाहर तुम दबाव झेलते हो कुछ और अतिरिक्त हासिल कर लेने के लिए, और अध्यात्म में, जिसको तुमने नाहक पा लिया है, वह दबाव बनाता है कि मुझे मत छोड़ो। भीतर वाली लड़ाई जीत लो, बाहर की सब लड़ाइयाँ तुम पाओगे कि तुम्हारे लिए बहुत आसान हो गई हैं।
What's The Right Action?
What's The Right Action?
9 min
When I say, “I want the right action,” surely I have an image in mind. That image is coming from the past. But the right action, by definition, is one that cannot come from the past. Please remember that whenever something really right happens in life, it does not happen as a result of one’s decision. The really good, the right action, happens on its own, provided you do not become the decision-maker and the actor.
दूसरों के सम्मान से पहले अपना सम्मान
दूसरों के सम्मान से पहले अपना सम्मान
4 min
तुम कहीं गए, तुमने किसी की चरण स्पर्श कर लिए। यह कोई सम्मान है? यह आदर है। सम्मान दूसरी बात है। सम्मान का अर्थ होता है, ध्यान से समझना। जो अपने मन की समझ नहीं रख सकता, वह किसी और को कैसे समझ जाएगा? पर दावा हमारा यह है कि हम दूसरे का सम्मान करते हैं। दूसरे का सम्मान तो तब हो जब आत्म-सम्मान हो। आत्म-सम्मान मतलब खुद को समझना। पहले अपना सम्मान कर लो। अपना सम्मान मतलब, आत्म-ज्ञान! आत्म-ज्ञान ही आत्म-सम्मान है।
Are We Really Special?
Are We Really Special?
16 min
We have a great interest in claiming that there is something special about us. But there is nothing special. We too are just machines made of material, just a system. And this system, in the course of evolution, has now given birth to another system, which you call artificial intelligence. But calling it artificial is just vanity. We too are equally artificial. This “I” feeling that we carry is just a product of our physical constitution.
Before Choosing a Partner, Understand This One Truth
Before Choosing a Partner, Understand This One Truth
7 min
There is no issue at all in being with one person or even five persons. That’s fine. The problem is the desperate center the need arises from. And when that center, that desperate, that unexamined center, is at the root of the relationship, the relationship will never be auspicious. Never. Let your relationships come in a natural way. You are all right with yourself. It just so happens you come across somebody worth being with, and then there is a natural companionship
दार्शनिक बनना है?
दार्शनिक बनना है?
9 min
दार्शनिक बना नहीं जाता। ये कोई कैरियर थोड़ी होता है। ये तो ज़िंदगी बना देती है। पहले ज़िंदगी ऐसे जियो कि उसकी परतें उघड़ें कुछ, उसका नंगापन सामने आए। और उसके लिए ज़िंदगी के बहुत क़रीब आना पड़ता है। ज़िंदगी के क़रीब जाना माने झूठ अब टूटेगा। और झूठ साँस है, झूठ रीढ़ है, झूठ प्राण बन गया है हमारा। सब टूटेगा। ज़िंदगी को देखो। ज़िंदगी से लात खाओ फिर तुमसे जो कुछ भी अभिव्यक्त होगा, वह दर्शन होगा।
Are We Really Selfless?
Are We Really Selfless?
17 min
Oh, we are so selfless towards our kids, come on, and then we expect compliance and returns and obedience, basically ROI. It becomes very difficult to explain to the other that, no, you cannot act selflessly, not because of you, but because you are Homo sapiens. Our species is not designed to act selflessly. Therefore, trying to practice Nishkam Karma (selfless action) without knowing what the “Self” is, is actually self-deception, not selflessness.
तुम्हें मेरी बात से नहीं, तुम्हारे झूठ के टूटने से दर्द है
तुम्हें मेरी बात से नहीं, तुम्हारे झूठ के टूटने से दर्द है
29 min
दो तरह का शोषण चलता आया है धर्म के नाम पर, एक, महिलाओं का; और एक, तथाकथित निचली जातियों और वर्णों का। और लोकधर्म की लगभग बुनियाद है ये शोषण। अब लोकधर्म अगर जात-पात, छुआ-छूत और स्त्री-शोषण, इनके बिना चल ही नहीं सकता; तो जहाँ कहीं भी स्त्रियों को उठाने की बात आएगी और जाति को हटाने की बात आएगी, लोकधर्म उससे बहुत ख़ौफ़ खाएगा। ख़ौफ़ खाएगा और उस बात को कह देगा? ये लेफ्टिस्ट बात है।
किसी को समझाने की ज़िद?
किसी को समझाने की ज़िद?
9 min
आप कोई नहीं हैं, हर इंसान अपनी ही सहमति से सुधरेगा या गिरेगा। अब मेरा भी बीस वर्षों का अनुभव हुआ जा रहा है लोगों को समझाने का। बहुत-बहुत जान लगाई है लोगों पर, और धीरे-धीरे करके ये समझ में आया है कि एक अपराध होता है किसी ऐसे को समझाना, जो समझने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। भूल नहीं होती, अपराध होता है। और उनसे ये फिर सुनने को मिलता है, 'हमें हमारे हिसाब से जीने क्यों नहीं दे रहे हो?' एक सीमा के बाद, वो गलती मत करिए जो मैंने करी है बहुत; एक सीमा के बाद प्रयास मत करिए।
किसी को समझाने की ज़िद?-duplicte
किसी को समझाने की ज़िद?-duplicte
9 min
आप कोई नहीं हैं, हर इंसान अपनी ही सहमति से सुधरेगा या गिरेगा। अब मेरा भी बीस वर्षों का अनुभव हुआ जा रहा है लोगों को समझाने का। बहुत-बहुत जान लगाई है लोगों पर, और धीरे-धीरे करके ये समझ में आया है कि एक अपराध होता है किसी ऐसे को समझाना, जो समझने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। भूल नहीं होती, अपराध होता है। और उनसे ये फिर सुनने को मिलता है, 'हमें हमारे हिसाब से जीने क्यों नहीं दे रहे हो?' एक सीमा के बाद, वो गलती मत करिए जो मैंने करी है बहुत; एक सीमा के बाद प्रयास मत करिए।
गाँधी बनाम अम्बेडकर: सुधार बनाम विद्रोह
गाँधी बनाम अम्बेडकर: सुधार बनाम विद्रोह
35 min
धर्म होता है ख़ुद को समझने के लिए, ताकि आपकी चेतना उड़ान ले सके। समझ में आ रही है बात? और यही दो कोटियों के लोग होते हैं दुनिया में; एक, वो जो अपने पुराने ढर्रों पर चल रहे हैं इन्हें आप बोल सकते हैं अधार्मिक लोग। वह पुराने ढर्रे दो तरीक़ों के हो सकते हैं — ये बात बहुत रोचक लगेगी बहुत लोगों को। जो पुराने शारीरिक ढर्रे पर चल रहा है, वो तो अधार्मिक है ही। लेकिन जो पुराने सामाजिक ढर्रे पर भी चल रहा है, वो भी अधार्मिक है। धर्म किसी ढर्रे का नाम नहीं होता, धर्म जानने का नाम होता है।
विज्ञापन का खेल
विज्ञापन का खेल
12 min
आपको क्या लगता है, यह जो अलग-अलग तरह के स्पोर्ट्स हैं, यह क्यों इतने प्रचलित हो गए? क्योंकि स्पोर्ट्स होगा तभी तो ऐड होगा। वह विज्ञापन बेचने का ज़रिया है और विज्ञापनदाता ऐसे नए-नए ज़रिए खोजते रहेंगे। चाहे वह विज्ञापन हो, चाहे बाबा जी की PR हो, चाहे आपको धार्मिक आधार पर भड़काने वाला कोई WhatsApp फ़ॉरवर्ड हो, वह सब बहुत केयरफुली क्राफ्टेड होते हैं। बहुत सतर्क रहा करिए, बहुत सतर्क; सब कुछ सिर्फ़ इसलिए है ताकि कोई आपसे अपना स्वार्थ सिद्ध कर सके।
बँटी हुई ज़िंदगी
बँटी हुई ज़िंदगी
14 min
जो एक का नहीं होता, उसे सौ का होना पड़ता है। अपने आप को सौ जगह टुकड़ा-टुकड़ा करके उसको बाँटना भी पड़ता है। असली आदमी होता है, वो काम ऐसा चुनता है कि 24 घंटे कम पड़ जाएँ, और साथी भी ऐसा चुनता है कि 24 घंटे कम पड़ जाएँ। तो जब दोनों को ही 24 घंटे कम पड़ रहे हैं, तो वो 48 से ज़्यादा घंटे कहाँ से लाएगा? क्या करेगा फिर वो? वो काम को ही साथी बना लेता है, या साथी को ही काम बना लेता है, या साथी ऐसा बनाता है जो काम में भी साथ हो।
यात्राएँ करिए
यात्राएँ करिए
13 min
हिमालय से ऋषि चलते थे और सीधे दक्षिण भारत तक पहुँच जाते थे। या वो कहते थे कि मैं हिमालय का हूँ, वही रहूँगा? कबीर साहब जीवन भर चलते रहे। नानक साहब अरब तक पहुँच गए, चीन से यात्री चलते थे और ज़्यादातर ज्ञान की खोज में होते थे, वह तिब्बत पार करके हिमालय लाँघ करके भारत आ जाते थे। आपको यात्रा करने से किसने रोका है? यात्रा ही बहुत कुछ सिखा देती है। विदेश न जाओ, भारत तो घूम लो। पृथ्वी पूरी तुम्हारी है, जहाँ जा सकते हो, जाओ।
गंदगी फैला दी है, उसको समेटना है, यही काम है
गंदगी फैला दी है, उसको समेटना है, यही काम है
7 min
काम करना माने ये नहीं होता कि कोई महल बनाना है, कोई साम्राज्य खड़ा करना है, ये करना है, वो करना है। वास्तविक काम हमेशा नकारात्मक होगा। तो इसलिए उसको ढूँढना बहुत आसान है। आसपास अपने देखो, कहाँ कुछ ऐसा है जो नहीं होना चाहिए। सूँघो, कहाँ-कहाँ गंदगी फैली हुई है। हाथ में झाड़ू उठाओ, साफ़ कर दो; यही है काम। काम करके कुछ हासिल नहीं करना है। काम करके जो हासिल कर लिया है, उसको हटाना है।
How to Work Without Becoming a Slave to the System?
How to Work Without Becoming a Slave to the System?
4 min
If I’m working in a machine that helps accumulate money for one person or a group of persons, and then that money is used for the ugliest kind of consumption, for example, one that worsens the climate spectre, then there is a problem. The question is: where is the heart placed? If the heart of the system is at the right place, then at the micro level you can do your best in it. Minor flaws will remain even in the best system that you construct on your own.
गोल्ड वगैरह छोड़ो, बताओ अफेयर किससे चल रहा है || आचार्य प्रशांत (2024)
गोल्ड वगैरह छोड़ो, बताओ अफेयर किससे चल रहा है || आचार्य प्रशांत (2024)
26 min

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। अभी हमारी जो टीम है, वो ओलंपिक से वापस आई है, जो खिलाड़ी हैं। और उनको लेकर कुछ नेशनल न्यूज़, मीडिया में और सोशल मीडिया में कुछ बातें चल रही हैं। उनके कुछ हेडलाइंस (शीर्षक) मैं आपको पढ़कर के सुनाना चाहता हूँ — ‘मनु के

क्या रावण सच में ज्ञानी था?
क्या रावण सच में ज्ञानी था?
5 min
उल्टी-पुल्टी मान्यताएँ पकड़े बैठे हो, अपने आप को कुछ मान रहे हो, ‘मैं लंकेश हूँ।’ ज्ञान होता तो अपने आप को कोई लंकेश थोड़ी बोलेगा, स्त्री का अपहरण थोड़ी करेगा। ज्ञान होता रावण को, तो वह अपने आप को और कुछ क्यों मान रहा होता? रावण ने तो ज्ञान को सिर्फ़ सूचना की तरह रखा है। अगर ज्ञानी होता, तो फिर श्रीराम के ख़िलाफ़ युद्ध में थोड़ी खड़ा हो जाता वो।
सही काम में गाली मिले तो मुझे याद करो!
सही काम में गाली मिले तो मुझे याद करो!
16 min
बहुत-बहुत पुरानी गंदगी है, समय लगेगा। बहुत पुरानी गंदगी है, सोचो कितना पुराना हमारा देश है। कम से कम पिछले हज़ार सालों में तो बहुत गड़बड़ करी गई है। वो सब साफ़ करने में समय लगेगा, ये जो गाली गलौज कर रहे हैं, ये बेचारे तो शिकार हैं गंदगी के। इन्हें पता भी नहीं है कि इनके मुँह से कौन बोल रहा है, इनके मुँह से अतीत की सड़न बोल रही है। अभी इनमें इतनी आत्म-जागरूकता नहीं है कि ये जान पाएँ कि ये तो अभी हैं ही नहीं।
अचानक कोई दुविधा आ जाए तो क्या करें ?
अचानक कोई दुविधा आ जाए तो क्या करें ?
12 min
होश में आओ और फिर होश को जाने मत दो, पानी जैसे हो जाओ। किसी पथरीले पहाड़ पर पानी की एक धार छोड़ो, देखो, वो कैसे अपना रास्ता तय करती है। पहाड़ है पथरीला, ऊबड़-खाबड़ चट्टानों से भरा हुआ, कहीं गड्ढा, कहीं कुछ और तुमने धार छोड़ी है। धार कहीं रुककर के विचार नहीं करती कि कौन सा मार्ग मेरे लिए ठीक है, कौन सा नहीं। उसे पता है किधर को जाना है। वो समर्पित है उस जगह पहुँच जाने को, जिसके बाद गति की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी। नीचे कोई तालाब होगा, एक बार धार वहाँ तक पहुँच गयी, क्या उसके बाद भी बहती है?
Seek Light or Don’t Seek?
Seek Light or Don’t Seek?
4 min
On one hand, there is a great danger that if you seek Light, you will seek the wrong kind of light; you will just seek darkness disguised as light. On the other hand, there is the equally dark option of not seeking at all. Between these two possibilities, I prefer the possibility of seeking Light, with all its associated dangers — that is still better than not seeking at all. Isn’t it better to die fighting in the battle than not fight at all?
क्या पता आचार्य प्रशांत भी ढोंगी हों?
क्या पता आचार्य प्रशांत भी ढोंगी हों?
25 min
मैं होऊँगा वैसा, बात बताओ सही है या नहीं है? बोलो, बात सही है कि नहीं है? अगर सही है, तो बात ले लो। मैं तुमसे थोड़ी कह रहा हूँ, मुझे उठा के अपने घर बैठा लो। मुझे आना भी नहीं है तुम्हारे घर, बुलाओगे तो भी नहीं आऊँगा। मैंने एक बात कही है, बस उस बात का ही रिश्ता है हमारा और तुम्हारा। वो बात अगर तुम्हें ठीक लगती है, तो समझ लो। और इधर-उधर की फालतू तो मत बताओ, ये बाबा ऐसा है, कि बाबा वैसा है।
भावनाओं से कर्मयोग तक
भावनाओं से कर्मयोग तक
19 min
जो रोना-चिल्लाना हो रहा है, देख लो कि सब देह के कारण हैं। शरीर के हॉरमोन करवा रहे हैं। जान लो कि तुम उनके कर्ता नहीं हो — यह कर्मसंन्यास हो गया। दूसरा तरीका यह है कि यह सब किसी ऊँचे उद्देश्य को समर्पित कर दो; हँसेंगे तो उस ध्येय के लिए, रोएँगे तो उस ध्येय के लिए — यह कर्मयोग है। श्रीकृष्ण कहते हैं — इन दोनों में कर्मयोग श्रेष्ठ है। तुम्हारी चित्त की तमाम वृत्तियों के साथ रिश्ता बड़ा गहरा है। तुम्हारे लिए उनसे संबंध तोड़ना मुश्किल हो जाएगा, इसीलिए कर्मयोग ज़्यादा आसान तरीका है।
क्या आप युवाओं का माइंड वॉश (Mind-Wash) कर रहे हैं?
क्या आप युवाओं का माइंड वॉश (Mind-Wash) कर रहे हैं?
7 min
तुम्हें लग रहा है बहुत क़ाबिल नौजवान घूम रहे हैं हिंदुस्तान में और इनको ब्रेन वॉश कर- कर के आचार्य जी बुला रहे हैं और फिर इनसे अपने लिए काम कराएँगे। अरे, ये निहायती घटिया नस्ल है। नस्ल भी घटिया, फ़सल भी घटिया। इनको यहाँ बुलाता हूँ तो इन पर बड़ी मेहनत करनी पड़ती है किसी लायक बने, और आधे तो उतनी मेहनत झेल भी नहीं पाते। वे बाहर निकल जाते हैं और फिर बाहर जाकर वीडियो बनाते हैं, “हमसे काम कराया, हम मर गए हैं। अरे, हमसे हुआ नहीं।”
अपनों के जीवन में गीता कैसे लाएँ?
अपनों के जीवन में गीता कैसे लाएँ?
13 min
मैं पहली बात बोल रहा हूँ पूरा प्रयास करो, और अपने माही टटोल, झाँक करके देखो कि कहीं स्वार्थवश तो नहीं किसी से कह रहे कि आओ गीता में, आओ गीता में। पहले अपना साफ़ करो मामला। स्वार्थ को लेकर के किसी को गीता में भी लाओगे तो ये पराजय ही है। ठीक है?
जवान आदमी को मजबूरी शोभा नहीं देती
जवान आदमी को मजबूरी शोभा नहीं देती
9 min
ज़िंदगी में जब ऊँचाई के लिए आकर्षण आ जाता है, लगाव-झुकाव आ जाता है, जिसको हम इश्क़ बोल रहे हैं, वास्तविक प्रेम बोल रहे हैं, तो फिर मेहनत अपने आप हो जाती है। तो मेहनत बहुत ज़रूरी है, पर अंधी मेहनत हमें सिर्फ़ गधा बनाती है। अंधी मेहनत से बचो, पर मेहनत से मत बचो। मेहनत तो करनी पड़ेगी। पर मेहनत ऐसे ही मत करने लग जाना कि कहीं भी लग गए, मेहनत किए जा रहे हैं, किए जा रहे हैं, किए जा रहे हैं। नहीं-नहीं, ये मत करने लग जाना।
अध्यात्म में भाषा का क्या महत्त्व है?
अध्यात्म में भाषा का क्या महत्त्व है?
7 min
भाषा बड़ी अनोखी चीज़ है। जो शब्द तुम बोलते हो, वो तुम बोलते ही भर नहीं हो, सुनते भी हो। जो पाठ, जाप, मंत्र, शब्द, भजन-कीर्तन इत्यादि करते हो, उससे बाहर की कोई सत्ता नहीं, जो तुमसे संतुष्ट या प्रसन्न हो जानी है। जो भी कुछ कह रहे हो, स्वयं को सुना रहे हो। जिसकी भाषा बदलने लग जाती है, उसका मन बदलने लग जाता है।
जलता नेपाल: क्यों विफल हो जाती हैं क्रांतियाँ?
जलता नेपाल: क्यों विफल हो जाती हैं क्रांतियाँ?
20 min
यह नेपाल की नहीं, हर देश की कहानी है। दुनिया भर में अनगिनत क्रांतियाँ होती रहती हैं और उनसे कुछ बदलाव भी आते हैं, पर उतने से आपका पेट नहीं भरेगा। बाहरी बदलाव सदा आकर्षक लगता है, लेकिन उसके परिणाम या तो शून्य होंगे या आंशिक। क्रांति सदा भीतर से शुरू होनी चाहिए। एक जगा हुआ आदमी सबसे बड़ी क्रांति होता है। जब भीतरी आज़ादी नहीं होती तो बाहर भी आज़ादी का दुरुपयोग ही होता है। ज़बरदस्त क्रांतियाँ हों, लेकिन ठोस आधार पर और ऊँचे लक्ष्यों के लिए हों।
Pay the Price Before It Is Too Late
Pay the Price Before It Is Too Late
12 min
You think of the right, free, and spiritual life as planned, tasteless, and boring. No, it involves great love, great rejections, great revenges. Everything happens in a much more intense way than in your normal householder’s life. You say, “I’m leading a worldly life because I want to have fun or because I’m in love.” But one day you’ll realize where real love lies, and you’ll knock at the doors and won’t be permitted.
How to always remain in Love? || Acharya Prashant (2018)
How to always remain in Love? || Acharya Prashant (2018)
35 min

Acharya Prashant (AP): Jayant has initiated, and he is saying that he used to lead a mechanical life that starts the story, and then he got into spirituality, now he wants to be in love always but that does not always seem possible. Right?

Love is neither molecular nor even

Spirituality and Logic
Spirituality and Logic
6 min
There is a lot of pseudoscience and superstition being floated in the name of spirituality by people who you are influenced by. And therefore, the common man gets the message that spirituality means some mumbo-jumbo. Spirituality is not this godman business. In fact, a really spiritual man can never contradict science. If you are really logical, you will turn spiritual. You have no option. Spirituality is the natural destiny of logic.
शिक्षा का असली उद्देश्य
शिक्षा का असली उद्देश्य
8 min
हमें दो तरह की शिक्षाएँ चाहिए — एक शिक्षा हमें इसलिए चाहिए ताकि कपड़े पहन सकें और रोटी खा सकें, और दूसरी शिक्षा चाहिए जो हमें इंसान बनाए। रोटी और कपड़े नहीं मिल रहे हों, तो बाकी बातें नहीं हो पाती हैं। लेकिन हम इसलिए नहीं पैदा हुए हैं कि बस काम चलता रहे। इंसान होना एक बहुत बड़ी संभावना है। तो फिर एक शिक्षा इसलिए ली जाती है ताकि वह आपको सशक्त कर सके; जीवन को उद्देश्य और ऊँचाई दे सके।
We Moved Out of the Jungle — Really?
We Moved Out of the Jungle — Really?
9 min
You didn't emerge from the jungle so that you could collect external riches. You were doing all right even in the jungle. There was no need to leave the jungle and do something that was extraordinary and go out of your way to do something that no other species had done. There was no need. You were doing all right. But you emerged from the jungle so that you can have inner development.
AI: The Revolution You Cannot Miss
AI: The Revolution You Cannot Miss
9 min
The kind of knowledge that AI puts in the hands of the common man today is unprecedented. And it must be put to the best possible use. Think of all the evils that we suffer from. Don't they come from our false beliefs? AI is the litmus test. If you believe in something, go test it with AI. You may not get the veritable Truth itself, but the chances are that you will get something much better than what you currently believe in. AI is a huge opportunity and those who are missing out are doing themselves a great disservice.
इतने विरोध के बावजूद आपकी प्रेरणा कम क्यों नहीं होती?
इतने विरोध के बावजूद आपकी प्रेरणा कम क्यों नहीं होती?
19 min
आप अपने सामने अगर एक ऐसे मनुष्य को देखें जो पशुवत हो चुका है, तो ये मत सोचिएगा कि सिर्फ़ एक इंसान का खेल ख़राब हुआ है। ये समझिएगा कि आपको भी उसके जैसा बनाने की पूरी तैयारी चल रही है। एक दिन ये आग तुम्हारे घर में भी लगेगी। तो कोई तो चाहिए ना — जो सामने आए, इलाज करे, मुक़ाबला करे। कोई सामने नहीं आएगा, कोई मुक़ाबला नहीं करेगा तो सब वैसे ही हो जाएँगे।
किसी पर आश्रित नहीं रहेंगे, आज़ाद जिएँगे
किसी पर आश्रित नहीं रहेंगे, आज़ाद जिएँगे
44 min
जो आत्मस्थ नहीं है जब वो प्रकृति का संसर्ग करेगा तो क्या होगा? उखड़ जाएगा। वो उखड़ जाएगा जैसे कोई नन्हा पौधा। नन्हे पौधे को बचा के रखते हो ना तमाम तरीक़े की ताक़तों से, आवेग से। तो जो लोग आत्मा में स्थापित नहीं होते, पर जगत के अनुभवों का रस लेने निकल पड़ते हैं, जगत उनको उखाड़ मारता है।
गीता पढ़ने के बाद भी जीवन में कोई स्पष्ट बदलाव नहीं आया?
गीता पढ़ने के बाद भी जीवन में कोई स्पष्ट बदलाव नहीं आया?
11 min
मुक्ति एक सतत प्रक्रिया है, जो आखिरी साँस तक चलती है। कभी ऐसा नहीं होगा कि अब जो मेरे पास है, वही सर्वश्रेष्ठ है और अंतिम है। जो होगा, उससे लगातार आगे बढ़ते रहना होगा। 11 महीने नहीं, 11 साल नहीं, आप अगर 110 साल जी गए तो 110 साल।
आजकल अच्छे दार्शनिक और विचारक क्यों नहीं दिखते हैं?
आजकल अच्छे दार्शनिक और विचारक क्यों नहीं दिखते हैं?
10 min
हो तुम मौत की गोद में, मौत माने यही नहीं कि जो आप मर के गिर जाते हो ज़मीन पर, मौत माने उम्मीदों का टूटना। जो आप आशाएँ लेकर के बैठे थे उनका मरना, यही सब मौत है। तमाम तरीक़े की हार, तमाम तरह की घुटन और टूटन यही सब मौत है। तो दिन-रात तुम मौत की गोद में हो, मौत तुम्हें चबा रही है, “जगत चबैना काल का।” और तुम में से कुछ-कुछ लोग हो जो काल के मुँह में हो, कुछ पॉपकॉर्न की तरह गोद में पड़े हुए हो। जब पॉपकॉर्न खाते हो ना, कुछ मुँह में जाता है कुछ गोद में गिर जाता है, तो ये तुम्हारी हालत है।
Use Your Intellect to the Fullest
Use Your Intellect to the Fullest
5 min
In ancient India, in the great universities — Taxila, Nalanda — logic and mathematics were taught before religion was taught. If you do not know logic, how will you understand Ashtavakra? Only a very sharp intellect can rise above itself. You look at the prophets, saints, and see how adept they were, even in worldly matters. Do not put the intellect aside when it comes to the regular, mundane affairs of the world. Use your intellect to the fullest.
मजबूरी नहीं, चुनाव होता है
मजबूरी नहीं, चुनाव होता है
6 min
दर्शन में 'विवशता' जैसा कोई शब्द नहीं होता, 'चुनाव' होता है। आप अगर मजबूर हो, तो यह भी आपका चुनाव है कि आप अपने आप को मजबूर रखना चाहते हो। जिस दिन भीतर से आग उठे कि ऐसी ज़िंदगी नहीं जीनी, सारी मजबूरियाँ जल जाएँगी। कई बार वाक़ई ऐसा लगता है कि हम कमज़ोर हैं तो तब क्या करना है? जो चीज़ आप जान जाएँ कि सही है, उसमें जूझ जाइए। जूझने से ताक़त केवल आती ही नहीं, बल्कि प्रकट हो जाती है।
क्या संवेदनशीलता भी किसी प्रकार की वृत्ति है?
क्या संवेदनशीलता भी किसी प्रकार की वृत्ति है?
5 min
अगर तुम्हारा हृदय अभी भी काँपता है, अगर तुम रोते हो, परेशान होते हो, तो एक तरीके से ये शुभ लक्षण हैं। इससे यही पता चलता है कि अभी भीतर कोई है, जो तुमको पुकार-पुकार कर कह रहा है, "बदलो, बदलो, ये ठीक नहीं है", इसी कारण कष्ट हैं तुम्हें। कष्ट का अर्थ ही है कि भीतर चेतना का स्रोत बैठा ही हुआ है।
उधार का ज्ञान, ज़िन्दगी बेजान
उधार का ज्ञान, ज़िन्दगी बेजान
19 min
जो नकली वाला ज्ञान होता है ना, जिसको समाज-ज्ञान बोलते हैं, उसको लोक-ज्ञान बोल दो। समाज जिसको ज्ञान मानता है, वो ज्ञान नहीं होता। ऐसे ज्ञान को तो सूत्र कहते हैं कि, "ये ज्ञान तो बंधन है तुम्हारा।" सबसे पहले तो ये फालतू का ज्ञान छोड़ो और समझदारी से जीना शुरू करो।
Are the Hills Liberating?
Are the Hills Liberating?
26 min
Had it been greatly liberating to spend a week in the hills, then those who are spending their entire lifetime in the hills should have been automatically liberated. But instead of liberation, you see a lot of superstition. So, mindless adventure trips or picturesque trails will not help. Do we want to go to the hills to really change our lives or to shed our tension and continue the same old routine? We need to have questions. And when we approach the hills or the seas with those questions, with honest inquiry, then it makes sense.
10 Best Books To Read For Beginners By Acharya Prashant
10 Best Books To Read For Beginners By Acharya Prashant
9 min
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