वो वास्तव में खुशी के आँसू नहीं होते। वो होते दुःख के ही हैं। पर वो जाते हुए दुःख के आँसू होते हैं। वो दुःख से मुक्ति के आँसू होते हैं।
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Originally published in Dainik Jagran on 26 December '23
तुम्हारे जीवन में दुःख आएगा, तुम रो पढ़ोगे। तुम्हारे जीवन से दुःख जाएगा, तो भी तुम रो पढ़ोगे। सामान्य भाषा में इस दूसरे रोने को हम कह देते हैं? खुशी के आँसू । वो वास्तव में खुशी के आँसू नहीं होते। वो होते दुःख के ही हैं। पर वो जाते हुए दुःख के आँसू होते हैं। वो दुःख से मुक्ति के आँसू होते हैं।
गाड़ी आती है तो भी दिखती है, और गाड़ी वापस लौटती है तो भी दिखती है। रोना इसीलिए, जानने वालों ने बड़े स्वास्थ्य की बात कही है। वो कहते हैं कि रोना भली बात है, खूब रोया करो, रोने से आँखें शांत होती हैं , और मन भी। अच्छी बात है रोना। छोटी छोटी बात पर रो लिया करो। और रोने का पीड़ा से कोई संबंध हो ये जरूरी नहीं।
कोई कहानी सुनी आँखें छलछला गयी, ठीक है, फिल्म देख रहे हो, फिल्म देखते देखते चार बूंदे लुढ़क गयीं, कोई बुराई थोड़े ही है। ये कमजोरी का लक्षण नहीं है। और न ही ये किसी मानसिक बीमारी का लक्षण है। यूँ ही बैठे बैठे भी अगर आँखें गीली हो जाएँ तो इसमें कोई हानि नहीं है, ये स्वास्थ्य की बात है। हँसी से ज्यादा गहराई होती है, आँसुओं में।




