
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी! पहले मैं सोशल मीडिया पर ज़्यादा सक्रिय नहीं था। लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय आने के बाद, मैं थोड़ा ज़्यादा सक्रिय हो गया हूँ। तो मैं देखता हूँ, सोशल मीडिया पर आजकल बहुत सारे बाबा लोग हैं, जो अपना आधिकारिक ऐप बना लिये हैं। और ऐड के माध्यम…






Questioner: Sir, I am pursuing MSc in physics. After watching your videos and reading the Bhagavat Gita, I understand that whatever in this world we achieve to please ourselves does not really give us peace. I also find that doing science might be just pleasing myself or my ego. It


The fellow who watches child porn, is he really very different from a rapist? He is probably a bit cleverer but not really different. He adopts a relatively safer route. He says “I will please myself by watching the heinous act on the screen. I will be careful not to



Unless the youth indulges in consumption, how will the markets sell? And the youth can absorb a lot, eat a lot, travel a lot, so it’s great to trap them.

Remember, it is not situations that defeat you. Situations are just situations. A situation by definition is something outside of you, whereas defeat is something inside of you.
Situations can at worst be adverse, correct? And a situation is always external. The sense of defeat is an internal thing; that…

जीवन परिवर्तन के लिए जिसको मैं कहता हूँ ठंडी उर्जा, शाश्वत उत्साह चाहिए। एक भीतर ऐसी हार्दिक प्रेरणा चाहिए जो दसों साल थमे नहीं, कमे नहीं, मिटे नहीं। गर्म जोश में वो बात होती ही नहीं है। गर्म जोश के खिलाफ़ तो सावधान रहा करिए, वो फ़िल्मी होता है।

श्रोता: आचार्य जी, हम अपने शरीर और मन को किस तरह से नियंत्रित कर सकते हैं? ग़लत चीज़ों की तरफ एकदम से खिंचे चले जाते हैं, और सही चीज़ से भागते हैं।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं आपकी सभी बातें पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं कर पाता, मैं क्या करूँ?
आचार्य प्रशांत: तुम फँस इसीलिए जाते हो क्योंकि तुम्हें तकलीफ़ सिर्फ़ तब होती है जब ऊँचे काम खराब होते हैं, कि, "ऊँचा काम हो रहा था और मैं किसी निचले केंद्र में ही…

आचार्य प्रशांत: कुछ भी संयोगवश नहीं है। पाँच उँगलियाँ भी हैं तुम्हारी, तो पाँच ही होनी थी, छह नहीं हो सकती। पूरी जो शरीर की विकास प्रक्रिया रही है, जिसमें अस्तित्व के एक एक अणु का योगदान है, उसने ये तय किया है कि पाँच उँगलियाँ हों, और इतना कद




प्रश्न: सर, हर व्यक्ति में कोई मूल गुण होता है। उसे कैसे पहचानें?
वक्ता: शशांक ने कहा कि हर व्यक्ति में कोई मूल गुण होता है, उसे कैसे पहचानें? मूल जो होता है तुम्हारा, ‘केन्द्र’, ‘स्त्रोत’ इसका कोई गुण नहीं होता, वो निर्गुण है। उसका कोई गुण नहीं होता। वो…

वक्ता: सवाल है कि अपनी काबिलियत पता है, ये भी पता है कि क्या कर के दिखा सकती हूँ, उसके बाद भी अगर सफलता नहीं मिलती तो क्या करूँ? तुम्हें काबिलियत पता है या फिर तुमने बस मान लिया है कि काबिलियत है? जिसको तुमने मान लिया है कि काबिलियत…

प्रश्न: सर सफलता कैसे पाएँ?
वक्ता: तुम मुझे बताओ कि सफलता क्या है?
श्रोता: परिश्रम करने से सफलता मिलती है।

We leave a talk moved, and by evening it has faded, so we ask how to stay aware every moment. Yet one glance at a report that says cancer is never forgotten; even in our dreams we remember it, and no one has to remind us. We remember what we truly want to save. The mirror is held up once, and a teacher can do no more than that. Sunlight pours through every window, and we can still crawl under a rock. What are we choosing, each time we forget?
प्रश्नकर्ता: कला क्या है? सिर्फ़ म्यूज़िक (संगीत), पोएट्री (कविता) या पेंटिंग (चित्रकारी) ही कला है? और, यू नो, इतनी प्रैक्टिकल (व्यावहारिक), प्रैग्मैटिक (व्यवहारमूलक) दुनिया के लिए, प्रैक्टिकली (व्यवहार में) कला का क्या कुछ यूज़ (उपयोग) है? डज़ इट लीड टू समथिंग (क्या कला से कुछ मिलता है)?
आचार्य प्रशांत:…
Creativity is, first of all, to realize that we are uncreative people. We are puppets with strings in the past or in the hands of others. You know noodles, your mother knows noodles, even your grandmother may know noodles. So noodles are very well known. But all the other things will require a question mark; otherwise, you cannot know. So creativity begins with that question mark. Creativity begins with stepping outside your known zone.
फटी हुई जींस पहनने, और बाल रंगवाने से कोई कूल नहीं हो जाता। कूलनेस बहुत अच्छी चीज़ है, परंतु कूल हो नहीं, और ख़ुद को कूल कहो — यह समस्या है। कूल होना आध्यात्मिक बात है। कूल होने का असली मतलब है कि तुम श्रीकृष्ण का ज्ञान जानो। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा — तू विगत-ज्वर हो जा। जिसे ज्वर न चढ़े, जो आवेश और आवेग से मुक्त हो, वही वास्तव में कूल है।
आदमी बेहतर तब बनता है जब उसे अपनी कमियों का एहसास होता है, और यह एहसास दुख, असफलता, और निराशा से आता है। आज मेहनत और ज्ञान से ज़्यादा कीमत पैसे और स्टाइल की है, जिससे वर्तमान पीढ़ी को अपनी असफलता और अज्ञानता का दुख भी नहीं होता। जब तक उनका ऊँचाइयों से परिचय नहीं होगा, वे नीचे ही रहेंगे। इसलिए आज सही संगति की और गुण-ज्ञान अर्जित करने की बहुत आवश्यकता है, क्योंकि असली सुंदरता और मौज उसी में है।
Questioner: Good evening everyone, my name is Saurabh Sardana and you are watching the first episode of season 2, ‘Recast.’ I’m so glad to have you with me today, Acharya Prashant Ji. I’m pretty sure, that most of you that most of you sort of follow him on one of…
आचार्य प्रशांत: सवाल है, ‘ये टैलेंट, प्रतिभा नाम की चीज़ क्या होती है? और कैसे पता करूँ कि मुझेमें क्या प्रतिभा है?’
निशांत, जिसको तुम प्रतिभा बोलते हो, यह तो आदमी की बनाई हुई धारणा है न, तुम अगर भारत में हो और तुमको एक लकड़ी से एक गेंद को…
You need not manage hurt; you need to keep playing on. Two things: one, there must be fun in the game; secondly, there must be a subtle pride at stake. Believe me, there is no player worth his name who has not played in pain, not played through pain. Believe…
Not all problems are worth facing. Most problems you must totally avoid, even if that means that you will be called a coward by others.
Not all battles are worth fighting. In…
Youth is not really a period where you are to make merry. Youth is the period when you are rushing…
आचार्य प्रशांत: हर उत्कृष्टता एक इशारा है, एक संकेत है। आसमान की ओर संकेत है और प्रकृति के विरुद्ध विद्रोह है। जब सबको एक जैसा होना चाहिए था तो कोई ख़ास हो कैसे गया? जो ख़ास हो गया, उसको तुम मानो कि वही अगर भगवान नहीं तो भगवत्ता का प्रतिनिधि…
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा नाम शुभम है। मैं एक-डेढ़ साल से सुन रहा हूँ आपको। मैं कॉर्पोरेट नौकरी में हूँ, इंजीनियरिंग जॉब भी है तो मेरा सवाल ये था कि किसी भी काम में जाते हैं शुरुआत में तो वो नया होता है, उसके बाद वो दिनचर्या बन जाता…
“मैं…
आचार्य प्रशांत: चालाकी दिखाने वाले को क्या मिलता है? क्या मिलते देखा है?
प्रश्नकर्ता: जो नहीं दिखाते, उन्हें कुछ नहीं मिलता है।
आचार्य प्रशांत: जो चालाकी नहीं दिखाते, वैसे लोग तो शायद तुम्हारे संपर्क में आए ही नहीं।…
आचार्य प्रशांत: तुम बताओ, तुमने डाले हैं।
प्रश्नकर्ता: बहुत कम लोग होते हैं जो अपने निर्णय ख़ुद लेते हैं, तक़रीबन १०-५ प्रतिशत।
आचार्य प्रशांत: देखो तुम हथियार नहीं डालते हो, तुम व्यापार करते हो।
तुम…
जैसे, हमने कोई दिनचर्या बनाई पढ़ाई के लिए, उसका पालन ही नहीं कर पाते कभी। ध्यान कहीं…
प्रश्न: आचार्य जी, एक लड़की होने के कारण हमारे ऊपर बहुत सारी बंदिशें लगाई जाती हैं, जब भी अगर कुछ गलत होता है तो उसका इल्ज़ाम हम पर ही लगता है, क्या करूँ?
आचार्य प्रशांत: क्या नाम है?
श्रोता:- शिवांगी।
आचार्य प्रशांत: शिवांगी बैठो। शिवांगी ने…
भारत में गोरी चमड़ी पर बड़ा ज़ोर है । ग़ुलामी बिलकुल छायी हुई है…
आचार्य प्रशांत: जितने भी आपको तर्क दिए जाते हैं…
वक्ता: विवेक क्या है? विवेक, विवेक का शाब्दिक अर्थ तो भेद करना ही है; अंतर करना। लेकिन किस-किस में अंतर करना? एक अंतर ये होता है कि एक ही आयाम, एक ही डायमेंशन की दो अलग-अलग इकाईयों में तुम अंतर करो, कि X एक्सिस है और उसमें तुम अंतर कर…
वक्ता: एक ही बात है । देखो, मस्ती भी बटी हुई नहीं रहती है । मस्ती, भी तभी मस्ती है, जब वो लगातार है। अगर तुम्हारी मस्ती निर्भर है परिस्थितियों पर, तो ये बड़ी डरी-डरी मस्ती है। जो कांपती रहेगी कि…
वक्ता: तुम कहना चाहते हो कि परिश्रम करने से सफलता मिलती है। यह पंखा देखो। यह कितना परिश्रम कर रहा है, परिश्रम करते-करते गरम हो गया है।
श्रोता: यह पंखा…

The Bhagavad Gita is often accused of supporting caste and misogyny through selective quotations that ignore context, grammar, and the text's central teachings. A closer reading shows that its emphasis is on inner qualities, conscious action, and spiritual equality rather than birth-based hierarchy or gender discrimination. Misinterpretations arise when isolated verses are detached from their broader meaning, while the Gita consistently points toward self-knowledge, freedom from ego, and the universal possibility of liberation for every human being.

We have all put down a book that could have helped us, or dozed off halfway through something that mattered. A man who could not keep food down was given medicine, and he threw that away too, since it went in by the same route. Most of us strike a similar deal: we move into a place that stinks and, within a week, call the smell normal. Show our fifteen-year-old self the life we lead now and they would scoff. What would change if we admitted we do not like our condition?
![क्या आप आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी [इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग] के भाग हैं?](https://cimg.acharyaprashant.org/images/img-3dc72262-a991-4f45-a9d4-a0397e21022c/30/image.jpg)
आचार्य प्रशांत की गीता कम्यूनिटी इस सदी का एक अद्भुत आध्यात्मिक प्रयोग है।
आचार्य प्रशांत के यूं तो सोशल मीडिया इत्यादि पर तीन करोड़ से अधिक फॉलोवर और तीस करोड़ से अधिक श्रोता हैं, परंतु गीता कम्यूनिटी कुछ अलग ही बात है। इसमें मात्र वे गंभीर साधक सम्मिलित हैं जो…

आज महर्षि वाल्मीकि जयंती का सुअवसर है। इससे बेहतर शायद ही कोई मौका मिले भारत के आदिकवि को जानने के लिए। इसलिए आज हम उनके विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातें आपके साथ साझा करना चाहते हैं:
महर्षि वाल्मीकि का योगदान
~ भारत व सनातन धर्म में महर्षि वाल्मीकि का योगदान…

'The observer is the observed; an honest observation dissolves them both.' Or, 'The observer is the observed, and both are false.' We lay a lot of emphasis on the world, assuming it to be the Truth. If the world is an entity independent of everything, then it has to be the Truth, right? Truth is that which is independent of everything.

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न युग के बारे में है। जैसे हम पढ़ते हैं, चार युग होते हैं– सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। और जो एक युग होता है उसको लगभग लाखों वर्षों का मानते हैं। जबकि एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) के अनुसार जो स्टार्स (तारों) की पोजीशन (स्थिति) है,…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी! डू वी नीड टू क्रिएट गॉड्स ऑर वी हैव ऑलरेडी (क्या हमें भगवान बनाने होंगे या वो पहले से हमारे पास हैं)? जैसे हम कुछ अच्छी क्वालिटीज़ हम जो पढ़ते हैं शास्त्रों में, कई बार हमारे पास नहीं होती है, या वो हमारे पास है, हम अनदेखा…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, स्वधर्म क्या है? क्या स्वधर्म का पालन करते हुए आजीविका चलायी जा सकती है?
आचार्य प्रशांत: स्वधर्म का कोई सम्बन्ध आपके रोटी-पानी के जुगाड़ से नहीं है, कि ये ऑक्युपेशन (व्यवसाय) कि वो ऑक्युपेशन। आप जिसको वर्क (काम) बोलते हैं, वो और क्या होता है? आजीविका का…

आचार्य प्रशांत: ध्यान की एक विधि। उत्सुकता आयी थी कि ध्यान की एक विधि दी जाए। तो आपमें से जो लोग उसके बारे में जानना चाहें, वो समझें।
शून्य-स्मरण। शून्य-स्मरण – जो कुछ भी बहुत आवश्यक और ज़रूरी लगता हो, जो कुछ भी नितांत क़रीबी, आवश्यक प्रतीत होता हो, उसको…

Love, for the one who is at a low level of consciousness, is to aspire for a higher level. And love, for one sitting on the Himalayan peaks of consciousness, is to be compassionate towards those at lower levels — and, for their sake, if needed, lay down your life.

आचार्य प्रशांत: अगर हमारे बीच वास्तव में कोई रिश्ता है तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगा कि आप वैसे ही कोई ज़िन्दगी जी रहे हो जैसे कोई आम आदमी जीता है। मुझे अपनेआप पर और अपनी बात पर घिन आएगी। आप अगर कहते हो आप दो साल से मेरे साथ…

प्रश्नकर्ता: सबको प्रणाम। आज की इस धर्म चर्चा में आपका स्वागत है। आज हमारे बीच में एक ऐसी विभूति या कहें शख्सियत आचार्य प्रशांत जी हैं। आपके बारे में मैं थोड़ा सा बताना चाहूँगा। आप बहुत ही ज्ञानी और पढ़े-लिखे एक आचार्य हैं। इन्होंने आइआइटी से इंजीनियरिंग की, आइआइएम से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुझे कर्म में कोई विश्वास नहीं है, भक्ति में कोई श्रद्धा नहीं है। मुझे धर्म की कोई समझ नहीं है, तो परमात्मा की कृपा मुझ पर होगी या नहीं? परमात्मा से मेरा कभी साक्षात्कार होगा?
आचार्य प्रशांत: तो अभी जैसे भी हो तुम, उससे अगर संतुष्ट ही…

आचार्य प्रशांत: सही लक्ष्य क्या होता है? सही लक्ष्य वो होता है जो आपके भीतर की कमज़ोरियों को तोड़े। आपके भीतर जो कुछ ऐसा है कि ख़त्म होना चाहिए, लक्ष्य बनाओ जो उसे ख़त्म ही कर दे। मेरे ख़याल से कार्ल जंग का है — या आप लोग जाँच लीजिएगा…

आचार्य प्रशांत: सिर्फ़ एक व्यक्ति है जिसका सच तुम्हें पता हो सकता है, किसका?
श्रोतागण: अपना।
आचार्य: तो उसकी ओर क्यों नहीं देखते?
जिस एक आदमी का तुम्हें सच पूरा पता हो सकता है उसकी ओर क्यों नहीं देख रहे? क्यों इधर-उधर निहारते हो ? क्यों मन को भटकने देते…

प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते। आपसे मैं सर्वप्रथम शास्त्र-कौमुदी नामक कोर्स (पाठ्यक्रम) के जरिए जुड़ा था, तब से मुझे वेदांत और ग्रंथों का मूल्य पता चला। मैंने प्रस्थानत्रयी का पाठ शुरू किया है, तीन महीने हो गए हैं। मुश्किल हो रही है समझने में, पर आनंद आता है। कोरोना के कारण घर…

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पांडव। न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन।।
~ श्रीमद्भगवद्गीता, छठा अध्याय, दूसरा श्लोक।
जिसको संन्यास कहते हैं उसको तू योग जान क्योंकि संकल्पों का त्याग न करने वाला कोई भी व्यक्ति योगी नहीं होता।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। मैं संकल्पों के त्याग का तात्पर्य समझना चाहता…

भाषा हमें बहुत सारे देती है नाम। और ये जो सारे नाम हैं, ये हमें भरोसा दिला देते हैं कि अपूर्ण अहंकार, पूर्ण हो सकता है। ‘इस नाम से बात नहीं बनी तो उस नाम से बात बनेगी; तो उस नाम से बात बनेगी, तो उस नाम से बात बनेगी।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, भारतीय दर्शन में वेदों के आधार पर आस्तिक और नास्तिक का विभाजन किया गया। उसमें बौद्ध, जैन और चार्वाक दर्शन को नास्तिक बोल दिया गया; जिसमें से मुख्यत: बौद्ध और जैन धर्म ने वेदों की सत्ता को माना नहीं, इस वजह से उसमें वर्गीकरण किया गया।
तो…