वर्तमान का अर्थ केवल इस क्षण में जीना नहीं है। जो दिखता है वह इंद्रियों पर निर्भर है, इसलिए वह सच्चा वर्तमान नहीं। वर्तमान वह है जो बदलाव के बीच भी अपरिवर्तित रहे। भूत और भविष्य समय की धारा हैं, और उस धारा का साक्षी होना ही वर्तमान है। वर्तमान में जीने का अर्थ है बोध, जागरूकता और होश में जीना।
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वर्तमान का अर्थ है, वो जो है, प्रेजेंस, मौजूदगी, वर्तमान। वर्तना माने होना। वर्तना जिससे वर्तमान आया है, वर्तना माने होना। जो सचमुच है उसको कहा जाता है वर्तमान (प्रेजेंट)। जो सचमुच है उसका अर्थ यह नहीं है कि यह सब जो दिख रहा है। क्योंकि यह सब जो दिख रहा है, यह तुम तक तो इन्हीं आंखों और कानों से आ रहा है, और थोड़ी देर में आंखें बंद कर लो तो दिखना बंद हो जाएगा।
तो फिर यह वर्तमान कैसे हुआ? फिर तो तुम अगर सपने में हो, तो सपने में जो दिख रहा है वो भी वर्तमान होना चाहिए क्योंकि जो भी दिख तो रहा ही है न। तो वर्तमान यह सब नहीं है कि यह वर्तमान है, इसमें डूबो, न यह नहीं है। वर्तमान वो जो बदलाव के बीच भी बदलता नहीं। इसलिए वर्तमान क्षण (प्रेजेंट मोमेंट) जैसा कुछ नहीं होता क्योंकि हर क्षण बदल जाता है।
वर्तमान तो होता है पर वर्तमान क्षण (प्रेजेंट मोमेंट) नहीं होता। समय है जो बह रहा है। और समय को देखने वाला कौन है? तुम हो। कहा यह जा रहा है कि यह सब जो हो रहा है, तुम जरा उससे अप्रभावित होकर भी रहो, बाहर रहो। देखो कि नदी में डूबते-उतरते तो तुम हमेशा रहते हो, जरा नदी से अनछुए रह कर भी देखो कि समय की धार बह रही है और हम उसके द्रष्टामात्र हैं-यह हुआ वर्तमान (प्रेजेंट)।
तो असल में जो पूरी धार है वो अतीत और भविष्य ही है, नाव तो सिर्फ एक बिंदु है छोटा-सा, बीचोंबीच का। जैसे किसी भी धुरी समन्वय (कोआर्डिनेट एक्सिस) में स्रोत (ओरिजन) सिर्फ एक बिंदु होता है, बाकी तो सकारात्मक धुरी (प्लस एक्सिस) और नकारात्मक धुरी (माइनस एक्सिस) होता है। तो तुमने सकारात्मक धुरी को बोल दिया भूत और नकारात्मक धुरी को बोल दिया भविष्य।




