आचार्य प्रशांत: मैं कुछ बातें सामने रख रहा हूँ, मुझे नहीं मालूम मैं उनको पूरी तरह समझा सकता हूँ या नहीं। पर अगर आप में ज़रा भी अंतर्दृष्टि होगी तो आप संबंध बैठा पाएँगे। दुनिया की आबादी का बहुत बड़ा तबका है, जो अब यह कहने में गौरव महसूस करता है कि पदार्थ है और सिर्फ़ पदार्थ है और पदार्थ के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। वह अपनेआप को आधिकारिक तौर से, ऑफिशियली घोषित करते हैं एथीस्ट (नास्तिक) या एग्नोस्टिक (संशयवादी)।
मुझे नहीं मालूम कि उनमें से कितने लोग समझते भी हैं कि वह क्या कर रहे हैं। मुझे नहीं मालूम उनमें से कितने लोगों को नास्तिकता का वास्तविक अर्थ भी पता है। पर इतना उन्होंने बिलकुल विश्वास के साथ घोषित कर दिया है कि सिर्फ़ और सिर्फ़ मटीरियल है। अगर सिर्फ़ और सिर्फ़ मटीरियल है तो किसी भी चीज़ को सम्मान क्या देना, मटीरियल तो मटीरियल है, मॉलिक्यूल (अणु) है; चाहे कोई मटीरियल हो।
अब कोई भी चीज़ श्रद्धा और सम्मान की हकदार कहॉं रही? फिर तो अपना शरीर भी क्या है? मटीरियल, और सामने वाली स्त्री का शरीर भी क्या है? मटीरियल। अब कौन–सा सम्मान, कौन सी श्रद्धा! द सेक्रेड हेज गॉन टॉटली आउट ऑफ इक्वेशन, नथिंग इज सेक्रेड। कोई भी चीज़ अब ऐसी नहीं बची है कि उसको हम कह दे कि यह पवित्र है, इसको छू मत देना। जब कुछ पवित्र नहीं है, तो फिर हम हर चीज़ को गंदा करे जा रहे हैं। कुछ भी पवित्र नहीं है। हम कहते हैं, कुछ भी नहीं है, जिस पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। कुछ भी नहीं है, जिस पर जाकर के मल नहीं त्यागा जा सकता अपना। तो वही चल रहा है।
भोग की ओर प्रेरित करने वाली ताकतें दिन–ब–दिन और–और–और मजबूत होती जा रही हैं। और भोग से रोने वाली ताकतें, भोग को रोकने वाली ताकतें बिलकुल कमज़ोर होती जा रही हैं। अब तो समय इंस्टेंन्ट ग्रेटीफिकेशन (तत्काल संतुष्टि) का है न। ‘ओ यस अभी! लुक फॉर योर हैप्पीनेस इन दिस मोमेंट (इसी क्षण में ही खुशी पाओ)।’ तो बलात्कारी अब क्यों न कहे कि ‘बाद में सज़ा हो, चाहे मौत हो, आई लिव इन दिस मोमेंट एंड ऑन माय हैप्पीनेस ऑन डेट इज़ गॉल ऑफ़ माय लाइफ (मैं इसी पल में जीता हूँ और मेरी खुशी ही मेरे जीवन का उच्चतम लक्ष्य है)? जीवन है ही इसलिए कि अपने सुख की ओर बढ़ो और वह सुख तुम्हें कब पाना है? इसी पल में। तो इसी पल में सुख पा लो, आगे जो होगा देखा जाएगा। आगे की परवाह करना तो मूर्खों का काम है। हम क्यों सोचें कि आगे सज़ा होगी।’ यह लो, यह है बलात्कारी का गणित।




