
मेडिटेशन "करा" नहीं, "जीया" जाता है। "करने" वाला मेडिटेशन तो झुनझुना है, कि गए और तीस मिनट मेडिटेशन करके आ गए। जो तुम्हारी ज़िंदगी चल रही है, उसी में देखो कि तुम्हारे संदर्भ तथा संबंध में ऊँचे-से-ऊँचा लक्ष्य क्या हो सकता है। अपने बंधन पहचानो और देखो कि उनके कारण कितना दुख है। उसे मिटाना ही लक्ष्य बनेगा तुम्हारा। और फिर उसकी प्राप्ति के लिए पूरे जीवन को झोंक दो, यही ध्यान है।



प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं काफ़ी समय से मेडिटेशन (ध्यान) कर रही हूँ। पिछले कुछ दिनों से कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ समय के लिए


प्रश्नकर्ता: प्र: तो आचार्य जी, अंजन, अंजनों के घर्षन से निरंजन निकल रहा है, ऐसा कुछ हो रहा है?

प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर। सर, दुनिया में दो तरह के सिद्धांत चलते हैं — एक ये कि जवान लोग कहते हैं कि खाओ-पियो बिंदास जियो, और दूसरी ये कि बुज़ुर्ग या दार्शनिक लोग कहते हैं कि जीवन क्या है इसको समझो, अपना पुरुषार्थ दिखाओ, अपनेआप को जानो, इस तरह की बातें।




प्रश्नकर्ता: बीसवीं सदी के कई बुद्ध पुरूषों जैसे की ओशो एवं रमण महर्षि ने मेडीटेशन टेक्निक्स(ध्यान की विधियों) को ज़रूरी बताया क्योंकि वह शुरुआती रूप से मन को शांत करती है। मेरी भी समझ कहती है ये तकनीकें ज़रूरी हैं क्योंकि मन का थोड़ी देर के लिए भी शांत…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी! लगभग एक साल से ऊपर हो गया आपको सुन रही हूंँ। शुरुआत में बहुत ज़्यादा सबकुछ सकारात्मक मिल रहा था, सकारात्मक बदलाव आ रहे थे उसके बाद फिर अभी ये मार्च दो हज़ार इक्कीस का शिविर भी किया था,


प्रश्नकर्ता: ये मेडिटेशन (ध्यान) चीज़ क्या है?

प्रश्नकर्ता: 2012 से विभिन्न आध्यात्मिक संस्थाओं से जुड़ा हूँ, जहाॅं पर विधियों के मार्ग पर चलना सिखाया जाता है। अब पिछले एक साल से आपको सुनना शुरू किया है, और सबकुछ व्यर्थ लगने लगा है, संसार का कोई भी काम रास नहीं आता, पर फिर भी विधियों के प्रति आकर्षण



प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ‘ध्यान’ में, वृत्तियों को भी पकड़ा जा सकता है?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ध्यान करते वक़्त साँस और विचारों को देखना कितना सार्थक है?
आचार्य प्रशांत: तुम्हारे सामने इतनी चीज़ें हैं उनको भी ग़ौर से देख पाते हो? जो स्थूल है, प्रत्यक्ष है वो भी दिखता है? मुझे यह कागज़ डरा रहा हो, तो मैं कागज़ को देखूँ या साँस…


प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। गुरु, संत जो बताते हैं कि अलग-अलग तल में अलग-अलग ध्वनियाँ होती हैं। कहते हैं कि आप जैसे-जैसे अपनी सुरति ऊपर उठाते हैं, आपके अलग-अलग तलों पर अलग-अलग ध्वनियाँ आपको सुनाई देती हैं। और फिर आपको प्रकाश होता है या मौन होता है। क्या ध्यान में


प्रश्नकर्ता: सर, क्या भक्ति सुमिरन है, क्या इसमें ध्यान लगाना चाहिए, भक्ति कैसे करनी है? कई लोग कहते हैं कि आप ध्यान में बैठोगे, वो भक्ति है; या आप सुमिरन कर लोगे, वाहे गुरु, वाहे गुरु जाप कर लोगे, वो है। आप राम-राम कर लो वो है या आप ओम्-ओम्…

प्रश्नकर्ता : आचार्य जी, ध्यान करना ही खुद को देखने का सबसे अच्छा तरीका है। जब मन शांत होता है तब तो ध्यान करना सरल होता है, मगर जब मन में दबाव या डर या कोई डिज़ायर्स (इच्छाएँ) हों तब ध्यान करना मुश्किल क्यों होता है?


प्रश्नकर्ता : आपके एक वीडियो में सुना था कि कैसे पता लगे कि हम उसके क़रीब हैं, कि हमको कुछ प्राप्त हुआ है या नहीं हुआ है। तो उसमें आपने कहा था कि अगर चीज़ों को खोने से कम डर लगने लगे तो समझ लो उसके क़रीब हो, या बेवजह

प्रश्नकर्ता: विशुद्ध चक्र की साधना करता था और एक दिन ऐसा लगा जैसे पार जा ही रहा हूँ, पर मन ने डराकर वापस कर दिया। फिर हिम्मत बाँधकर कोशिश की लेकिन वो मौक़ा दोबारा नहीं मिला। फिर शादी हुई और बाद में कोई दुर्घटना भी हुई जिसकी वजह से घुटने

आचार्य प्रशांत: ध्यान की तीन बेहतरीन विधियाँ हैं। हज़ारों हो सकती हैं, इसमें ये तीन सर्वश्रेष्ठ हैं। पहला — जप; जप का अर्थ है दोहराना,

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जीवन में क्या ध्यान करना आवश्यक है?

आचार्य प्रशांत: ध्यान की एक विधि। उत्सुकता आयी थी कि ध्यान की एक विधि दी जाए। तो आपमें से जो लोग उसके बारे में जानना चाहें, वो समझें।

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, शिविर के बाद बहुत परिवर्तन हुआ है। मन स्थायी रूप से शांत रहता है। मुझे ध्यान करना और आपके वीडियो सुनना अच्छा लगता है। परंतु मेरी धार्मिक ग्रंथों में अभी रुचि नहीं है। क्या यह सही है? कृपया मार्गदर्शन करने की कृपा करें।
आचार्य प्रशांत: भावना…

आचार्य प्रशांत: मुकेश पूछ रहे हैं कि क्या ध्यान करते समय किसी पर केंद्रित होना है? गिरेन्द्र कह रहे हैं कि मन एक बार में एक ही काम क्यों करना चाहता है? कहते हैं कि जब ईश्वर को याद करता हूँ तो संसार को भूलता हूँ। जब संसार याद आता

प्रश्नकर्ता: सर, मेरे कई दोस्त हैं जो रोज़ मेडिटेशन (ध्यान) करते हैं और कहते हैं कि इससे कॉनसन्ट्रेशन (एकाग्रता) बढ़ती है। मैंने भी काफ़ी मेडिटेशन तकनीक को आज़माया लेकिन कुछ ख़ास लाभ नहीं हुआ। क्या आप ऐसी कोई तकनीक बता सकते हैं जो कॉनसन्ट्रेशन बढ़ाने में सहायक हो ?
आचार्य…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, जो चक्रों की बात करते हैं कि एक खुला, दूसरा खुला फिर कुछ अलौकिक सिद्धियाँ इत्यादि आ गईं खुलने से। तो सात चक्रों जैसा कुछ होता है? या ये बस हवा-हवाई बातें हैं?
अचार्य प्रशांत: ये सांकेतिक बात है। जैसे हम कहते हैं मन; और अक्सर…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ध्यान में मन नहीं लगता है और बोलने में कठिनाई होती है और इसकी वजह से परेशान रहता हूँ। कृपया मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: मुक्ति सबको चाहिए। बेचैन सभी रहते हैं। तड़प सभी को है। लेकिन मुक्ति के जो तरीक़े हम चुन लेते हैं, वह तरीक़े गड़बड़…

प्रश्नकर्ता: शून्य की स्थिति में जाने के लिए, या विचार आपके ऊपर इतना प्रभाव न डालें, उसके लिए शिव ने जो क्रियाएँ दी हैं मनुष्य जाति को, उन क्रियाओं का अनुसरण करना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: आप विज्ञान भैरव तंत्र की बात कर रहे हैं, जो एक-सौ-बारह उसमें विधियाँ दी हैं?…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मेरा प्रश्न है कि ‘ध्यान’ की भी क्या कोई पद्धतियाँ होती हैं जो सीखी जा सकती हैं? या ये गुण स्वाभाविक ही है जो हर किसी को…
आचार्य प्रशांत: अभी यहाँ बैठे हो, तो ये पद्धति है कि सुनो।


प्रश्नकर्ता: मैं ध्यान के बारे में पूछना चाहती हूँ। ध्यान है क्या और इसका सही तरीक़ा क्या है? और इसका हमारे ऊपर प्रभाव कैसे पड़ता है?
आचार्य प्रशांत: मन को हमेशा कोई लक्ष्य चाहिए होता है। आप जब भी अपनी स्तिथि का ज़िक्र करते हैं, वर्णन करते हैं तो आप…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम! हमने यूट्यूब पर कुछ प्रश्न आमंत्रित किए थे। उनमें से एक प्रश्न है जो मुझे सबसे ज़्यादा प्रासंगिक लगा है। लगभग पाँच-छ: लोगों ने इसी विषय पर हम से प्रश्न पूछा है। यह प्रश्न द साउंड ऑफ साइलेंस के बारे में है। यह मेडिटेशन (ध्यान) की…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। हमारा जो ध्यान है लगातार नहीं चलता लंबे समय तक, जैसे हमारी साँस लगातार चलती है। सफलता भी मिल रही है काम में, पर फिर भी ध्यान लंबे समय तक साथ नहीं चलता।
आचार्य प्रशांत: क्या नाम है आपका?


प्रश्नकर्ता: साक्षी भाव के लिए ध्यान की आवश्यकता है?
आचार्य प्रशांत: साक्षी भाव और ध्यान एक ही बात है। ध्यान साक्षित्व का माध्यम नहीं है। थोड़ा समझेंगे, ध्याता हम सब सदा हैं, ऐसा नहीं कि जब आप कुछ विशिष्ट पलों में ध्यान लगाने बैठते हो तभी आप ध्यानी होते हो।…

आचार्य प्रशांत: हम लगातार इसी आधार पर ज़िंदा हैं कि बाहर जो कुछ है, वो असली है। हमारी पहचान, हमारे रिश्ते-नाते, रूपया-पैसा यह सब कुछ जो बाहर है, वो असली है।

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आपसे जो एक चीज़ सीखी — संवेदनशीलता, कि आप लगातार ज़िन्दा हो, हर सेकंड में संवेदनशील हो। पर मेरे साथ ऐसा होता है कि एक-दो सेकंड के लिए ही संवेदनशीलता आती है, उसके बाद चली जाती है।

प्रश्नकर्ता आचार्य जी, ध्यान साधना करता हूँ, कुछ समय के बाद ध्यान टूट जाता है। क्या करूँ कि ध्यान बना रहे?
आचार्य प्रशांत: यह क्रम कौनसा है पहले तो यह बताओ, जिसमें दो घंटे साधना है और बाईस घंटे संसार है। क्रम बना हो तो न टूटेगा। तुमने कौनसी नदी…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ध्यान में रहना और वैसे ही अपनी ज़िंदगी बिताना अगर सही तरीका है, तो हम लोग अपने तरीके से, जितना भी हमलोगों को पता है उस हिसाब से या आपको जैसे सुनते हैं, तो कोशिश करते हैं। पर लगता है कि कुछ हो नहीं रहा या हमसे…
प्रश्नकर्ता: मैं एक सर्जन (शल्य चिकित्सक) हूँ। क्या ध्यान में होने से सर्जरी सफल हो सकती है?
आचार्य प्रशांत: ध्यान में होने पर ही सर्जरी सफल हो सकती है। नहीं तो ध्यान का फ़ायदा क्या? ध्यान का अर्थ ही होता है कि मन के पास भटकने के लिए कोई ठिकाना,…
आचार्य प्रशांत: अगर आपको पता न होता कि मेडिटेशन…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आप अपनी किताब में कहते हैं कि ध्यान की विधियों से कुछ नहीं होगा, लेकिन क्या कुछ देर बैठ कर अपने विचारों को देखना सही नहीं है? क्या इससे कुछ पलों का चैन नहीं मिलेगा?
आचार्य प्रशांत: सटीक उदाहरण नहीं दे रहा हूँ पर इशारा समझना। चुपचाप…
प्र: या फिर मतलब उसमें...
आचार्य प्रशांत: निरंजन कुछ है कि जो निकलेगा?
प्र: यहाँ पर आप इतनी देर से एक्सप्लेन (समझा) कर…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, साक्षीभाव से साधना के विषय में कहा जाता है कि किसी एक विशेष चीज़ पर आपका ध्यान लगा होना चाहिए, जैसे विपश्यना ध्यान जिसमें अपनी आती-जाती साँसों के प्रति होश पूर्ण रहा जाता है, लेकिन आप हमें जिस चीज़ के प्रति सचेत रहने को कहते हैं वो…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी नमस्ते! कल के सेशन में आप एक बहुत ही एलिवेटेड स्टेट में लेकर गए, बहुत ट्रैंकफुल स्टेट(शान्ति की स्थिति) में लेकर गए। अब सवाल ये है कि वो स्टेट, वो मनोस्थिति को बरकरार कैसे रखें? डे टू डे ट्रिगर्स के बीच में वही पीसफ़ुलनेस कैसे मेंटेन…
प्रश्नकर्ता: हम ध्यान में डर क्यों जाते हैं?
आचार्य प्रशांत: हम ध्यान में डर क्यों जाते हैं? डर का या बेचैनी का या किसी भी तरह के विचित्र या विशिष्ट अनुभवों का सामना किस-किस का हुआ है, ध्यान में? कि ध्यान की किसी भी विधि का उपयोग किया। श्रवण भी…
प्रश्नकर्ता: टेंडई बौद्ध दर्शन का एक आश्रम था। वहाँ पर एक शिष्य ज़ेन गुरु के पास शिक्षा ग्रहण करने आया। कुछ साल बाद जब उसने गुरु से विदा ली, तो गुरु ने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्य का अध्ययन अच्छा तरीका है उपदेश हेतु ज्ञान इकट्ठा करने का। मगर…
लेकिन…
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आपने अभी बताया कि जिसका अनुभव हो वह द्वैत है और अद्वैत का कोई अनुभव नहीं होता। अगर मौन का भी अगर अनुभव है तो वो मौन नहीं है। और असली अनुभव जब होता है तो अनुभोक्ता नहीं होता। आचार्य जी जीवन के इतने समय में…
प्रश्नकर्ता का परिचय: वो चार अलग-अलग महासागरों और आठ अलग-अलग समुद्रों में तैर चुकी हैं।
स्वर्गीय माननीय भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी जी ने उन्हें वाटर एडवेंचर के लिए तेनज़िंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया है।
वो अंटार्कटिक जल में खुली तैराकी में रिकॉर्ड स्थापित करने वाली पहली…
प्रश्नकर्ता: जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय ये चार अवस्थाएँ क्या हैं?
आचार्य प्रशांत: इसका जो शास्त्रीय तरीक़ा है बताने का, शुरुआत वहाँ से करेंगे। दस तो मानी गई हैं इंद्रियाँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ और पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ। और उसके अलावा होता है अन्तःकरण। अन्तःकरण क्या? अन्तःकरण चतुष्टय, जिसमें चार आते हैं। कौन…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। हर समय तो हमसे ध्यान की अवस्था में रहा नहीं जा सकता। जब कभी भी पुरातन प्रणाली की तरह ध्यान लगाने की कोशिश करती हूँ तो ध्यान जैसा कुछ अनुभव तो नहीं होता पर हल्का सा सहस्रार में कंपन और भूमध्य के बीच तनाव क्यों होता…
आचार्य प्रशांत: तुमने इतनी फ़िल्में देखी होंगी, तुम्हें डायलॉग (संवाद) कितनों के याद हैं? और तुम्हें…
आचार्य: तब तुम उन …
प्रश्नकर्ता: सुबह ध्यान करने के लिए जाते हैं पहाड़ी पर, अच्छा रहता है, सुबह ध्यान होता है। शाम को भी जाते हैं। फिर बीच में ऑफिस से आने के बाद, दोपहर में एक घंटा घर पर बैठे तो उस तरह का नहीं हो पाता।
आचार्य: तुम कह रहे हो कि…
दूसरा, इस बात…
देखिए, अभी आप कैसे स्थिर बैठे हैं, आँखें मेरे…
शून्य-स्मरण। शून्य-स्मरण – जो कुछ भी बहुत आवश्यक और ज़रूरी लगता हो, जो कुछ भी नितांत क़रीबी, आवश्यक प्रतीत होता हो, उसको…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अष्टावक्र कहते हैं कि ध्यान की विधियाँ बंधन हैं। मेरी जिज्ञासा यह है कि इतनी सारी ध्यान की विधियाँ क्यों हैं?
आचार्य प्रशांत: विधियाँ उनके लिए हैं जिन्हें सत्य को तो पाना है और अपनी ज़िद को भी बचाना है। ख़ुदा को भी पाना है ख़ुद को…
आचार्य: जगमीत ठीक? सब…
~ संत कबीर
प्रश्नकर्ता: तो आचार्य जी सिर्फ़ पहली पंक्ति कुछ समझ आयी, लेकिन दूसरी पंक्ति समझ नहीं आयी।
आचार्य प्रशांत: वही तो मज़ेदार है। उसको काहे नहीं समझा?
कबीर चतुराई अति घनी, हरी जपै…
दो विधियों की बात की हमने — पहली, जप, जिसको किया जाता है; दूसरी, मूर्त रूप देना कि सत्य…
अभी आपको भी सुन रहा था तो बीच-बीच में…
आचार्य प्रशांत: अरूण कह रहे हैं, 'आचार्य जी, बहुत गुरुओं के पास गया हूँ, काफ़ी ध्यान की विधियाँ भी की हैं, प्रकाश भी महसूस किया है, काफ़ी हद तक परिवर्तन भी आया है, ध्यान करने से अच्छा लगता है, शांति मिलती है।'
यह हुई भूमिका, यह हुई स्थिति। अब इस…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, परिवार में ज़्यादा लोग आँख बंद करके ध्यान करने बैठने को ध्यान कहते हैं। मैं श्रवण को, पढ़ने को, जीने को, पल-पल जागने को ध्यान कहती हूँ। लेकिन अति संवेदनशीलता पर जब मुझे कभी दर्द या परेशानी होती है तो वो कहते हैं कि सुनती बहुत हो,…