प्रश्नकर्ता: ये मेडिटेशन (ध्यान) चीज़ क्या है?
आचार्य प्रशांत: मैं बताता हूँ ये चीज़ क्या है, ये फ़र्जी चीज़ है, ये फ़रेब है, ये आत्मप्रवंचना है, खुद को धोखा है, ये कुछ समय का आध्यात्मिक मनोरंजन है कि आओ बैठ जाओ, कुछ आसन बना लो, कुछ आँख बन्द कर लो, थोड़ी देर ऐसे करो, थोड़ी देर वैसे करो। कुछ क्रिया कुछ प्रक्रिया बता दी गयी और वो करके आपको तात्कालिक राहत मिल गयी। और उसको आपने उसको नाम क्या दिया? ध्यान, मेडिटेशन अरे वो ध्यान नहीं है, यूँही हैं, सस्ती चीज़, फ़र्जी।
(संगीत की धुन के साथ एक पुरुष की आवाज़ आती है, ‘अब हम लगभग बीस मिनट के लिए ध्यान करेंगे। लेकिन सिर को सहारा न दें, इस क्रिया को पूरब दिशा की ओर चेहरा करके बैठकर करने से अधिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं’। फिर एक महिला की आवाज़, ‘आपके चेतन मन को गहरी नींद में रहने दीजिए और आप एक अचेतन मन को मेरी बातें सुनने दीजिए’।)
क्या करते हो? मेडिटेशन। वो क्या होता है? वो आँख बन्द करके कभी साँस गिननी होती है, कभी संगीत सुनना होता है, झुन-झुन, झुन-झुन, झुन-झुन, झुन-झुन।
ये क्या चल रहा है? मेडिटेशन। तो एक मिले यही मेडिटेशन वाले, तो मैंने पूछा क्या करते हो? बोले, ‘वो कमरे में बन्द कर देते हैं, अन्धेरा कर देते हैं और रिकॉर्ड्स चालू कर देते हैं, कहते हैं सुनो। और उसमें झींगुरों की आवाज़ें आती हैं। बोलते हैं ये अनहद है और यही परम ध्यान है, सुनो’। (रात को झींगुरों की आवाज़ की ध्वनि वाला संगीत)
तुमने उपनिषद का "उ" पढ़ लिया होता तो भी बच जाते फ़रेब की इस दुकान से। ध्यान कोई छोटी-मोटी चीज़ नहीं होती, ध्यान हँसी, ठठ्ठा, खिलवाड़ नहीं हैं, ध्यान लाइफ़स्टाइ को थोड़ा-सा बेहतर करने का ज़रिया नहीं है।




