ये शांति झूठी है - इससे बेहतर है दौड़ो, दहाड़ो, विद्रोह करो! || आचार्य प्रशांत (2023)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। आपने अभी बताया कि जिसका अनुभव हो वह द्वैत है और अद्वैत का कोई अनुभव नहीं होता। अगर मौन का भी अगर अनुभव है तो वो मौन नहीं है। और असली अनुभव जब होता है तो अनुभोक्ता नहीं होता। आचार्य जी जीवन के इतने समय में बहुत सारे मेडिटेशन सेंटर गये ‘डायमंड, रोज़, कॉस्मिक।’ यहाँ मुम्बई में एक मन्दिर है वहाँ पर एक धूप जला देते हैं, उसमें घड़ा औंधाकर के, उसमें धुँआ लाकर के उसको सूँघने का बोलते हैं। तो वो सब किया, खूब कीर्तन करवा दिया और फिर एकदम से बिठा दिया।
तो इन सब चीज़ों से जो एक शान्ति अनुभव हुई, वो कह रहे हैं कि यही अद्वैत का थोड़ा सा स्वाद है, इसी को करो तो और आ जाएगा। अब आपने कहा, अब वो शान्ति तो अनुभव हो ही गयी न। तो आपने जो कहा तो मतलब मेरा तो दिमाग ही हिलता जा रहा है इतनी सारी शान्ति महसूस की थी घड़ा सूँघ-सूँघकर। (श्रोतागण हँसते हैं)
उन्होंने कहा देवी आ जाएँगी। अब वो उन्होंने धूप में धुँआ भर लिया घड़े में उसको सूँघा, तो वो जो सूँघा और सूँघ-सूँघकर के जो शरीर में पूरी झुनझुनी आ गयी और फिर एकदम से उन्होंने बिठा दिया और एक शान्ति लगने लगी। अब वो तो अनुभव हो गयी, तो बड़ी उथल-पुथल मच गयी। और एक दूसरी बात इसमें और आ गयी कि बहुत सारे अभी ऐसे हैं जो अभी हैं वो बोल रहे हैं कि जब यही करते-करते हम बैठे तो छः दिन तक बैठे ही रहे, दो दिन तक बैठे ही रहे, तेरह दिन तक बैठे ही रहे। और जब हमारी आँख खुली तो हमको पता ही नहीं चला कि हम दस दिन तक बैठे थे या तेरह दिन बैठे रहे।
तो क्या उनको पता नहीं चला तेरह दिन वो बैठे थे? तो मतलब तेरह दिन उनको पता नहीं चला मतलब उन्होंने अनुभव भी नहीं किया? तो क्या उनको अद्वैत का अनुभव हो गया होगा? या ऐसे मेडिटेशन कर-करके ही क्या अद्वैत को अनुभव कर लें? और यहाँ तो हमने बोल दिया कि जो अनुभव हो गया वो अद्वैत ही नहीं है।
आचार्य प्रशांत: देखिए वो जो चीज़ है न वो हमें बहुत गहराई से, बड़ी सिद्दत से और पूरी चाहिए होती है और मिलती है इतनी सी। तो उस समय बड़ा आसान लगता है चूँकि उसकी प्यास बहुत सारी है, दावा कर दो कि इतनी मिल गयी है क्योंकि चाहिए तो इतनी है न, चाहिए इतनी है और मिली है इतनी। तो बड़ा मन करता है कि कम-से-कम इतने का तो दावा कर ही दो क्योंकि प्यास तो इतने की थी। सौ में से एक नम्बर मिला है। अब मानना भी है कि






