ध्यान और एकाग्रता (मेडिटेशन और कॉनसन्ट्रेशन) || आचार्य प्रशांत (2020)

प्रश्नकर्ता: सर, मेरे कई दोस्त हैं जो रोज़ मेडिटेशन (ध्यान) करते हैं और कहते हैं कि इससे कॉनसन्ट्रेशन (एकाग्रता) बढ़ती है। मैंने भी काफ़ी मेडिटेशन तकनीक को आज़माया लेकिन कुछ ख़ास लाभ नहीं हुआ। क्या आप ऐसी कोई तकनीक बता सकते हैं जो कॉनसन्ट्रेशन बढ़ाने में सहायक हो ?
आचार्य प्रशांत: देखो, मेडिटेशन इसलिए नहीं होता कि उससे कॉनसन्ट्रेशन बढ़ेगी। तुमने पहले ही बात कही कि तुम्हारे कई दोस्त हैं जो रोज़ मेडिटेशन करते हैं और कहते हैं इससे कॉनसन्ट्रेशन बढ़ती है।
यह उल्टी बात है। कॉनसन्ट्रेशन इसलिए होता है ताकि तुम अंततःमेडिटेटिव (ध्यानी) हो जाओ। दोनों का अंतर समझते हैं। कॉनसन्ट्रेशन में तुमको किसी चीज़ पर, दुनिया की किसी चीज़ पर एकाग्र होना होता है, इसे कॉनसन्ट्रेशन कहते हैं – कॉन-सन-ट्रेट।
जो चीज़ बिखरी हुई है, हेजी या ब्लर्ड है, उसको किसी एक सेंटर (केन्द्र) पर एकाग्र करना, फ़ोकस करना, इसे कहते हैं कॉनसन्ट्रेशन। तो हमारा काम है कि सही चीज़ को चुनें और उस पर मन को पूरी तरह टिका दें – ये कनसेन्ट्रेशन है, ठीक है।
सही चीज़ कौनसी होती है?


