
प्रयत्न साधकः ~ शिव सूत्र
प्रश्नकर्ता: प्रयत्न क्या है और साधक कौन है?
आचार्य प्रशांत: शिव सूत्र से है।
यत्न में हम सब उद्यत रहते हैं। हमारे सारे यत्न फूलने से उपजते हैं। विस्मृत कर देते हैं कि हम हैं कौन, क्या हमारा स्वभाव है, और क्या हमें उपलब्ध ही…

शिव कोई ऐसी इकाई नहीं हैं, जो अपना कोई निजी, पृथक या विशिष्ट व्यक्तित्व रखती हो। हम सब जहाँ पहुँचना चाहते हैं, हमारी एक-एक गतिविधि जिस अवस्था को हासिल करने के लिए है, उसका नाम है—शिव। सब समय, सब स्थान मन का विस्तार हैं और शिव मन का केन्द्र हैं। शिव इसलिए नहीं हैं कि उनके साथ और बहुत सारे किस्से जोड़ दो। शिव इसलिए हैं ताकि हम अपने किस्सों से मुक्ति पा सकें। शिव कोई देवता, भगवान या ईश्वर नहीं हैं, शिव सत्य मात्र हैं।


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बाइबिल में एक दृष्टान्त है, एक कहानी है, उससे एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ।




आचार्य प्रशांत: बाहर जो कुछ भी है वो तो एफर्ट (प्रयास) माँगेगा-ही-माँगेगा। एफर्टलेसनेस (सहजता) कहाँ होती है,


ऐसी तो कोई वस्तु नहीं जो मनुष्य में बाहर से समाकर अशुद्ध करें; परन्तु जो वस्तुऍं मनुष्य में से निकलती हैं, वे ही जो उसे अशुद्ध करती हैं।


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। ज्ञान के सम्बन्ध में कुछ सूत्र हैं; ‘ज्ञानं बन्धः’ – ज्ञान बंधन है। तो इस पर बहुत विचार किया था तो पता चला कि जो जानते हैं हम उसकी वजह से ही दुख में हैं। तो फिर बात ये उठी कि यहाँ पर भी तो हम




प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अनहद में नाचते समय जो ऊर्जा थी वह ऊर्जा हमेशा नाचने में क्यों नहीं होती?



प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपको सुनने से पहले मैं एक भजन सुनता था उसमें बोलते थे कि "सिर से तेरी बहती गंगा, काम मेरा हो जाता चंगा, नाम तेरा जब लेता।" तो भजन सुनते-सुनते मुझे लगता था कि मैं महादेव के कुछ नज़दीक हो गया हूँ और अब मेरा काम चंगा

प्रश्नकर्ता: शिवलिंग क्या है? इसकी पूजा क्यों की जाती है?

"या तो पापनाशक जल वाले गंगा तट पर निवास करें या फ़िर मनोहर हार वाले तरुणी स्त्री के वक्षस्थल पर।" ~(श्रृंगार शतकम्, श्लोक ३०)

प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, अन्यथा समाज में अगर कोई अंधविश्वास फैलता है तो वो जान तो नहीं लेता, आंतरिक रूप से मार देता है पर किसी का शरीर तो नहीं हरता। अगर कोरोना वायरस से उठ रही इस वैश्विक महामारी के समय में कोई अंधविश्वास फैल रहा है तो वो

आचार्य प्रशांत (आचार्य): तुलसीदास उल्लेख करते हैं एक स्थान पर, वहीं से प्रश्नकर्ता ने ये सवाल रखा है: उल्लेख ये है कि ब्रह्मा जी पार्वती जी से शिकायत कर रहे हैं कि शिव आगा-पीछा देखे बिना, विचारे बिना, दान करते रहते हैं। इतना दान दे देते हैं कि उनके पास…

अचार्य प्रशांत: वास्तव में जब शिव और शक्ति का निरूपण किया जाता है चित्रों में तो बड़े भ्रामक तरीके से किया जाता है। यूँ दिखा दिया जाता है—आपने अर्धनारीश्वर की मुद्राएँ देखी होंगी कि आधे शिव हैं और आधी शक्ति। यह बात बचकानी है। शक्ति ही शक्ति हैं, शिव कहीं…

‘वह’ भय [भगवान] अनुस्मारक ध्यान को उपलब्ध होगा, लेकिन रोगी इसेसे बचना चाहेगा।


श्रोता: ‘*अबोर्ड हियर आफ्टर*, एंड इन्डीड द अबोर्ड हियर आफ्टर, इज़ बेस्ट फॉर दी कांशेंशिअस।’

Ask and it will be given to you; seek and you will find;knock and the door will be opened to you. For everyone who asks receives; the one who seeks finds;and to the one who knocks, the door will be opened.

वक्ता: शिक़ायत करने में एक बहुत बड़ा सुकून है| शिक़ायतें करना हमारा स्वभाव बन चुका है| यह मानना कि परिस्थितियों ने, समाज ने, पूरी दुनिया ने हमारे साथ कुछ ग़लत किया है, यह कह कर हम अपने आप को बड़ा ढांढस बंधा लेतें हैं| क्योंकि हम जब ये शिक़ायत करतें…
“जीसस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया कि स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिसने अपने खेत में अच्छे उपजाऊ बीज बोया। पर जब सभी लोग सो रहे थे तो उसका…
अपने पर्व पर मुझे जन्म दिया लगा मुझे मैं कृतकृत्य हुआ
पर जैसे-जैसे समझ बढ़ी वैसे-वैसे प्रश्न उठा जो जगत तुमसे ही छल करता उसमें मुझे भेजा क्यों भला
जिस संसार में दुर्पयुक्त होता तुम्हारा ही निशान है उस संसार में बोलो फिर मेरा क्या स्थान है?
हे अचिन्त्य!
देखो…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी नमस्ते, आज योग दिवस है तो देश-दुनिया के जितने भी समाचार है हर जगह पर योग को लेकर ही चर्चा हो रही है। तो मैं काफ़ी चीज़ें पढ़ रहा था तो वहाँ पर एक चीज़ मुझे बार-बार पढ़ने को मिल रही थी जहाँ पर लोग कह रहे…
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना। मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः।।
मुझ निराकार परमात्मा से यह सब जगत् जल से बर्फ के सदृश परिपूर्ण है और सब भूत मेरे अंतर्गत संकल्प के आधार स्थित हैं, किंतु वास्तव में मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।
—श्रीमद्भगवद्गीता ,अध्याय ९, श्लोक ४
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम।…
श्रोता: मन में।
आचार्य: वहाँ एफर्टलेसनेस रहे। वहाँ पर अननेसेसरली कॉन्फ्लिक्ट (अनावश्यक टकराव) न रहे। मानसिक एफर्ट का मतलब होता है—बहुत सारी बातें जो सोच रहे हैं, बहुत सारे …
प्रश्नकर्ता: ब्रह्मचर्य और विवाह में क्या सम्बन्ध है? जो भी जितने भी ब्रह्मचारी लोग हुए हैं, उनके जीवन को पढ़ते हुए बड़ा आनन्द आता है। मतलब जो ब्रह्मचर्य के नियम पर चले हैं। जैसे– स्वामी दयानन्द हो गए, महात्मा बुद्ध हो गए, भगवान महावीर हो गए या स्वामी विवेकानन्द हो…
बाइबल मरकुस (अध्याय ७ सूत्र १५)
आचार्य प्रशांत: तो सवाल पूछा है कि जो कुछ बाहर से आया है वही तो अशुद्ध…
प्रश्नकर्ता: वृत्ति क्या है?
अचार्य प्रशांत: वृत्ति क्या है? कुछ का भी आ जाना वृत्ति है। खाली आसमान है और खाली होना ही आसमान का स्वभाव है। खाली आसमान में आकारों का एहसास होने लगना ही वृत्ति है। जहाँ कुछ हो ही न, वहाँ ये धारणा कि कुछ है और…
प्रश्नकर्ता: ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति धनी है, सफ़ल है, बलशाली है सिर्फ़ वही बिना डरे जी पाता है, समाज में अपनी बात रख पाता है या समाज में किसी ग़लत काम का भी विरोध कर पाता है। तो समाज में एक असली मर्द की तरह जीने के…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कहा जाता है कि मीरा जी को कृष्ण मिल गये थे, फिर भी वो वियोग के गीत क्यों गाती थीं?
आचार्य प्रशांत: क्योंकि शरीर है अभी भी। क्योंकि मीरा अभी मीरा है। जब तक शरीर रहेगा उनके पास, तब तक पूर्णतया कृष्ण न हो पाएँगी। तो जब…
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम! कुछ ही महीने हुए हैं आपसे यूट्यूब के माध्यम से जुड़े हुए। 'वैराग्य शतकम' का इक्कीस्वाँ श्लोक मुझे सता रहा है, मेरे वजूद पर सवाल उठा रहा है। मैं कॉर्पोरेट में काम कर रहा हूँ तीन साल से, आप समझ ही गए होंगे मैं पापियों के…
कमलेश! (प्रश्नकर्ता की तरफ देखते हैं)
(सभाजन हँसते हैं)
कह रहे हैं कि,…
~ सबसे ऊँचा
(अल-आ’आला)
(क़ुरान ८७,९:१९)
चेतावनियाँ, पुकार, आहटें सबको आएँगी, लेकिन जो रोगी मन है वो…
‘ईश्वर खींच लेता है जीवों को उनकी मृत्यु के समय, और जिन्हें मृत्यु नहीं आयी उन्हें निद्रा की स्थिति में खींच लेता है। फिर जिन की मृत्यु निश्चित हो चुकी होती है, उन्हें रोक लेता है और शेष को विदा कर देता है, एक निश्चित अवधि…
– Bible, Matthew 7:7-8
वक्ता: बात सिर्फ़ तुम्हारी मर्ज़ी…