प्रश्नकर्ता: ब्रह्मचर्य और विवाह में क्या सम्बन्ध है? जो भी जितने भी ब्रह्मचारी लोग हुए हैं, उनके जीवन को पढ़ते हुए बड़ा आनन्द आता है। मतलब जो ब्रह्मचर्य के नियम पर चले हैं। जैसे– स्वामी दयानन्द हो गए, महात्मा बुद्ध हो गए, भगवान महावीर हो गए या स्वामी विवेकानन्द हो गए, प्रधानमंत्री जी हो गए और तमाम सारे; आपका जीवन हो गया। तमाम सारे लोग हैं, बड़ा आनन्द आता है।
और ऐसा कई सालों से लगातार हो रहा है। ये मेरी समस्या है इसलिए मैं आपको बता रहा हूँ। मुझे ऐसा लगता है कि मुझे अविवाहित रहना चाहिए, मतलब मेरी समस्या है ये। और अविवाहित रहकर जैसे इन लोगों ने देश के लिए अपने को खपा दिया उस तरफ़ आगे बढ़ना चाहता हूँ, तो इसमें आपकी क्या राय है?
आचार्य प्रशांत: मेरे बारे में तुम्हारी राय इतनी ज़बरदस्त है कि अब मैं क्या राय दूँ?(मुस्कुराते हुए)। ये बेटा जो तुम सुना रहे हो न, ये एक कहानी है। इसका सत्य और धर्म से बहुत कम सम्बन्ध है। ये एक कहानी है, कुछ इसमें से लोगों की कल्पना का उत्पाद है और कुछ तो जान-बूझकर किया गया मिथ्या प्रचार है।
बात समझ रहे हो?
पार्ट मिथ पार्ट प्रोपेगेंडा। (कुछ मिथ्या कुछ दुष्प्रचार) दो-तीन बातें समझना, ये जिन सब महानुभावों को तुमने एक ही साँस में बोल दिया, ये सब एक ही कोटी के थोडे़ ही हैं भई! विवेक सीखो, भेद करना सीखो। ब्रह्मचर्य का विवाह से कोई सम्बन्ध नहीं होता। ब्रह्मचर्य का स्पष्ट-सी बात है, सम्बन्ध ब्रह्म से होता है। जब तुम्हारा आचरण ब्रह्म के केन्द्र से संचालित होने लगे तो तुम हुए ब्रह्मचारी।
ब्रह्मचर्य में बहुत सारी छोटी-छोटी बातें तुमको व्यर्थ लगने लगतीं हैं। और वही बहुत सारी छोटी-छोटी बातें, जो व्यर्थ लगती हैं, उनमें एक छोटी-सी बात है, स्त्रियों के पीछे भागना। तो ब्रह्मचर्य एक विशाल पेड़ है और उस पेड़ की एक छोटी-सी पत्ती ये है कि अगर तुम पुरुष हो तो अब स्त्री के पीछे नहीं भागोगे और तुम स्त्री हो तो पुरुष के पीछे नहीं भागोगे क्योंकि ये काम अब तुमको बचकाना लगता है, यह काम अब तुमको बेवकूफ़ी भरा लगता है।









