सफ़ाई इकट्ठा मत करो, इकट्ठा कचरे की सफ़ाई करो || आचार्य प्रशांत (2013)

आचार्य प्रशांत: बाहर जो कुछ भी है वो तो एफर्ट (प्रयास) माँगेगा-ही-माँगेगा। एफर्टलेसनेस (सहजता) कहाँ होती है, एफर्टलेसनेस कहाँ होती है?
श्रोता: मन में।
आचार्य: वहाँ एफर्टलेसनेस रहे। वहाँ पर अननेसेसरली कॉन्फ्लिक्ट (अनावश्यक टकराव) न रहे। मानसिक एफर्ट का मतलब होता है—बहुत सारी बातें जो सोच रहे हैं, बहुत सारे ऑप्शन्स (विकल्प) हैं जो सामने आ रहे हैं और आप उनमें उलझे हुए हैं।
बाहर तो अगर आप एक शब्द भी बोलेंगे तो उसमें एफर्ट लगेगा-ही-लगेगा। एक शब्द भी अगर बोला जाता है तो उसमें भी कुछ एनर्जी (ऊर्जा) लगती है।
तो जो बाहर आप जो कुछ करते हैं जो भी है, शिवसूत्र जब कह रहे हैं:-
उद्यमो भैरव:।
~प्रथम उन्मेष, शिव सूत्र (१-५)









