प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अनहद में नाचते समय जो ऊर्जा थी वह ऊर्जा हमेशा नाचने में क्यों नहीं होती?
आचार्य प्रशांत: तो ऊर्जा का संबंध फिर किससे हुआ? शांति से। मैं उसको थोड़ा और साफ़ करके बोलूँ तो ऊर्जा का संबंध हुआ आत्मा से। जब कुछ भी आत्मिक होता है तो तुम पाते हो कि उसके लिए तुम्हारे पास ऊर्जा की कमी नहीं है। जहाँ तुम्हारा दिल लगा हुआ होता है वहाँ तुम्हें थकान नहीं होती। जो कुछ हार्दिक होता है उसके लिए तुम्हारे पास ऊर्जा न जाने कहाँ से आ जाती है, इसको जानते हो क्या कहते हैं? इसको कहते हैं, 'जहाँ शिव हैं वहाँ शक्ति है।' मैं कहता हूँ, 'जब हृदय में शिव तो भुजाओं में शक्ति।' जहाँ आत्मा है वहाँ शक्ति अपनेआप है। आत्मा माने शिव।
जब शिव के साथ होकर कुछ करोगे तो शक्ति अपने आप मिल जाएगी। कहाँ से मिल जाएगी मत पूछो, वरना शक्ति के लिए तरह-तरह के आयोजन करोगे जनरेटर चलाओगे, टॉनिक पियोगे, उधार की ऊर्जा माँगोगे। यह सब उधार की शक्ति यहीं से तो आती है- जेनरेटर से आ गयी, टॉनिक पी रहे हैं, अपनेआप को किसी तरीके से उत्तेजित कर रहे हैं, बाहरी प्रेरणा, आयातित मोटिवेशन, यह सब उधार की ऊर्जा लाने के तरीक़े हैं और उधार की ऊर्जा तुम कितनी भी लाओ पहली बात वो बड़ी क़ीमत पर आती है, दूसरी बात जल्दी चुक जाती है। तो कोई फ़ायदा है उधार की ऊर्जा का? इससे अच्छा यह है कि सीधे हृदय पर टंकार हो, सीधे यहाँ चोट हो, और जैसे दरवाज़ा खुल जाए असीमित ऊर्जा का। हृदय पर जैसे कोई चाबी लगती हो, चाबी अगर यहाँ लग गई तो दरवाज़ा खुल जाता है और उस दरवाज़े से फिर क्या बहती है? ऊर्जा। समझ रहे हो?
जब तुम्हें ऊर्जा की कमी पड़ती है तो एक बात ध्यान रखना कि ऐसा नहीं है कि तुम्हारे शरीर के पास ऊर्जा नहीं है, ऊर्जा की कमी तुम्हारे मन को पड़ती है। और जब मैं असीमित कह रहा हूँ तो उससे मेरा आशय है कि मन की सीमा नहीं रहेगी, शरीर की तो तब भी रहेगी। ठीक है पहले पंद्रह मिनट नाचते थे, अभी तीन घंटे नाच लिए लेकिन तीन हज़ार घंटे तो अभी भी नहीं नाच पाते न? गिर जाते, वो लेकिन शरीर की सीमा होती।










