हमन है इश्क मस्ताना || आचार्य प्रशांत, गुरु कबीर पर (2018)
(आचार्य जी मस्त झूमकर गाते हैं…)
हमन है इश्क़ मस्ताना
हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या?
रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या?
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते,
हमारा यार है हम में, हमन को इंतज़ारी क्या?
ख़ल्क़ सब नाम अपने को,… read_more