सेक्स अच्छा या बुरा नहीं होता। अगर आपके जीवन में हर चीज़ के लिए उलझाव है, निर्णय नहीं ले पाते, तो आप सेक्स के बारे में भी अच्छा-बुरा, सही-गलत सोचेंगे। अगर आप सही जिंदगी जी रहे हो, हक़ीक़त के साथ हो, तो सेक्स पर सोचना नहीं पड़ेगा। होगा तो होगा, नहीं होगा तो नहीं होगा। जीवन में एक प्रवाह रहेगा, और तुम्हारे मन पर सेक्स एक बोझ की तरह नहीं रहेगा।
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प्रश्नकर्ता: बहुत समय से मेरे मन में ये सवाल था, आज पूछना चाहता हूँ: सेक्स, अच्छा या बुरा?
आचार्य प्रशांत: बस सेक्स! ना अच्छा ना बुरा! साँस लेते हो तो पूछते हो अच्छा या बुरा? पानी पिया, अच्छा या बुरा?
प्रश्नकर्ता: धर्म ग्रंथों में क्यों कहा गया है कि ब्रह्मचर्य आवश्यक है?
आचार्य प्रशांत: ब्रम्हचर्य बिल्कुल आवश्यक है, पर ब्रम्हचर्य का अर्थ होता है—ब्रह्मचारी, जो ब्राह्म में जिए। 'ब्रह्म' माने हकीकत। जो हकीकत में जिए, वो ब्रह्मचारी है। ब्रह्मचारी का ये मतलब थोड़े ही है जो सेक्स नहीं करता! ये किसने बता दिया? जो सत्य में जिए, वो ब्रह्मचारी है। कृष्ण ब्रह्मचारी नहीं हुए फिर तो? कृष्ण से बड़ा ब्रह्मचारी कौन है? अगर ब्रह्मचारी की यही परिभाषा है कि वो कभी सेक्स, संभोग ना करे तो फिर तो कृष्ण ब्रह्मचारी हुए ही नहीं। ये तो बड़ा गड़बड़ हो गया! तुमने अवतार को ही कह दिया कि ये ब्रह्मचारी नहीं हैं।




