आचार्य प्रशांत: चलिए, अब ज़रा माता से कुछ बात कर ली जाए। तो सप्तशती, अब ये मुझे बहुत-बहुत, बहुत प्यारी रही है। सबसे पहले, आज से तीन साल पहले हुआ था, दो साल पहले हुआ था?
श्रोतागण: तीन साल।
आचार्य: तीन साल, तो २०२० हो गया न?
श्रोतागण: दो साल।
आचार्य: दो साल, दो साल पहले। तो ऋषिकेश में थे, और तब पूरी सप्तशती पर एक-एक श्लोक लेकर के पूरा भाष्य तैयार किया था। तो रुचि इसमें पहले से थी, और जो पूरा काम था वो सितम्बर, २०२१ में हुआ था, एक महीने के अन्दर-अन्दर ही हुआ था।
सप्तशती है, कुछ सात-सौ के आँकड़े में विशेष है। जो दो ग्रन्थ मुझे प्रिय हैं, दोनों में सात-सौ। कौनसे?
श्रोतागण: भगवद्गीता और दुर्गासप्तशती।
आचार्य: भगवद्गीता, दुर्गासप्तशती दोनों में सात-सात सौ हैं, ठीक है? विशेष बात क्या है? विशेष बात ये है कि उधर जो मामला है, वो ज्ञान का है। वहाँ पर कृष्ण ज़्यादातर आपको बोलते नज़र आएँगे पुरुष की ओर से और यहाँ जो पूरी बात है वो प्रकृति की ओर से है। बहुत बढ़िया।




