महिला का सबसे ज़्यादा अपमान तो खुद महिला करती है। नाम है ‘शक्ति’ और जीवन है पूरा ‘अशक्त’। अगर लड़की इतनी ही बुरी चीज़ है, तो आप क्यों लड़की हो? आप खुद जिस लिंग की हो, आप उस लिंग के प्रति भी अपमान से भरी हुई हो। पाँच करोड़ महिलाएँ भारत की आबादी से गायब हैं। इनकी हत्या करी गयी है। इससे बड़ा नरसंहार कोई होगा। ये सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए देश में, बहस में, मीडिया में। लेकिन इसकी कोई बात नहीं करना चाहता। क्योंकि ये नारीसंहार है, इसीलिए इसे नरसंहार भी नहीं माना जाता।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा प्रश्न ये है कि मेरे जानने में एक पैन्तालीस वर्षीय दम्पति हैं। अभी हाल ही में उन्हें पाँचवाँ बच्चा, पुत्र, पैदा हुआ। जबकि दोनों ही पढ़े-लिखे हैं, सरकारी सेवा में हैं। और उन्होंने क्या किया कि अपनी बड़ी बेटी को घर पर बैठा दिया कि वो अपने भाई की देखभाल करेगी। तो ये पता नहीं कब तक चलता रहेगा कारण यही है कि बेटा चाहिए, वंश आगे बढ़ाने के लिए। तो आचार्य जी मेरा प्रश्न ये है कि, ये अन्धा, जो पुत्र-मोह है, ये कब जाकर रुकेगा हमारे देश में?
आचार्य प्रशांत: क्या बोलूँ इसमें, ये तो प्रश्न ज्योतिष शास्त्र का है (आचार्य जी और दर्शक हँसते हुए)। कब रुकेगा, क्या बताऊँ? लेकिन कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं न, जो, जो इतनी ज़्यादा ऑब्वियसली एबसर्ड (ज़ाहिर तौर पर बेतुकी) होती हैं कि उस पर कुछ बोला भी क्या जाये।
पैन्तालीस साल के हैं, पाँच-छः बच्चे पैदा कर रहे हैं, लड़का चाहिए। हो सकता है एक-आध लड़की मार भी दी हो क्योंकि पाँच लड़कियाँ कर ली हैं और जिस तरह की मानसिकता है तो उसमें ये दहेजवादी भी ज़रूर होंगे। जो पुत्रवादी होता है, वो दहेजवादी तो होगा न? क्योंकि पुत्र चाहिए ही किसलिए? कि घर दहेज लेकर आएगा। तो पाँच लड़कियाँ कर ली हैं, वो पाँच लड़कियाँ हैं तो उनके लिए दहेज देना पड़ेगा। कौन इतना जोड़े, तो बीच में एकाध हो सकता है उड़ा भी दी हो लड़की।




