(आचार्य जी मस्त झूमकर गाते हैं…)
हमन है इश्क़ मस्ताना
हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या? रहें आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या?
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम में, हमन को इंतज़ारी क्या?
ख़ल्क़ सब नाम अपने को, बहुत कर सिर पटकता है, हमन गुरनाम साँचा है, हमन दुनिया से यारी क्या?
न पल बिछुड़े पिया हमसे, न हम बिछड़े पियारे से, उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बे-क़रारी क्या?
कबीरा इश्क़ का माता, दुई को दूर कर दिल से, जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या?
~ गुरु कबीर




