अतीत की कोई गलती आपको परेशान करने नहीं आती। अगर आप इस वक्त परेशान हैं, तो इस वक्त ही कोई गलती हो रही है। तकलीफ़ अतीत की किसी घटना की वजह से है या वर्तमान में उस घटना को पकड़े रहने की वजह से? आप अतीत का रोना इसलिए रोते हैं ताकि वर्तमान में अतीत का मुआवज़ा वसूल सकें। थोड़े से मुआवज़े के लिए ज़िन्दगी खो देते हो। अपनी जो भी हालत है, उसका जिम्मेदार दूसरों को ठहराना छोड़िए, अपनी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना सीखिए।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मैं ये जानना चाहता था कि जो हमारे दिमाग की कंडीशनिंग (ट्रेनिंग) हो रखी है, जो अतीत में गलतियाँ हो चुकी हैं, उनको कैसे ठीक करा जाए? उनसे आगे के लिए सीख ली जाए और आगे वो चीज़ें न हों?
आचार्य प्रशांत: नहीं, अतीत की तो कोई गलती आपको परेशान करने कभी भी नहीं आती। बेचारा अतीत ही जा चुका है, उसकी गलती कैसे बची रहेगी? ये धारणा बिल्कुल मन से निकालिए। हममें से कोई भी, कभी भी अतीत की गलतियों से परेशान नहीं होता, भले ही हमें ऐसा लगता हो। अगर आप परेशान हैं इस वक्त, तो कोई गलती हो रही है इस वक्त। ये अच्छे से समझिए!
और इस वक्त जो हम गलती कर रहे हैं, उसको न सुधारने का बहाना है ये कहना कि हमारा कष्ट तो अतीत से है। नहीं! आपका कष्ट अतीत से नहीं है। आपका कष्ट वर्तमान में है और वर्तमान से ही है। अतीत जैसा कुछ होता नहीं। जो नहीं है, उसको भूत बोलते हैं। न भविष्य जैसा कुछ होता है, वो तो अभी पैदा ही नहीं हुआ। आपकी सारी समस्याओं का अनुभव आपको कहाँ होता है? इस ही क्षण में होता है। इस ही क्षण में ऐसा कुछ है, जो आपको परेशान कर रहा है। और वो कहाँ है? वो आपमें ही है। बीमार ही बीमारी है। अनुभोक्ता ही अनुभव है।




