दुनिया की सबसे ज़्यादा रोमांटिक पिक्चरें भारत में बनती हैं। आप घोर नाक़ाबिल हो, सारी नाक़ाबिलियत आपकी छुप जाती है जब कोई आकर बोलता है, "तुम मेरे सब कुछ हो।" मौत जैसी होती है आशिक़ी, हॉल में बैठकर आँसू बहाने से नहीं होती, मैदान में ख़ून बहाने से होती है। आशिक़ी बहुत प्यारी चीज़ होती है, पर आशिक़ी दमदार लोगों के लिए है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, मेरा सवाल ये है कि हाल ही में मैंने एक फ़िल्म देखा बिकॉज़ ऑफ इट्स क्रेज “सैयारा,” कि लोग हॉल में बेहोश हो रहे हैं, रो रहे हैं। तो जब मैंने फ़िल्म देखा, तो वही था फ़िल्म में ओल्ड स्क्रिप्ट था। लड़का-लड़की मिलते हैं, सेक्स होता है और फिर एंडिंग में यही रहता है कि मैरेज, लाइक दे हैप्पीली लिव फ़ॉरएवर।
तो आज आचार्य जी, आपने सेशन में जो समझाया कि हम दूसरों की स्क्रिप्ट को अपना जीवन बना लेते हैं, तो सदियों से चले आए इस प्रोपेगैंडा से हम कैसे बचें?
आचार्य प्रशांत: मुझे तो दिखा दो पहले पिक्चर, शास्त्र तो है नहीं कि मैंने पढ़ रखा होगा पहले ही। मुझे नहीं पता, मैंने नहीं देखी भाई। अख़बार में ज़रूर आया था कि दो-चार ये 18 वर्षीय प्रजाति के मर-वर भी गए शायद हॉल में। एक था वो नंगा होकर स्क्रीन पर लोटने लग गया, इस तरह की कुछ ख़बर आई थी। बाक़ी पिक्चर तो नहीं देखी मैंने। क्या हो गया? क्या था उसमें ऐसा? आप देखे?




