
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब कोई कुछ बोलता है, तो न चाहते हुए भी ‘ना’ नहीं बोल पाता हूँ।
आचार्य प्रशांत: ‘ना’ तो तुम बोलते हो, ऐसा तो नहीं है कि ‘ना’ नहीं बोल पाते।
ऐसा नहीं है। ‘ना’ तो हम बोलते हैं, वहाँ हमारा गणित होता है। हमें अच्छे से…


Speaker: Mind has so much stored, that it does not even know how much is stored. There are two portions to the storage. There are two parts of this godown. One part is – where you know that you have something stored. And the other part is – where you


Questioner: I believe that I like the ability to trust people. I like I found myself trying to flirt with fake as I say. There are times when I find myself desiring or trying or making a very good effort to be in faith and then there will be time

Keep fighting. Keep fighting till your victory, and keep fighting in your defeat. The second part is more important. Keep fighting even when you have been beaten down. Keep fighting even when yours looks like a hopeless cause, a lost battle. Don’t just start wallowing in self-pity and self-abuse. “Oh!

Question: Sir, I have a few questions related to simplicity as follows:
A. What is simplicity?B. How is simplicity related to courage?C. How is simplicity related to intelligence?D. How is it related to love?
Answer: In your previous mail, you said,


If you are just looking for decent looks and somebody to accompany you to the movies, then anybody would do. But if you are looking really to not make a waste of your life, and if you are looking for someone who just refreshes you, gives you freedom from all

Acharya Prashant (AP): What do we call as a dead relationship?
Questioner (Q): When we cannot relate.


आचार्य प्रशांत: ज़्यादातर लोग, सभी लोग बहुत सारे लोग होते हैं। एक व्यक्ति बहुत सारे चेहरे रखता है। इसी बात का प्रतिनिधि दशानन है, अपने दस सिरों के साथ।
तो हर इंसान के भीतर बहुत-बहुत सारे हिस्से होते हैं। ये बात तुम्हें उसके चेहरे से पता नहीं चलेगी, क्योंकि चेहरा

सही लक्ष्य की खातिर जियो। दिल में एक सही उद्वेश्य होना चाहिए। उसके बाद किसी पॉजिटिव थिंकिंग की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ये चीज़ इतनी ज़बरदस्त मिल गई है, प्यार हो गया है इससे, अब मजबूर हैं इसके सामने। अब चाहें भी पीछे हटना तो हट नहीं सकते। जब ऐसा हो…


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने अपने एक संवाद में कहा है कि व्यक्तित्व की बात हम इसीलिए करते हैं क्योंकि हम मूलतत्त्व से अनभिज्ञ रहते हैं। मेरा प्रश्न है कि – हम दूसरों के मूलतत्त्व को कैसे देखें?

आचार्य प्रशांत: सूफी था एक, उसके घर खाने को ज्यादा रहता नहीं था | बस उतना कि अपना, सुबह खा लिया अपना | शाम की ज्यादा फिकर नही, शाम को मिल गया तो अच्छा, नही मिला तो भी कोई बात नही और जो सूफी साधना है उसमें कम खाने पर…

आचार्य प्रशांत: अच्छा, आप ने एक चीज़ गौर करी है? यूँ ही, कहीं रहो, घर में, बाज़ार में, बोलना आसान होता है। यहाँ आते हैं, शुरुआत में, बोलना थोड़ा सा अटक जाता है और फिर कुछ देर बाद, या आधे घंटे बाद, यहाँ भी बोलना आसान हो जाता है,

आचार्य प्रशांत: सवाल ये है कि, मैंने कहा है कि जो कुछ भी आप तक पहुँच रहा है उसकी असलियत जानिये। उसका सत्य पहचानिए। सतह पर मत रह जाइए। चीज़ वास्तव में क्या है, इस तक जाइए। तो पूछ रही हैं कि ये कैसे हो? डिकोड (समझा) कैसे करें?

श्रोता १: सर, मेरी लाइफ में बहुत सारे चिंता के विषय होते हैं जैसे मेरे परिवार में मेरे पेरेंट्स के बीच कुछ हो गया, झगड़ लिए हैं दोनों तो फिर उन दोनों को समझाना है पर वो समझ नहीं रहे । जैसे एक दोस्त है कि जा रहा है खाए…

प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते, मुझे ये समझने में बड़ी समस्या होती है कि किस पर भरोसा करूँ और किस पर न करूँ।
आचार्य प्रशांत: किसी पर भी भरोसा करने का निर्णय तुम ही करोगे न? और भरोसा नहीं करने का भी निर्णय तुम ही करोगे। तो अंततः तुमने भरोसा किस पर…
Whenever you get cheated in love, don't blame anybody else. Ask yourself, did you not have anything better to do with your life that you went and clung to a person? Read more....
I could see that he was feeling a little awkward while raising this question, even a little apologetic. You feel that maybe there is something in wrong with you that you find yourself unable to trust but let…
प्रश्नकर्ता नमस्ते सर, आज की बातचीत थोड़ी कॉन्ट्रोवर्शियल (विवादित) होने वाली है
आचार्य प्रशांत: कोई बात नहीं होती रहती है कॉन्ट्रोवर्शी।
प्र: मैं आपसे गुरुओं के ऊपर बात करना चाहता हूँ और इस पूरी बात की शुरुआत आज से दस या बारह साल पहले से होती है।
आचार्य: क्या हुआ…
छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत।। 4.42 ।।
tasmād ajñāna-sambhūtaṁ hṛit-sthaṁ jñānāsinātmanaḥ
chhittvainaṁ sanśhayaṁ yogam ātiṣhṭhottiṣhṭha bhārata
Therefore, with the sword of Realisation (of the Self) cut asunder the doubt about the Truth, born of ignorance, residing in your heart and take refuge in Yoga, arise O Bharata!
~…
Question: Trust is the foundation of all relations. Where does trust come from?
Speaker: Write down:
Belief – ImaginationTrust – FactFaith – Truth
All of these three words, belief, trust and Faith, pertain to ‘being’. They pertain to reality. Essentially all these three words are saying, ‘*something is…
Simplicity is freedom from conditioning.2. Simplicity is nothing.
Both…
Excerpt: You must realize that it is not the past actions that are putting you in prison, you must realize that actions are not necessarily good or bad. You have been given a criterion to look at those actions and that criterion is not yours. Different cultures, different people, different…
Speaker: Was it said that there is nothing called as unconditional love?
Listener: Sir, it was told that…
Question: Ashtavakra talks about being desireless, dispassionate, and egoless. A wise man is defined to possess all these virtues. But how?
Acharya Prashant: See, look at the wordings. You are saying Ashtavakra talks about being Desireless, Dispassionate, and Egoless. Mind these three words. The conclusion being drawn by the questioner…
So apparently, technically, you are there with the person; yet you clearly call it a dead relationship. When do you call it…
Acharya Prashant: The mind is such a bottomless abyss. An abyss tired of its own bareness,…
प्रश्नकर्ता: कुछ नया आता है तो उसको देख करके डर उठता है। ऐसा कैसे हो पाये कि नये को देख करके डर की जगह उत्सुकता जगे?
आचार्य प्रशांत: तुम एक घर में हो, तुम एक घर में हो आयुष (प्रश्नकर्ता) और तुम्हें अच्छे से पता है कि ये जो घर…
प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते, मुझे ये समझने में बड़ी समस्या होती है कि किस पर भरोसा करूँ और किस पर न करूँ।
आचार्य प्रशांत: किसी पर भी भरोसा करने का निर्णय तुम ही करोगे न? और भरोसा नहीं करने का भी निर्णय तुम ही करोगे। तो अंततः तुमने भरोसा किस पर…
और दूसरा प्रश्न है कि – किसी के मूलतत्त्व को देखने की कोशिश…
प्रश्न: अभी हम लोग कार में आ रहे थे तो उसमें ओशो के वचन चल रहे थे। उसमें उन्होंने कहा कि जब आप कभी ज़्यादा सोचते हो, तो आप कहीं नहीं पहुँच पाते। आप जब भी किसी चीज़ को बहुत ज़्यादा सोचोगे, तो आप किसी भी दिशा में आगे कहीं…

ISRO की हर उपलब्धि पर सभी देशवासी ख़ुशी से झूम उठते हैं। लेकिन बधाइयों के सैलाब में, और ढोल-नगाड़ों के बीच, आपने ध्यान दिया?
सारे परीक्षण जिस जगह पर होते हैं, उसे कहते हैं "सतीश धवन स्पेस सेंटर"।
ये 'सतीश धवन' जी कौन हैं? उनका क्या योगदान होगा…

भगत सिंह कहते थे "बहरे कानों तक अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए अक्सर धमाकों की ज़रूरत पड़ती है।"
लेकिन उनको कहाँ पता था कि लोगों की स्मृति इतनी कमज़ोर है कि उनके जाने के बाद वे सिर्फ़ उनका 'धमाका' ही याद रखेंगे। और उनको भूल जाएँगे, उनके संघर्ष…

🔥 “मैं तुम्हें प्यार से लूटने आया हूँ” 🔥
देश को आज़ाद हुए 4 साल ही हुए थे, और 75% आबादी कृषि संबंधित कार्यों से जीवनयापन कर रही थी।
लेकिन एक बहुत विचित्र बात थी: कृषि क्षेत्र में काम कर रहे अधिकतर लोगों के पास अपनी ज़मीन ही नहीं…

Love is great. Love is necessary. Love is beautiful.
But what is love?
For most of us, love is the greatest excitement and comfort—and also the greatest suffering. Whether love has become a problem or something you cherish the most in your life, please go deeper into the matter. Know…

अंधविश्वास या किसी दावे को केवल किताबों, परंपराओं या बड़ी-बड़ी हस्तियों के कहने से नहीं मानना चाहिए। भौतिक जगत से जुड़े हर दावे के लिए प्रमाण माँगना आवश्यक है। जो बात जाँची-परखी जा सकती है, उसे तर्क, प्रयोग और उपकरणों से जाना जाए; बिना जाने नहीं माना जाए। सच्ची जिज्ञासा वही है जो हर दावे के सामने प्रश्नचिह्न रखे और प्रमाण मिलने पर ही स्वीकार करे।

'The observer is the observed; an honest observation dissolves them both.' Or, 'The observer is the observed, and both are false.' We lay a lot of emphasis on the world, assuming it to be the Truth. If the world is an entity independent of everything, then it has to be the Truth, right? Truth is that which is independent of everything.

Questioner: When I do something my parents don’t approve of, they scold me. But sometimes the matter goes too far and I get offended, and then I refrain from talking back to them; I fear that if I say something, I will end up hurting them. But then, if I…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न युग के बारे में है। जैसे हम पढ़ते हैं, चार युग होते हैं– सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। और जो एक युग होता है उसको लगभग लाखों वर्षों का मानते हैं। जबकि एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) के अनुसार जो स्टार्स (तारों) की पोजीशन (स्थिति) है,…

प्रश्नकर्ता: आत्मा और अहंकार ये सारी इंटेलेक्चुअल लेवल (बौद्धिक स्तर) पर समझ में आती हैं। लेकिन अनुभव के स्तर पर कहीं-न-कहीं हम इनको एक तरीक़े से मान रहे हैं, जान नहीं पा रहे अन्दर से कि हम आत्मा हैं। ये परिवर्तन कैसे हो?
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं समझना होता, जीना…

Questioner: Namskar Acharya ji. Pardon me for not remembering exactly but in one of the shivirs where we had read ‘Gospel of Sri Ramakrishna’ to come to terms with this expression called ‘Adhikar Bhed.’
So therein Ramakrishna was saying that, “now in modern times there cannot be any Adhikar Bhed,…

प्रश्नकर्ता: मेरे विचार से एक व्यक्तिगत संसार होता है और एक सामाजिक संसार होता है। और मेरी आयु वर्ग में — 21 से 30 वर्ष की आयु के बीच जहाँ पर आदमी के के सामाजिक संसार को दो हिस्सों में बाँट दिया जाता है — रिश्ता (पर्सनल लाइफ़) और कैरियर…

आचार्य प्रशांत: रिलेशनशिप (सम्बन्ध) में और रिलेट (सम्बन्धित) करने में क्या अन्तर है? सवाल आप नहीं भी समझे हों तो जो बात है उस पर ग़ौर करिएगा, कुछ खुलेगा।
उन्होंने कहा, एक आईना है, आप उसमें अपनी शक्ल देखने गये और पहले से ही मन बना कर गये कि फ़लाने…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं हंसराज कॉलेज का छात्र हूँ, कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेन्ट (संगणक विज्ञान विभाग) से। मेरे मन में एक प्रश्न है, जहाँ पर मैं दुविधा से भरा हुआ हूँ, कि मेरा इस बार अन्तिम वर्ष है और मैं कॉलेज से पास आउट हो (निकल) जाऊँगा। तो मेरी फैमिली…

प्रश्नकर्ता: मेरा सवाल भावनाओं को पहचानने पर है। कुछ चार साल पहले मैंने एक वर्कशॉप अटेंड की थी, जिसका नाम था ‘सेक्रेड फेमिनिन'। उसमें कुछ ऐसी बातें सामने आईं थी जो कि मैंने पहले कभी नहीं सुनी थी।
उसमें एक स्टेटमेंट थी- ‘इमोशन इस द एज ऑफ़ वैकफुलनेस। उस टीचिंग…

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा प्रश्न विज्ञान से सम्बन्धित है। तो काफ़ी समय से वैज्ञानिक समुदाय और प्रकृति में एक तरीक़े का एक तकरार चल रहा है और काफ़ी हद तक विज्ञान सफल भी हुआ है, कोविड वैक्सीन का उन्होंने निर्माण किया और शायद प्रकृति की जो योजना थी उसको…

आचार्य प्रशांत: अगर हमारे बीच वास्तव में कोई रिश्ता है तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगा कि आप वैसे ही कोई ज़िन्दगी जी रहे हो जैसे कोई आम आदमी जीता है। मुझे अपनेआप पर और अपनी बात पर घिन आएगी। आप अगर कहते हो आप दो साल से मेरे साथ…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न मेरे वैवाहिक जीवन से है। किसी भी अन्य रिश्ते में मुझे अभिव्यक्ति करना सरल लगता है पर अपनी बातें अपनी पत्नी तक पहुँचाना बहुत ही कठिन लगता है। यह रिश्ता इतना गहरा है फिर इतनी मुश्किल क्यों?
आचार्य प्रशांत: अब तुम्हें यहाँ पर एक…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मुझे कर्म में कोई विश्वास नहीं है, भक्ति में कोई श्रद्धा नहीं है। मुझे धर्म की कोई समझ नहीं है, तो परमात्मा की कृपा मुझ पर होगी या नहीं? परमात्मा से मेरा कभी साक्षात्कार होगा?
आचार्य प्रशांत: तो अभी जैसे भी हो तुम, उससे अगर संतुष्ट ही…

प्रसंग:
भारत या इंडिया? इंडिया से नाम बदलकर भारत रखना चाहिए क्या? क्या इंडिया नाम विदेशियों ने दिया है? क्या है इंडिया और भारत का इतिहास? क्या देश का नाम बदलना आवश्यक है? कॉलोनाइजेशन और डी-कॉलोनाइजेशन क्या हैं? क्यों कहा जाता है कि भारत का कॉलोनाइजेशन हुआ है? भारत को…

एक सिद्धांत है। एक सिद्धांत क्या है? कि भाई, गाड़ी में जब पाँच-एक लीटर या दो लीटर ही फ्यूल बचे, तो गाड़ी आवाज़ कर देगी, वो सिद्धांत की बात है। आप गाड़ी को इसके लिए दोष थोड़े ही दे सकते हो। तथ्य ये है कि फ्यूल सचमुच कम है, तथ्य ये है कि आप बैठे हो या कोई भी बैठा हो गाड़ी यही कहेगी, कि “लो फ्यूल, लो फ्यूल।” गाड़ी कोई अपनी बात आपसे थोड़ी कह रही है। बात समझिए। और न गाड़ी की आपसे कोई व्यक्तिगत दोस्ती या दुश्मनी है, एक सिद्धांत है।

प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते। आपसे मैं सर्वप्रथम शास्त्र-कौमुदी नामक कोर्स (पाठ्यक्रम) के जरिए जुड़ा था, तब से मुझे वेदांत और ग्रंथों का मूल्य पता चला। मैंने प्रस्थानत्रयी का पाठ शुरू किया है, तीन महीने हो गए हैं। मुश्किल हो रही है समझने में, पर आनंद आता है। कोरोना के कारण घर…