रामायण, महाभारत को ऐसे मत देखो || आचार्य प्रशांत, आइ.आइ.टी दिल्ली में (2022)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मेरा प्रश्न युग के बारे में है। जैसे हम पढ़ते हैं, चार युग होते हैं– सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। और जो एक युग होता है उसको लगभग लाखों वर्षों का मानते हैं। जबकि एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल भौतिकी) के अनुसार जो स्टार्स (तारों) की पोजीशन (स्थिति) है, उनके आधार पर हम मानते हैं कि जो रामायण और महाभारत की घटनाएँ हैं, वो लगभग सात हज़ार वर्ष पुरानी हैं।
तो मुझे इसमें कंफ्यूज़न (असमंजस) है कि साइंस (विज्ञान) के अनुसार यह है और युग के आधार पर यह काफ़ी लंबा समय काल है।
और दूसरा, जो हम हनुमान चालीसा में पढ़ते हैं, 'युग सहस्त्र योजन पर भानू', तो उसके अनुसार जो सूर्य का डिस्टेंस (दूरी) है, वो तो साइंस के अनुसार भी एकदम ठीक बैठता है। तो सर, प्लीज मेरा डाउट (संदेह) क्लियर (दूर) कीजिए सर।
आचार्य: देखो, जो चीज़ जिस लिए हो उसका उसी दिशा में प्रयोग करना चाहिए। रामायण और महाभारत ऐतिहासिक ग्रंथ नहीं हैं, हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट्स (ऐतिहासिक दस्तावेज़) नहीं हैं। और तुलसीदास जी ने 'रामचरित मानस' इसलिए नहीं लिखी थी कि तुम इंटरप्लेनेटरी कैलकुलेशन्स (अंतरग्रहीय आकलन) कर सको।
समझ में आ रही है बात?
बात यह है कि हमें वो तो मिल नहीं रहा होता 'मानस' से जिसके लिए वो रची गई, तो हम उसमें से केप्लर्स






