अंधविश्वास या किसी दावे को केवल किताबों, परंपराओं या बड़ी-बड़ी हस्तियों के कहने से नहीं मानना चाहिए। भौतिक जगत से जुड़े हर दावे के लिए प्रमाण माँगना आवश्यक है। जो बात जाँची-परखी जा सकती है, उसे तर्क, प्रयोग और उपकरणों से जाना जाए; बिना जाने नहीं माना जाए। सच्ची जिज्ञासा वही है जो हर दावे के सामने प्रश्नचिह्न रखे और प्रमाण मिलने पर ही स्वीकार करे।
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प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा नाम मनीषा है और मैं आपके सत्रों से पाँच महीनों से जुड़ी हूँ, गीता समागम से। मेरा 10 साल का बेटा है, उसका नाम यथार्थ है। वो आज एक कहानी पढ़ रहा था कल्कि अवतार के बारे में और उसमें यह लिखा था कि पृथ्वी का अंत जब होगा, इस कलयुग का अंत जब होगा, तब कल्कि अवतार आएँगे और यह पूरी पृथ्वी जलमग्न हो जाएगी और सब कुछ नष्ट हो जाएगा। तो इससे रिलेटेड उसका कुछ डाउट है। आप पूछिए।
नमस्ते आचार्य जी। मेरा नाम यथार्थ है और मेरा डाउट था कि जैसे कि हमें पता है कि पूरी दुनिया जो है, वो नष्ट होने वाली है और पूरा जो साइकिल है कि वापस ह्यूमन बीइंग्स आएँगे और अपना सारा सिविलाइजेशन करेंगे, वो वापस होने वाला है, तो अभी ये करेंगे जब ये ख़त्म ही होने वाला है सारा, तो इससे क्या फायदा होगा? कि जैसे हम चिकन नहीं खाते और दूध पीना बंद किया है और एग्स नहीं खाना है। पोल्ट्री फार्म्स को ऐसे बंद करना है। कम पोल्यूशन करना है।
आचार्य प्रशांत: तुम्हें कैसे पता कि ये सब कुछ होने वाला है? तुम्हें कि सब नष्ट होगा ही होगा, पृथ्वी जलमग्न होगी। ये सब कैसे पता कि ये होगा ही होगा?




