अधूरी कामना क्रोध बनकर सामने आती है। दुनिया से कामना रखोगे, और जब वह तुम्हारी कामनाएँ पूरी नहीं कर पाएगी, तो गुस्सा आएगा ही। एक दूसरी कामना भी होती है, जो स्वार्थवश नहीं, प्रेमवश होती है। उसमें अपने लिए नहीं माँगा जाता। तब अगर नहीं मिलता है, तो विनम्रता आती है, क्रोध नहीं। परम लक्ष्य बनाइए; छोटे-छोटे लक्ष्यों की कामना अपने आप छूटेगी, और कामना से उठने वाला क्रोध भी छूट जाएगा।
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प्रश्नकर्ता: समटाइम्स आई स्पीक लाईक शॉर्ट टेंपर्ड (कभी-कभी मैं चिड़चिड़ा सा बोलती हूँ)। तो बीच में कई बार गुस्सा भी आता है,तो उस चीज़ को हम कैसे ओवरकम (काबू पाना) कर सकते है? है टेंपरेरी, (अस्थाई) ये कुछ समय बाद नॉर्मल (सामान्य) हो जाता है वापस, पर जितना टाईम वो गुस्सा या इरीटेशन (चिड़चिड़ापन) है वो कुछ चीज़ें मिंगल कर (उलझा) देती है। उस चीज़ से हम कैसे ओवरकम कर सकते है?
आचार्य प्रशांत: जीवन में कुछ ऐसा है जिसके कारण बीच-बीच में पटाखे बजते रहते हैं। रसोई में कुकर की सीटी क्या लगातार बजती है? बीच-बीच में ही बजती है। पर दबाव तो उसके भीतर बहुत देर से बढ़ रहा होता है न। तो क्रोध का प्रदर्शन ऐसा ही है कि कुकर की सीटी बज गई। कुकर की सीटी बज गई इसका क्या ये अर्थ है कि ठीक उसी समय कुछ हुआ है कुकर के भीतर? नहीं। अगर सीटी बजी है तो इसका मतलब पीछे काफ़ी देर से आग लगी हुई थी। कुछ उबल रहा था। दबाव, तनाव बढ़ रहा था। फिर अकस्मात सीटी बज जाती है।
तो जीवन में कुछ ऐसा मौजूद है जिसके कारण किन्हीं-किन्हीं मौकों पर क्रोध आ जाता है। और जब तक वो मूल कारण मौजूद रहेंगे, क्रोध आता रहेगा।क्रोध जानती हैं न क्या है।




