आपको लगता है कि अब आपकी चीज आपसे छिन गई, वो छिनी नहीं है, वो कहीं और पहुँची है, बिखर गई है, हजार जगह पहुँच गई है, लेकिन वो जहाँ भी पहुँची है, वहाँ पर, तो आप भी मौजूद हो। तो आपसे भिन्न कहाँ हुआ वो आपसे अलग कहाँ हुआ आपसे बिछड़ा कहाँ, वो? जो आपको दिखाई देता है कि वो जहाँ भी जायेगा वो आपको ही पायेगा। तो फिर आपको दुख थोड़े ही होगा।
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प्रश्नकर्ता: जी प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न यह था की जैसे आपने बताया की इस सूत्र, इस श्लोक में हमें अमरत्व का प्रमाण मिल रहा है। जैसे वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह भी पता चल रहा है की जैसे हमारी मृत्यु होती है, जीवन काल के दौरान भी हमारे सारे पार्ट जो होते है वो या तो जीव में स्थापित होते है, कभी कभी जड़ वस्तुओं में भी स्थापित हो जाते हैं। तो फिर इसमें अमरत्व का जो वो है उसमे क्या जड़ और चेतन में कोई फर्क नहीं किया गया है। मतलब जड़ वस्तु को भी हम…
आचार्य प्रशांत: अगर अहंकार नहीं है। तो जड़ और चेतन में कैसे फर्क हो गया? चेतन उसी को तो बोलते हो न, जो अहम अहम करे, उसको बोलते हो चेतन। जब अहम ही झूठ है तो जड़ और चेतन में अंतर कहा से आया? आगे बताइए।
प्रश्नकर्ता: एक फॉलोअप प्रश्न था वो कर सकता हूँ सर?
आचार्य प्रशांत: करो करो।
प्रश्नकर्ता:




