सपनों में भगवान मत देखो, जीवन में भगवान उतारो || आचार्य प्रशांत (2016)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सपनों में या ध्यान में किसी भी भगवान के दर्शन हो जाने को बड़ा महत्व दिया गया है, लोगों को ध्यान में शिव दिखते हैं और ऐसी बहुत कहानियाँ और भी प्रचलित हैं, ये सब क्या है कृपया स्पष्ट करें?
आचार्य प्रशांत: और शिव का भी वही संस्करण उसे दिखेगा जो आजकल प्रचलित है।आज से सिर्फ़ कुछ सौ साल पहले की शिव की अगर आप मूर्तियाँ देखेंगे तो शिव की इतनी लम्बी दाढ़ी थी(हाथ से दिखाते हुए)। वो वाले शिव उसे नहीं दिखेंगे। उसे वो वाले शिव दिखेंगे जो आजकल प्रचारित हैं।
श्रोता१: सिक्स पैक।
श्रोता२: आजकल तो शिव एनफील्ड पर आने लग गये हैं।
आचार्य: वो वाले भी दिख सकते हैं। शिव-शक्ति के आजकल जो पोस्टर हैं, वो ऐसे हैं कि सही में सपने में आयें। (श्रोतागण हॅंसते हैं)
शिव को तो बुलाना पड़ेगा, साथ में शक्ति आती हैं। ऐसी-ऐसी शक्ति बनी हुईं है आजकल, आप थोड़ा गूगल तो करिए, ‘शिवशक्ति पोस्टर्स’। देखिए, कैसे-कैसे हैं! इतनी देर से सन्त आपको और क्या समझा रहे हैं कि अन्य लोकों के चक्कर में मत पड़ो। ये जो तुमने सात सड़क बना रखे हैं, छोड़ो इन्हें! ये क्या धुआँ-धुआँ कर रहे हो? अपने रोज़मर्रा के जीवन को देखो। देखो कि पत्नी से क्या रिश्ता है, पति से क्या रिश्ता है? देखो, गाड़ी कैसे चलाते हो? देखो, नौकरी कैसे करते हो? देखो, खाना कैसे खाते हो? देखो कि कोई नयी बात सुनकर कैसे सहम जाते हो? यहाँ सत्य है। वो सात सड़क की बातें छोड़ो कि शिव से मिले और आध्यात्मिक अनुभव हो गया और घंटियाँ बजीं और प्रकाश आ गया। और यहाँ पीछे से फ़ोन बजता है तो उम्म्! (सब हँसते हैं।)






