प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो रुद्राक्ष होता है उसके बारे में जैसे बचपन में मैंने भी सुना था, घर में कहते थे कि रुद्राक्ष को मंदिर में रखते हैं तो उससे जीवन में एक सकारात्मकता आती है।
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं!
देखो, भारत एक विशेष जगह रहा है। यहाँ पर हमने एक बात को समझा है कि हम पैदा यूँ ही जानवरों की तरह उछलने-कूदने, भोगने, खाने-पीने, संतानें पैदा करने और फिर मर जाने के लिए नहीं हुए हैं। भारत ने इस बात को समझा है, तो इसलिए भारत ने जी-तोड़ श्रम किया है और जान लगाकर के ऐसी व्यवस्था बनायी कि आपको पग-पग पर ये याद रहे कि आपको यहीं पर खपकर-पचकर मर नहीं जाना है, आपको मरने से पहले एक बहुत ज़रूरी काम है जो कर जाना है। तो हर छोटी-छोटी जगह पर प्रतीक लगाए गए; वो प्रतीक समझ लो।
वो आप नोट्स लगाते हो न कई बार, कौनसे नोट्स बोलते हैं उसको?
श्रोतागण: स्टिकी नोट्स।
आचार्य: स्टिकी नोट्स। तो आप स्टिकी नोट्स बार-बार क्यों लगाते हो?
श्रोतागण: याद रखने के लिए।







