ईश्वर कौन? अवतार कौन? ब्रह्मा-विष्णु-महेश कौन? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2022)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं आपको पिछले छः महीने से सुन रही हूँ और मेरा प्रश्न पहले सत्र से जुड़ा हुआ है। तब आपने कहा था और मैं मानती भी हूँ कि जो ब्रह्म है वही सत्य है। और जो निराकार है, जिसे हम ईश्वर भी कहते हैं, सामान्य भाषा में हम ईश्वर को कहते हैं कि वो निराकार है। यहाँ तक बात समझ में आती है।
फिर हमारी जो मान्यताएँ हैं, हमारे जो शास्त्र हैं या पुराण हैं या पौराणिक कहानियों में हम जब पढ़ते हैं, तो हम उस एक शक्ति को ही तीन रूपों में देखते हैं - ब्रह्मा-विष्णु-महेश। ब्रह्मा जी, जो सृष्टि के रचयिता हैं। विष्णु, जो पालनकर्ता हैं। और महेश, जिन्हें हम शिव भी कहते हैं, जो विनाशक हैं। फिर थोड़ा और आगे आ जाते हैं सामान्य लोगों में, जिन्हें हम पूजते हैं मंदिरों में, जिनकी हमने मूर्तियाँ बना रखीं है, जिन्हें हम अवतार कहते हैं विष्णु के - श्रीकृष्ण हैं और श्रीराम हैं। और शिव को भी हम कई अलग-अलग तरीके से पूजते हैं, उनके भी मंदिर हैं, उनके शिवलिंग हैं। और फिर हमारी शक्तियाँ हैं, देवी, उन्हें भी हम पूजते हैं।
मैं ये समझना चाहती हूँ कि जो हमारे ईश्वर हैं वो फॉर्मलेस हैं, निराकार हैं, वही एक है, सत्य है, ब्रह्म है। पर फिर जब पूजने की बारी आती है तो जिन्हें हमने मंदिरों में स्थापित कर दिया है, बंद कर दिया है, उनको तो हमने एक फॉर्म बना दिया है। फिर जो ब्रह्म-विष्णु-महेश, श्रीकृष्ण, श्रीराम - जिन्हें हम पूजते हैं, इन्हें हम एक करके कैसे देखें?
आचार्य प्रशांत: नहीं, ये एक हैं ही नहीं तो कैसे करेंगे? ये तो जीवन के अलग-अलग रूपों के प्रतिनिधि हैं।
अच्छा प्रश्न है और बड़ा विस्तृत प्रश्न है, इसमें आपने सबकुछ ही पूछ लिया।






