हनुमान चालीसा का वास्तविक अर्थ || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2023)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते, सर। मैं शायद उत्तर भारत के जो करोड़ों लोग हैं, उनमें से ही एक हूँ जिन्हें बचपन से ही हनुमान चालीसा सुन-सुन कर याद हो जाती है या याद करा दी जाती है। पर मैंने देखा कि हाल ही तक ही मुझे हनुमान चालीसा की जो चौपाइयाँ हैं, उनका सरल हिंदी अर्थ था, वह भी नहीं पता था। पर मैंने जब जानना चाहा, पढ़ा, थोड़ा-बहुत समझ आया। पर मैं आज चाहता हूँ कि आप उसका वेदान्तिक अर्थ समझाए। तो मैंने कुछ उसमें से चौपाइयाँ देखी, वो मुझे लगा कि आपसे आज वो पूछनी चाहिए। यदि आप उस पर बात कर सकें तो…?
आचार्य प्रशांत: कुछ ही चौपाइयां लीजिएगा, चालीस चौपाइयाँ हम नहीं ले पाएँगे। मैं देख रहा हूँ पूरी चालीसा आपने यहाँ मेरे समक्ष रख दी हैं। तो जो उसमें से विशेष लग रही हों, या अति महत्वपूर्ण लग रही हों आप उनको ही लें। क्योंकि हनुमान चालीसा में तो दोहे हैं दो-तीन और चालीस चौपाइयाँ हैं। सब ले पाना तो…। पर बताइए शुरू करिए।
प्र: जो पहली चौपाई है, मैं उससे शुरुआत करना चाहूँगा।
'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।'
आचार्य: देखिए! हनुमान जी के सगुण चरित्र ने मुझे बचपन से ही बड़ा आकर्षित करा। और हिन्दू घर में था, वहाँ तमाम देवी-देवताओं से परिचय हो ही जाता है। पर सबसे ज़्यादा मुझे खास लगे हनुमान जी ही। उनके प्रति एक प्रेम रहा और हनुमान चालीसा का पाठ भी मैं नियमित रूप से किया करता था। कई सालों तक करा जब छोटा था, फिर छूट गया। तो तब जब पढ़ता था तो अर्थ नहीं स्पष्ट था कि जय हनुमान ज्ञान गुण सागर माने क्या?
फिर वेदांत जीवन में आया और वह सब संत आए जिन्होंने राम के गुण गाए हैं, निर्गुण के गुण गाए हैं। तो राम से फिर एक अलग अर्थ में परिचय हुआ। आप अगर समझना चाहते हो कि हनुमान चालीसा में क्या कहा जा रहा है, तो उससे पहले आपको समझना पड़ेगा कि हनुमान के आराध्य श्री राम कौन हैं। और वह अगर स्पष्ट नहीं होगा तो…। हनुमान चालीसा का बहुत पाठ किया जाता है, मैंने भी करा है बचपन में। हम पाठ तो करेंगे, पर उसके मर्म से वंचित रह जाएँगे।








