सौ बार गिरे हो, तो भी याद रहे: स्वभाव अपना उड़ान है, घर अपना आसमान है

टूटफूट ही वो जरिया है जो आपको बताएगा कि आपके पास कुछ ऐसा भी है जो टूट नहीं सकता। जब सब बिखरा पड़ा होगा उसके बीच ही अचानक आपको पता चलेगा, अरे एक ऐसी चीज है जो नहीं बिखरी बड़ा मजा आएगा। उसके बाद यही लगेगा कि इसको और बार-बार पटको और जितना बार-बार पटको और जितना यह नहीं टूटता उतना इसमें विश्वास और गहरा होता जाता है और आदमी और खुलकर खेलता है। यह सबके पास है। यह सबके पास है। हमें इसका पता इसीलिए नहीं है क्योंकि हमने इसको कभी आजमाया ही नहीं।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
आचार्य प्रशांत: आज का सत्र होने तो बोध स्थल में वाला था। फिर आनन-फानन में यहां की व्यवस्था की गई। अब आधी रात को तो कोई अपना ऑडिटोरियम देने को तैयार होगा नहीं। तो येन केन प्रकारेण साम दाम दंड भेद; साम दाम दंड भेद में दाम ही ज्यादा। इसको आधी रात को खुलवाया गया है अच्छा लग रहा है। बस एक बात का थोड़ा खटका था कि सबकी वापस लौटने की व्यवस्था है पूरी? आज की रात हो-हुलड़ रहेगा काफी। बेवजह नहीं रहता है मेरा।
संस्था की दो लड़कियां भी आ रही थी स्कूटी से। उन्हें टक्कर मार दीया है किसी ने। एक को मामूली चोट है एक को शायद फ्रैक्चर होगा पांव में। हम जिस जगह पर हैं वहां मैं थोड़ा सा घबराया करता हूं। सब कुछ बहुत फ्रजाइल है। किसी किस्म का बड़ा आयोजन या रिस्क, अभी पूरी व्यवस्था ऐसी नहीं है कि झेल सके। चलिए अच्छा लग रहा है।
आज वर्ष 2024 का अंतिम दिन भी है, अंतिम सत्र भी है, अंतिम रात भी है और आखिरी दो घंटे भी हैं। और और किसी बात को भी आज गजब संयोग है कि श्रीकृष्ण अंत की ओर ले जा रहे हैं। किस बात का अंत कर रहे हैं? अपने आप को प्रकृति से दुनिया से संबंधित मानने का। अपने आप को संसार पर आश्रित मानने का।
कह रहे हैं तुम वो हो जिस पर तुम्हारे किसी भी कर्म का, किसी भी भाव का, किसी भी रूप का कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता। बहुत तुमने ऊंच-नीच करी होगी जीवन में अपनी दृष्टि में, पर तुमने जो कुछ भी करा है उस उसका तुम्हारी सच्चाई पर कोई असर नहीं होता। दुनिया के लिए, दुनिया के संबंध में, दुनिया की दृष्टि में तुम बहुत बड़े ज्ञानी हो सकते हो। इससे तुम्हारी आत्मा और विस्तृत नहीं हो जाएगी। और जगत में हो सकता है तुमने बड़ी गलतियां कर दी हो, पाप कर दिए हो, बहुत तुमने संकुचित जीवन जिया हो, बहुत अपनी संभावनाओं का गला घोटा हो लेकिन उससे भी तुम्हारी संभावना जरा भी दूषित कलुषित नहीं हो जाएगी।









