भारत आज भी अंधविश्वास से ग्रस्त क्यों – मूल कारण || आचार्य प्रशांत, गीता दीपोत्सव (2023)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी! पहले मैं सोशल मीडिया पर ज़्यादा सक्रिय नहीं था। लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय आने के बाद, मैं थोड़ा ज़्यादा सक्रिय हो गया हूँ। तो मैं देखता हूँ, सोशल मीडिया पर आजकल बहुत सारे बाबा लोग हैं, जो अपना आधिकारिक ऐप बना लिये हैं। और ऐड के माध्यम से प्रचार कर रहे हैं, कि वो हमारी जन्म कुंडली देखकर, हमारा ग्रह-नक्षत्र देखकर, हमें बताएँगे कि हम किससे प्रेम करते हैं। हमारा शादी कब और किससे होगा। हमें नौकरी कब मिलेगा। आपसे सीखा है कि ये सब अन्धविश्वास है। कोई जोड़ा पूर्व में निर्धारित नहीं होता। तो फिर सरकार इन्हें बैन क्यों नहीं करती अगर यह अन्धविश्वास है तो?
आचार्य प्रशांत: अरे बाबा! क्या पूछ रहे हो? वही अज्ञान जो इन बाबाओं को ज़िन्दा रखे हुए है, उसी अज्ञान के आधार पर तो आज़ादी के बाद से आज तक सरकारें बनती रहीं हैं न। अज्ञान अगर इसलिए हटा दिया कि ये बाबा लोग झाड़फूँक और जन्तर-मन्तर और भविष्य और अतीत और ये सब नाटक कर रहे हैं, इस नाते अगर अज्ञान हटा दिया, तो सरकारें भी तो गिर जाएँगी। अगर शिक्षा पर ध्यान दिया ही गया होता तो दो बातें होतीं। भारत में उन्नीस-सौ-सैंतालीस के बाद से जो सबसे बड़ा अपराध हुआ है, वो ये है कि हमने शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया।
भारत के साथ ही पूरा जो दक्षिण-पूर्व एशिया था, वो आज़ाद हुआ था। चीन भी लगभग उसी समय, जापान की भी दुर्गत हुई थी, उन्नीस-सौ-पैंतालीस में तो उसकी भी हालत ख़राब हो चुकी थी। कोरिया की भी हालत ख़राब थी। और ये जितने आपके इधर के देश हैं, साउथ-इस्ट, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, कम्बोडिया ये सब लगभग एक समय पर ही अपनी यात्रा शुरू कर रहे थे। सब के सब, फिलीपीन्स।
इनमें और भारत में अन्तर क्या रहा है? इनमें और भारत में अन्तर ये रहा कि भारत ने शिक्षा को सबसे कम क़ीमत का समझा। आज़ादी के बाद के दशकों में, शिक्षा के बहुत ज़बरदस्त कुछ स्तम्भ खड़े भी किये गए, तो वो उच्च शिक्षा में थे। उच्च-उच्चतर शिक्षा में थे। हम आइआइटी (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी), आइआइएम (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट) वगैरह का नाम लेते हैं। हम



