
डॉ. अंबेडकर के काम का कैनवस बड़ा विस्तृत है। वो दिल से कोई राजनीतिक नहीं थे — खरे इंसान थे, दो टूक बात करने वाले। उनकी शुरुआत अर्थशास्त्र से हुई, फिर एडमिनिस्ट्रेशन, एकेडमिक्स, लीगल प्रैक्टिस, इन्वेस्टमेंट कंसल्टिंग — राजनीति में आने से पहले उन्होंने सारे द्वार खटखटाए हैं। अंबेडकर की प्राथमिक लड़ाई धार्मिक रूढ़िवादिता के खिलाफ थी। फिर दलितों, महिलाओं, गरीबों, युवाओं के लिए काम करना — उसी लड़ाई के अलग-अलग मोर्चे हैं।




प्रश्नकर्ता१: आचार्य जी, थैंक यू अपना समय देने के लिए, हम सभी को। तो हम सभी यहाँ पर आपस में एक विषय पर स्पेशली हाल ही में जो तीन घटनाएँ घटी हैं उनके ऊपर चर्चा कर रहे थे, और चर्चा करते वक़्त हमने यह पाया कि वो जो घटनाएँ हैं

आचार्य प्रशांत: ध्यान की तीन बेहतरीन विधियाँ हैं। हज़ारों हो सकती हैं, इसमें ये तीन सर्वश्रेष्ठ हैं। पहला — जप; जप का अर्थ है दोहराना, रिपिटिशन, ताकि भूलें नहीं, लगातार याद रहे,


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक चैप्टर पढ़ा ‘सम्बन्ध’ पुस्तक से, उसमें एक चीज़ थी जो समझ नहीं आई, 'हमारे रिश्ते ख़राब इसलिए होते हैं क्योंकि वो हमारी अपूर्णता से निकलते हैं'। पूरा जीवन जब सम्बन्ध ही है और अकेले हम रह नहीं पाते, अकेलापन महसूस भी होता है। तो फिर यह



There was a certain ascetic who was one of the great saints of Bestam. He had his own followers and admirers, and at the same time, he was never absent from the circle of Bayazid al-Bistami (or Abu Yazid al-Bistami). He listened to all his discourses and sat with his

एंटरिंग द फ़ॉरेस्ट ही मूव्स नॉट ऑन द ग्रास
जैन धर्म का अनेकांतवाद या स्यादवाद, अहिंसा की बुनियाद है। मैं दूसरे के विपरीत तभी खड़ा होऊंगा जब मुझे अपनी हस्ती में दृढ़ विश्वास होगा — और यही बड़ा विश्वास ही हिंसा है। अनेकांतवाद का अर्थ है: कुछ भी पूरी तरह पक्का या निश्चित नहीं। जब कुछ निश्चित नहीं, तो दूसरे को गलत कैसे ठहराएं? और जब दूसरे को गलत नहीं ठहरा सकते, तो उनके प्रति हिंसक कैसे हो सकते हैं? अनेकांतवाद अहंकार की जड़ पर चोट करता है। दूसरे के प्रति तुम हिंसक तभी हो सकते हो, जब कहोगे — मैं सही, दूसरा गलत।
आचार्य नागार्जुन की जीवन कथा का आंरभिक विवरण चीनी भाषा में उपलब्ध है, जिसे क़रीब 405 ई. में प्रसिद्ध बौद्ध अनुवादक कुमारजीव ने उपलब्ध कराया। यह अन्य चीनी एवं तिब्बती वृत्तांत से सहमत हैं कि नागार्जुन दक्षिण भारत में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। ऐतिहासिक रूप से बचपन की…
आचार्य प्रशांत: देखते हैं दुनिया को; उसमें पहली डुएलिटी (द्वैत) तो पैदा होने के साथ ही आ जाती है। पहली डुएलिटी है कि — ये मैं हूँ और ये रहा संसार, और ये दोनों अलग-अलग हैं। पैदा होने के कुछ ही समय बाद शरीर का बोध आ जाता है, और…
दूसरा, इस बात…
श्रवणादिभिरुद्दीप्तज्ञानाग्निपरितापितः । जीवः सर्वमलान्मुक्तः स्वर्णवद्द्योतते स्वयम् ॥
हृदाकाशोदितो ह्यात्मा बोधभानुस्तमोऽपहृत् । सर्वव्यापी सर्वधारी भाति भासयतेऽखिलम् ॥
दिग्देशकालाद्यनपेक्ष्य सर्वगं शीतादिहृन्नित्यसुखं निरंजनम् । यः स्वात्मतीर्थं भजते विनिष्क्रियः स सर्ववित्सर्वगतोऽमृतो भवेत् ॥
जब जीव श्रवण आदि द्वारा प्रज्वलित ज्ञानाग्नि में भलीभाँति तप्त होता है, तो वह साड़ी मलिनताओं से मुक्त होकर स्वर्ण की…
ज़ेन कोआन: मोकुसेन का हाथ
मोकुसेन तांबे के घर में रहते थे। एक अनुयायी ने एक दिन मोकुसेन को अपनी पत्नी के कंजूस व्यवहार के बारे में बताया। मोकुसेन उस अनुयायी के घर गए और उसकी पत्नी को अपनी बंद मुट्ठी दिखाई।
अनुयायी की पत्नी ने आश्चर्य से पूछा, “इसका…
एंटरिंग द वाटर ही मेक्स नॉट अ रिप्पल
~ जेनरिन कुशु
वक्ता: यही जीवन जीने का तरीका है। एक कविता है, बड़ी खूबसूरत है, जो बिलकुल ऐसे ही है कि किसी के कमरे में प्रवेश करना हो और चाहे किसी के…