एक पुजारी जो रोज़ भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र और वशीकरण के नाम पर आए लोगों से मिलता है, आचार्य प्रशांत से पूछता है: जब वो ख़ुद जानता है कि कुछ भूत-चुड़ैल नहीं होता, तो लोग बार-बार इसी झूठ की शरण में क्यों जाते हैं? जवाब अंधविश्वास से कहीं गहरा निकलता है — यह हमारे भीतर के उस झूठ की कहानी है, जिसे हम हर कीमत पर बचाना चाहते हैं।
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प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा नाम अभिषेक महाराज है, अभिषेक शुक्ला। लोग मुझे अभिषेक महाराज कहते हैं। मैं एक देवी मंदिर में मुख्य पुजारी हूँ और मैं वहाँ पर कर्मकांड और देवी अनुष्ठान करता हूँ। कई लोग मेरे पास में आते हैं, कई प्रकार की समस्याएँ लेकर के आ जाते हैं, जिसमें बहुत सारी बाधाएँ होती हैं कि भूत-चुड़ैल लग गए हैं। कोई बहुत सारे वशीकरण करने के लिए आ जाते हैं कि प्रेमी के ऊपर, प्रेमिका के ऊपर, पत्नी के ऊपर, पति के ऊपर। मुझे पता होता है कि ऐसा कोई भूत-चुड़ैल वग़ैरह है नहीं। लेकिन फिर भी मुझे उनके तल पर जाकर के उनके अंधविश्वास को अंधविश्वास से ही काटना होता है।
आचार्य जी, एक केस आया था। उनका बच्चा मंदबुद्धि है। शरीर तो विकसित है, लेकिन दिमाग़ छोटा-सा है। वो उत्तर प्रदेश में एक बाबा जी के पास में दिखाया था उसको। तो उनको लगा मन में कि हमारे बच्चे के ऊपर कुछ ऐसा है। तो वो बाबा के पास में लेकर गए, तो बाबा ने कहा कि “हाँ, इसके साथ में जब तुम आठवें महीने गर्भवती थी, तब तुम्हारी भाई की पत्नी ने तुम्हारे ऊपर तांत्रिक क्रिया करी थी। उसका परिणाम है कि इसका मस्तिष्क का विकास नहीं हो पाया। और ये तंत्र के कारण ऐसा हुआ है और ये तंत्र से ही सीधा हो जाएगा, हम सीधा कर देंगे।” उन्होंने ₹35 लाख उनसे ले लिए और वह ठीक नहीं कर पाए।
हम अब हमारे पास में उसको लेकर के आए, तो हमने सीधे दिल तोड़ने वाली बात बोली, क्योंकि कुछ डॉक्टर हैं, जिनसे हमने कुछ सुना है कि कुछ 23 क्रोमोसोम पुरुष के, स्त्री के कुछ मिलते हैं और कुछ मिसिंग होते हैं, तब ऐसे बच्चे पैदा हो जाते हैं। मैंने कहा कि इसकी कुछ




