मन पर बाहरी प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन जीवन का संचालन उन प्रभावों से नहीं, अपने विवेक से होना चाहिए। जानकारी बाहर से आती है, पर उसे समझना, परखना और सही निर्णय लेना हमारी आंतरिक क्षमता है। जो व्यक्ति अपने विवेक को जागृत रखता है, वही विचारों का स्वामी बनता है; अन्यथा वह केवल परिस्थितियों और दूसरों की धारणाओं का अनुयायी बनकर रह जाता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्वेश्चन नहीं है, एक ऑब्जरवेशन है। तो फाउंडेशन बहुत सारे वीडियोज़ इंस्टाग्राम पर डालती है और हम जो सोशल मुद्दे होते हैं उस पर भी डालते हैं। तो जो नॉर्मल वीडियोज़ होते हैं, उसमें दो सौ से पाँच सौ कमेंट्स आते हैं। और जब ये सोशल मुद्दों वाले कमेंट्स होते हैं कोई-कोई, तो उसमें करीबन दस हज़ार कमेंट्स आ रहे हैं। सौ से दो सौ डायरेक्ट मैसेजेस आ रहे हैं। और जो जेन ज़ी हैं, वो ही सबसे ज़्यादा ये कमेंट्स और डीएम्स कर रहे हैं।
वो लिखते हैं कि, "अरे, हम तो बहुत ही डिसअपॉइंटेड हैं कि कुछ किया नहीं गया है या कुछ कर नहीं रहे हैं। तो प्लीज़, प्लीज़, प्लीज़, प्लीज़ कुछ करिए।" और मतलब, ये जो मैं बोल रही हूँ, वो एक-दो कमेंट्स नहीं हैं। दस हज़ार कमेंट्स आए हैं।
आचार्य प्रशांत: “देश की हालत बहुत ख़राब है।




