People and Society

भारत में इतना भ्रष्टाचार क्यों?
भारत में इतना भ्रष्टाचार क्यों?
11 min
जिसको जितना होता है, उतना पूरा नहीं लग रहा। हर आदमी अपनी चादर थोड़ा और फैलाना चाहता है, बस यही बात है। साधारण-सी चीज़ है कामना, कामना पूरी करने के लिए अगर इधर-उधर के तरीकों का इस्तेमाल करना पड़े, तो आदमी कर लेता है। उसमें दो चीज़ें होती हैं, एक तो जो आपकी व्यवस्था है या तो वो इतनी साफ़, सही और सख़्त हो कि वो गुंजाइश ही न छोड़े अवैध या अनैतिक तरीकों की, तो भी भ्रष्टाचार नहीं होगा।
भारत को बदलना चाहते हो?
भारत को बदलना चाहते हो?
7 min
भारत कोई ज़मीन का टुकड़ा तो है नहीं। जैसे भारतवासी आज के हैं, आज का भारत भी वैसा ही होगा। यहाँ हवा गंदी है, क्योंकि भीतर से हम गंदे हैं। सड़कों पर गड्ढे हैं, क्योंकि हम गड्ढे हैं। बाहर जो कुछ होता है, वो आपके भीतरी जगत का प्रतिबिंब होता है, एक अर्थ में। इंसान जगेगा, तो ये नज़ारा बदलेगा। जो तुम्हारी वास्तविक हालत है, उसको आँखें खोल करके देखो। उसको देख लोगे, तो फिर उससे आगे निकलने का रास्ता मिल जाएगा।
Objectifying Women with Her Consent: Acharya Prashant on Women Empowerment
Objectifying Women with Her Consent: Acharya Prashant on Women Empowerment
9 min

Questioner: All the forms of multimedia, the film industry and advertisements, have presented images of both sexes that are very often unrealistic and debatable. The very quality of femininity has been portrayed in the film industry, ironically, as victimizing them, merely pretty faces, and sidekicks. Why do you think women

तुम सुविधा और सुरक्षा चाहते हो, इसीलिए लोग तुम्हें दबाते हैं (झुकना छोड़ो!)
तुम सुविधा और सुरक्षा चाहते हो, इसीलिए लोग तुम्हें दबाते हैं (झुकना छोड़ो!)
31 min
सामंजस्य, एडजस्टमेंट नहीं कर लेना चाहिए। जहाँ किसी तरीके से झुकना भी पड़े, दबना भी पड़े, डरना भी पड़े, वहाँ कम से कम अपने लिए नापसंद तो उठे। इतना तो हो कम से कम। मेरे भी थे ऑफिस में लोग, जिनको न चाहते हुए भी ‘सर’ बोलना पड़ता था। बहुत लंबे समय तक नहीं बोला, पर जितने समय तक बोला, उतने समय तक बोलना भी ऐसा था कि सिर भनना जाए।
बलात्कार और हमारा आक्रोश
बलात्कार और हमारा आक्रोश
10 min
किसी महिला को पढ़ाई, नौकरी, खेल से वंचित कर दिया गया, यह अत्याचार नहीं है क्या? पर इन अत्याचारों को तो हम अत्याचार मानते ही नहीं। चूँकि हमने महिला की पूरी आइडेंटिटी को उसकी सेक्सुअलिटी से ही बाँध दिया है। उसी का नतीजा यह होता है कि कहीं पर भी दंगा-फसाद हो, उसमें महिलाओं का बलात्कार अक्सर देखने को मिलता है। लेकिन महिला सिर्फ अपने जेंडर या सेक्स से तो आइडेंटिफाइड नहीं होती न! हमें उसके व्यक्तित्व के बाकी आयामों को भी सम्मान देना सीखना होगा।
क्या हिन्दू धर्म पिछड़ा हुआ है?
क्या हिन्दू धर्म पिछड़ा हुआ है?
39 min
समसामयिक हिन्दू धर्म पुराणों, स्मृति ग्रंथ और स्थानीय क़िस्म की परंपराओं पर चल रहा है। वो हिन्दू धर्म है ही नहीं। हिन्दू धर्म से अगर हमारा आशय है वेदों के दर्शन पर आधारित धर्म, तो हिन्दू धर्म न अगड़ा है, न पिछड़ा है; हिन्दू धर्म एकमात्र धर्म है। धर्म तो एक ही है, ये जो दुख में बैठा हुआ है, इसका दुख दूर करना। बाक़ी सब कुछ किसी धर्म, पंथ, मज़हब में हो रहा हो, वो सब अंधविश्वास है। हिन्दू धर्म कहता है, “वो है कौन जो दुःखी है? प्रश्न करो, और प्रश्न का जवाब परंपरा नहीं, प्रयोग देगा।”
राजनीति में अध्यात्म क्यों ज़रूरी?
राजनीति में अध्यात्म क्यों ज़रूरी?
9 min
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।
What Makes India Worth Loving?
What Makes India Worth Loving?
9 min
For most people, India is just a bit of land, a boundary on the global map, a political entity. These are not things you can fall in love with. To love, there must be something sacred, something worth worshipping. The identity of India, the root of the Indian nation is essentially spiritual. India has been a nation because of its Vedantic foundation.
नयी पीढ़ी धर्म से दूर क्यों?
नयी पीढ़ी धर्म से दूर क्यों?
16 min
गीता की ब्रांडिंग एक लोकधार्मिक बुक के रूप में हो गई है। तो ये जो जेन-ज़ी है, जब लोकधर्म को ठुकराती है, तो लोकधर्म के साथ-साथ गीता को भी ठुकरा देती है। थ्रोइंग द बेबी अवे विद द बाथ-वॉटर। तो उनके लिए गीता, पुराण सब एक है। और जो चलती है, रावण संहिता उनके लिए वो सब एक है।
Are You Truly Religious?
Are You Truly Religious?
10 min
If you are religious, then shouldn’t you be truly religious? Religion is about a total commitment to the Truth. You’ll have to recognize that the objective of religion is not to attain heaven, not to please a holy figure, but to come to your own inner Truth. All good books exist to awaken your consciousness. When it comes to you and the Truth, do you want somebody in between? And wherever you spot fakeness, falseness, hollowness or ignorance, drop it.
The Roots Of Indian Philosophy
The Roots Of Indian Philosophy
8 min
There is a search within the human being, always for the greatest, the absolute, and that is what differentiates humans from animals. India was fertile, and there was abundance. You had ample leisure, and in that leisure there was space for intellectual inquiry. The sages and the seers would talk to each other purposelessly. And from that purposeless discussion, from silent observation of life for hours, days, months, and years, came those insights that you today recognize as Indian philosophy.
Martyr's Day Wisdom
Martyr's Day Wisdom
5 min
Death is already happening moment by moment. Why think that it is there somewhere in the future? We are all going in the same direction: a journey towards death. You cry not at the fact that somebody died, but at the fact that life was not lived fully. We have had a mystic who said that death should be celebrated. When everything about this man was joyful, how can his death be painful? There would be no reason to cry; death can be celebrated.
जीडीपी बढ़ी, क्या जीवन सुधरा?
जीडीपी बढ़ी, क्या जीवन सुधरा?
25 min
टोटल जीडीपी हमारा इसलिए हाई नहीं है कि भारत अमीर हो गया है। वह इसलिए हाई है क्योंकि यहाँ जनसंख्या बहुत है और मुट्ठी भर लोग हैं, जिनके पास अंधाधुंध दौलत है। पॉल्यूशन और पॉपुलेशन, इनका चोली-दामन का साथ है। तुम्हें बहुत कम जगह मिलेंगी जहाँ पॉपुलेशन नहीं है, पर पॉल्यूशन है। इतने लोग हो जाएँगे, कैसे उनको गरिमा की ज़िंदगी मिल सकती है? न हमें वह ग़रीबी चाहिए, जिसमें एक ऐसे 8×8 के क्षेत्र में चार लोग रह रहे हों। न वह अमीरी चाहिए कि एक आदमी कार में चल रहा है और दुनिया भर पर धुआँ छोड़ता हुआ चल रहा है। सस्टेनेबिलिटी चाहिए।
How to Make India Invincible?
How to Make India Invincible?
13 min
India was a superpower in all possible terms and yet those lowly little Britons came here and colonized us. Is it possible? There is something fishy in the story. We don't want to go back and really read and figure out what really happened. We believe in this narrative: we were great, we were ‘Vishwaguru’. How can the land of the Gita be ever defeated? It was due to internal reasons that we got defeated and enslaved. And those reasons are still very much present today. Which means the fault is entirely our own.
भारत का संविधान क्यों ऊँचा है?
भारत का संविधान क्यों ऊँचा है?
17 min
लोगों को लगता है, संविधान तो हमारा दुनिया के बाकी कॉन्स्टिट्यूशन से इंस्पायर्ड है; नहीं, तुम्हारा संविधान तुम्हारी मिट्टी से उठा है। जिस देश के केंद्र में आत्मा हो, वहाँ लिबर्टी, इक्वलिटी, फ्रेटरनिटी अपने आप आ जाती हैं। फ्रीडम, जो कि उच्चतम आध्यात्मिक बात होती है, देखिए आपका संविधान उसको कितना महत्व देता है। भारत इस अर्थ में थोड़ा-सा विशेष राष्ट्र है। भारत का संविधान उदार है, ऊँचा है। क्योंकि हम आध्यात्मिक लोग थे, इसलिए हम इतना उदार संविधान अपना पाए।
असमानता का वास्तविक कारण
असमानता का वास्तविक कारण
17 min
एक कागज़ पर समानता शब्द लिख भर देने से समानता नहीं आ जाएगी। जो समानता के आदर्श को पसंद करते हों, उनकी बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वो समझें, सर्वप्रथम, कि असमानता, भेद कहाँ से आते हैं। वो आते हैं, अहम् से। अहम् विभाजन पर पलता है। उसको जीने के लिए सीमाएँ चाहिए, वर्ग चाहिए, कुछ ऊँचा, कुछ नीचा चाहिए। सिर्फ़ आत्मा वो बिंदु है, जहाँ सब एक और एक समान हैं। इसीलिए, अगर भारत को या दुनिया के किसी भी राष्ट्र को समानता चाहिए, तो उसे आत्मिक होना पड़ेगा।
Why Wisdom Comes Last in Democracy?
Why Wisdom Comes Last in Democracy?
7 min
You see, the democratic system is a great one, but there are some problems associated with it. The leader comes from the masses, and the masses, by themselves, are never really attracted to wisdom. Have you ever found a voter asking his leader, “How many Upanishads have you read?” before casting a vote. The leaders know very well what they can ignore. They just want to know what your religion is, and what your caste is. That is why wisdom always comes last.
शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चूक
शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चूक
8 min
दुनिया के बारे में तो तुम्हें वर्तमान शिक्षा व्यवस्था ही खूब पढ़ा देती है। तुम कौन हो, कैसे हो, मन क्या चीज़ है, इसके बारे में कुछ नहीं बताती। तो इसीलिए अपूर्ण है ये व्यवस्था। देखो कि बच्चे को उसका सारा मानसिक भोजन कहाँ से मिल रहा है। तुम्हें बच्चे को कुछ नया सिखाने की ज़रूरत तो है, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा बड़ी ज़रूरत है उन सब रास्तों को रोकने की, जिनसे ज़हर बच्चे में प्रवेश करता है। जो-जो कर सकते हो, सब कुछ करिए। यही वास्तविक अध्यात्म है, यही वास्तव में पुण्य का काम है।
वेदांत से उपजा सुभाष चंद्र बोस का संघर्ष
वेदांत से उपजा सुभाष चंद्र बोस का संघर्ष
54 min
सुभाषचन्द्र बोस के जीवन में वेदान्त कितना केंद्रीय था, ये बात आमतौर पर सामने नहीं आती है। उनका मन सदा संघर्ष की ओर था। उपनिषद उनके जीवन में आए, और एकदम एक नई शुरुआत हो गई। वो भयानक विद्रोही हो गए थे, और संघर्ष से नीचे वो कोई चीज मानते नहीं थे। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा, ऐसे ही कोई ड्रेस पहन के खड़ा हो जाता है, नेताजी कहला जाता है, ऐसा नहीं होता। जान पर खेलना पड़ता है; किसी और से खून मांगने से पहले अपना खून बहाना पड़ता है। इसको साधना बोलते हैं। वेदान्त ये साधना सिखाता है।
Online Pooja, e-Darshan and Cyber Prasadam : Babaji Blows Digital
Online Pooja, e-Darshan and Cyber Prasadam : Babaji Blows Digital
13 min
This has always been a hugely profit-making sector of all economies, just that it has always been a small sector controlled by the priestly class. Now the attempt is to make this sector really big and on an organized scale, because the profits are very tempting, and there is no quality control. There can be no external auditor. All kinds of objections, audits, and scrutinies are ruled out. Getting it? So it’s a very tempting sector.
वेदान्त का राष्ट्रवाद से क्या सम्बन्ध? क्या राष्ट्रवाद विषैला नहीं?
वेदान्त का राष्ट्रवाद से क्या सम्बन्ध? क्या राष्ट्रवाद विषैला नहीं?
24 min
“क्या राष्ट्रवाद एक बीमारी ही नहीं है?” उस सवाल को अब आप ज़रा दूसरे तरीके से रखिए। वो सवाल ये है, कि क्या आदमी और आदमी के संबंध बीमार नहीं हैं? तो होगा राष्ट्र दस करोड़ लोगों का, चाहे सौ करोड़ लोगों का, लेकिन उसके केंद्र में तो उसके एक-एक सदस्य की, व्यक्ति की आत्म-परिभाषा बैठी हुई है। जो आप अपने बारे में सोचते हैं, उसी आधार पर आप दूसरे संबंध बनाते हैं, और उसी आधार पर फिर आप व्यापक, विस्तृत तौर पर एक राष्ट्र खड़ा कर लेते हैं।
If Not Surrender, Then How to Reach Shri Krishna
If Not Surrender, Then How to Reach Shri Krishna
13 min
Shri Krishna is saying: the mind is conditioned to move towards objects and perceive only their surface, periphery, or form. Develop the practice of penetrating further. Let Truth be your practice. The moment you would look at something, and you are in no position not to look at things being embodied, you would look at things. Nobody said that you have to practice lust. Lust just comes. You might be a total fool, an utter retard, and still you will find yourself getting sexually excited once you reach a particular age. Did you need some practice? No, you didn’t. It just happened. But if you are to understand lust, if you are to cross over, if you are to be a master of your body, then it will require a lot of practice, and that will necessarily and obviously tell you about your predicament.
आपका शोषक ही, आपका रोल मॉडल है
आपका शोषक ही, आपका रोल मॉडल है
30 min
आप आज के कैपिटलिस्ट को रोल मॉडल क्यों बोलते हो? अगर यह रोल मॉडल है, तो अंग्रेज़ भी रोल मॉडल हैं। द ब्रिटिश एंपायर वाज़ द बिगेस्ट कैपिटलिस्ट ऑफ़ इट्स टाइम। कैपिटल अपने आप में बुरी नहीं है। पर तुम्हारे भीतर एक बेहूदा अंधकार है, जिसमें तुम पैसा ठुँसे जा रहे हो। तुम दुनिया की आधी प्रजातियाँ ख़त्म करके खा चुके हो। तुम अब पूरी पृथ्वी को खा जाओगे, फिर भी तुम्हारा पेट नहीं भरेगा। आप एक्सप्लॉइटेड हो क्योंकि आप ख़ुद वैसा ही बनना चाहते हो जैसा आपका एक्सप्लॉइटर है। आपका एक्सप्लॉइटर ही आपका रोल मॉडल है।
ईरान विरोध प्रदर्शन: सिस्टम वही, समाधान अलग कैसे?
ईरान विरोध प्रदर्शन: सिस्टम वही, समाधान अलग कैसे?
9 min
दुनिया में जहाँ भी दक्षिणपंथ है, राइट-विंग मूवमेंट्स जहाँ-जहाँ चल रहे हैं, वहाँ-वहाँ लोकतंत्र कमज़ोर पड़ रहा है। ईरान में भी अब यही चल रहा है। यह एक तरह से माया का चक्र है। यह सोचा जा रहा है कि लिबरल-सेकुलर होने से हटकर के हम जब कंज़र्वेटिव, ऑर्थोडॉक्स इस्लामिक हुए, तब समाधान मिल जाएगा; और उससे वापस घूम करके फिर से लिबरल-सेकुलर हो जाएँगे, तब समाधान मिल जाएगा। मनुष्य यह मानने को ही तैयार नहीं है कि व्यवस्था आती रहेगी, जाती रहेगी। उसकी समस्या का मूल कारण उसके भीतर है।
हिंदी की ये हालत किसने की?
हिंदी की ये हालत किसने की?
17 min
भाषा तो उतनी ही सशक्त हो पाएगी, जितने शक्तिशाली उसको बोलने वाले लोग हैं। हिंदी नहीं पीछे हट गई है; हिंदी बोलने वाले सब कायर हैं। इनको अपनी हस्ती पर ही शंका होनी शुरू हो जाती है, जब सामने कोई अंग्रेज़ी बोल देता है। विचार और चेतना के तल पर ऊँचे स्तर की सामग्री सब आपको अंग्रेज़ी में मिलेगी, और हिंदी हमने छोड़ दी है गाली-गलौज करने वालों और रोस्टर्स के हाथों में। ये बीमारी अब छोटे-छोटे कस्बों में, गाँवों में भी पहुँच रही है। अंग्रेज़ी सीखना एक बात है, अंग्रेज बन जाना बिल्कुल दूसरी बात है ना।
इन ''धार्मिक भावनाओं" को इतनी जल्दी ठेस क्यों लग जाती है?
इन ''धार्मिक भावनाओं" को इतनी जल्दी ठेस क्यों लग जाती है?
31 min
आम आदमी को भले ही कम चोट लगती हो, आप धार्मिक आदमी को कहोगे, उसे खट से चोट लगती है। अभी यहाँ कोई बैठा हो बहुत धार्मिक आदमी, वह भीतर से छलनी हुआ जा रहा होगा, “क्या बोल रहे हैं! महापाप!” तुमने अनंत को इतनी छोटी चीज़ क्यों बना दिया कि कोई उसको घाव दे सके, बताओ न। आकाश पर चोट लग सकती है? मारो गोली, आकाश को लगेगी चोट? थूको आकाश पर, आकाश गंदा हो जाएगा? सत्य तो आकाश है, जिसमें घुला जा सकता है उसमें लीन हुआ जा सकता है।
भारत का दुर्भाग्य
भारत का दुर्भाग्य
7 min
कोई आपसे बोले कि कोई आदमी आपसे मिलने आ रहा है और वो धार्मिक है, तो तत्काल बताइए, आप क्या कल्पना करते हैं? कोई ज्ञानी आ रहा है? कोई विद्वान मिलने आ रहा है? तत्काल मन में क्या छवि आती है? एक भावुक-सा आदमी आएगा। यही हमारे साथ सबसे बड़ी गलत बात हुई, हम भावना का देश बन गए, और उसी भावना को फिर हमने धर्म भी बना लिया। और भावना से जो धर्म चलता है, वो फिर अंधभक्ति का धर्म होता है। यही दुर्भाग्य हो गया भारत का, ज्ञान का कोई सम्मान नहीं। जबकि धर्म का अर्थ ही ज्ञान होता है।
नए साल में उत्सव क्यों?
नए साल में उत्सव क्यों?
8 min
आज जाओ किसी रेस्तरां में खाना खाने के लिए, तो बिना बुकिंग के घुसने को नहीं पाओगे। दुनिया है, दुनिया उत्सव मना रही है। ये जो हमारे भीतर मनोरंजन और उत्सव मनाने की ख़्वाहिश रहती है, वो रहती इसीलिए है कि हम सब भीतर से बड़े सूने और उदास हैं। मनोरंजन से उदासी ख़त्म नहीं होती, सिर्फ़ कुछ समय के लिए छुपती है। पता होना चाहिए कि आपका ‘कर्तव्य’ क्या है, और जब कर्तव्य आपकी अपनी समझ से निकलता है, तो उसका नाम ‘धर्म’ हो जाता है।
पुराने से ऊब जाना ही नयापन है
पुराने से ऊब जाना ही नयापन है
17 min
आपका न्यू ईयर झूठा है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि बाकी सब कुछ तो ओल्ड है, ईयर न्यू कैसे हो गया? कैलेंडर के पन्ने फाड़ने से न्यू ईयर कहाँ से आ गया? जब न्यू आएगा, तो सब कुछ न्यू के ही रंग में नहाएगा। ईयर भी न्यू हो जाएगा, स्माइल भी न्यू हो जाएगी, आई भी न्यू हो जाएगी; जब आप ही न्यू नहीं हुए, तो ईयर कैसे न्यू हो गया? हम नहीं बदल रहे, तो हमारी ज़िंदगी में कुछ नया बदलाव कैसे आ जाएगा? अपने पुरानेपन को त्यागना होता है, यही नए का उत्सव है।
Who Owns Your New Year Celebrations?
Who Owns Your New Year Celebrations?
26 min
If I do not know what I want, what can be sold to me? Anything. How do you know you need anything you aspire for? No, no, that need is artificial. And not knowing yourself, you are blissfully unaware that the need is an implanted thing. Remember, the seller is not selling you just his goods. He’s also selling you the need to buy his goods.
Rape: Not an Incident, A Continuity
Rape: Not an Incident, A Continuity
17 min
If you leave yourself weak and vulnerable, you are submitting to the ecosystem of rape. What’s worse? It won’t even be reported. The first thing is: empower yourself through education, through exposure, through wisdom. When it comes to sexual urges, no lessons of morality really succeed. You’ll just be left complaining to the benevolent power up there, “You know, I’m such a pious woman. Why was I violated?” Because that’s how it happens in the jungle. That’s the answer. That’s all.
Messi’s GOAT Tour: Cheers for Gloss, Tears for India
Messi’s GOAT Tour: Cheers for Gloss, Tears for India
19 min
If somebody is a great cricketer, I am all right admiring him irrespective of his nationality; that’s fine. But the question is: why is such adulation and such expenditure reserved only for people outside your own country? Indian soccer is totally starved of funds, but the same fans will not spend this money, not even a fraction of this money. Are we really poor, or are we just poorly directed? We don’t know the right direction to move in because we don’t know the right center to have.
Why China Surged Ahead, India Stood Still
Why China Surged Ahead, India Stood Still
21 min
So much so that, even today, India’s literacy rate is just 77%, and China has almost cent per cent literacy. That’s a huge difference. From where will you get innovation if your kids are not well-educated? And even if they are educated, they are just moving towards the service sector rather than the line of innovation. How will you lead the world? Just having democracy will not take you anywhere if those casting their vote are not educated enough.
विदेशों में भारतीयों से नफ़रत क्यों?
विदेशों में भारतीयों से नफ़रत क्यों?
38 min
अब सोशल मीडिया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का दौर है; बहुत ही व्यर्थ तरीक़े का राष्ट्रवाद। आज जो जितना ज़्यादा अज्ञानी है, वो उतनी ऐंठ में घूम रहा है। एक बहुत अनपढ़ क़िस्म की भीड़ है, जो भारत के राष्ट्रीय जीवन पर छाती जा रही है। गंदी आदतें जगह बदलने से छूट नहीं जातीं। बाहर हिंदुस्तान को इज़्ज़त भी ख़ूब मिली है, पर बाहर उन भारतीयों को इज़्ज़त मिली है जो इज़्ज़त पाने के लायक़ हैं। जो वहाँ पर जाकर गंदगी मचाएँगे, उनको थोड़ी इज़्ज़त दे देंगे? हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम दोबारा हर क्षेत्र में दुनिया में चमकें। पर वो सब करना ध्यान और श्रम का काम है, नारेबाज़ी का काम नहीं है।
सामूहिक अहंकार: राष्ट्र GDP की पूजा क्यों करते हैं और बोध से क्यों डरते हैं
सामूहिक अहंकार: राष्ट्र GDP की पूजा क्यों करते हैं और बोध से क्यों डरते हैं
9 min
राष्ट्रों का निर्माण किसी समाज की परिष्कृत बुद्धिमत्ता से होना चाहिए था, लेकिन वे सामूहिक अहंकार का दर्पण बन जाते हैं। व्यक्ति जो अपनी संपत्ति के साथ करता है, राष्ट्र वही GDP के साथ करता है—जो गिना और तुलना किया जा सके, उसे योग्यता का प्रमाण मान लेता है। हम इसे समझदारी कहते हैं, फिर आश्चर्य करते हैं कि व्यक्ति और देश दोनों सदा घिरे हुए क्यों महसूस करते हैं, मानो विश्राम करना निषिद्ध हो।
गोवा त्रासदी: सेलिब्रेशन माने इंटॉक्सिकेशन?
गोवा त्रासदी: सेलिब्रेशन माने इंटॉक्सिकेशन?
15 min
पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी। इंस्पेक्शन हुआ था गवर्नमेंट एजेंसी से, तो उनको बोला गया था कि भाई, ये सब ठीक करो; उन्होंने ठीक नहीं किया। रेगुलेशंस का उल्लंघन हुआ है, और उसके बाद जो वहाँ चल रहा था, वह बस बेहोशी का समाँ है, उसमें कुछ भी करो। हमारा कोई भी उत्सव हो, समारोह हो, उसका मतलब ही यही होता है कि चेतना को और गिरा दो। हमारे मन में यह बात डाल किसने दी कि सेलिब्रेशन माने इंटॉक्सिकेशन? फिर उसी का एक एक्सट्रीम रूप हमें देखने को मिलता है; ये जो पच्चीस-पचास मौतें हो गईं।
The American Dream is India's Nightmare: GDP is Gross
The American Dream is India's Nightmare: GDP is Gross
17 min
If you see GDP growing at a fast rate, it is not a matter of celebration; it might actually be a warning. Don’t do that. Slow down. GDP is something that you can increase even with a lot of income inequality, as is happening in the case of countries like India. We need clarity. We need to be extremely clear on the definitions of our national imperatives. If development means the images we have been carrying of the United States, that is unsustainable, just not possible.
फ्लाइट कैंसल पर हंगामा
फ्लाइट कैंसल पर हंगामा
11 min
60–65% शेयर है इंडिगो का। आप इंडिगो को सज़ा दे दो, आप बोल दो ‘कल से इंडिगो की उड़ानें बंद,’ तो भारत की दो-तिहाई उड़ानें बंद हो जाएँगी। कौन-सी रेगुलेटरी अथॉरिटी अब इंडिगो को सज़ा दे सकती है? फ्लाइट कैंसल हो गई, तो जो पैसेंजर्स थे, उन्होंने क्रांति कर दी; ऐसे होती हैं क्रांतियाँ? जब जीवन में गीता आती है न, तो जीवन में गरिमा आती है। फिर इंसान कहता है कि ‘मैं आकाश हूँ। मुझे धरती पर ये तिलचट्टा और केंचुआ क्यों बनाया जा रहा है? मुझे मिट्टी में क्यों गाड़ा जा रहा है?’ फिर उठती है क्रांति, भीतर से।
डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना?
डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों चुना?
31 min
डॉक्टर अंबेडकर मृत्यु की रात को भी क्या कर रहे थे? वह धर्म पर ही किताब लिख रहे थे, और उन्हें बड़ी हड़बड़ी थी कि इसको पूरा कर दें। तबीयत बहुत ख़राब थी, दिख रहा था कि जाने वाले हैं। उनकी मृत्यु के बाद वह किताब प्रकाशित हुई, ‘The Buddha and His Dhamma.’ वह कोई पॉलिटिकल या इकोनॉमिक्स की किताब नहीं लिख रहे थे। वह धर्म पर लिख रहे थे। जो भारतीय दर्शन रहा है, उसकी सारी खूबियाँ बौद्ध धर्म में ज़बरदस्त तरीके से मौजूद हैं। बौद्ध धर्म तो पूरा ही जिज्ञासा का धर्म है, रूढ़ियों के लिए वहाँ एकदम ही कोई जगह नहीं है।
What you're using AI for?
What you're using AI for?
12 min
It totally depends on what you're using AI for. You use AI to educate yourself about the climate, and then if AI takes energy to run on the net, still the deal is beneficial. Maybe by educating yourself using AI, you have consumed x units of energy, but the education would mean that you will now save 5x units of energy. So, on the whole it's a favorable deal.
राष्ट्रविकास: क्या सिर्फ़ GDP तक सीमित?
राष्ट्रविकास: क्या सिर्फ़ GDP तक सीमित?
12 min
अर्थशास्त्र का साधारण-सा सिद्धांत है कि ग्रोथ और डेवलपमेंट एक चीज़ नहीं होते। जीडीपी माने बाहरी तरक़्क़ी: सड़क बन गई, फ़ैक्ट्रियाँ ज़्यादा उत्पादन कर रही हैं, इन सब से जीडीपी बढ़ता है। लेकिन यह अपने-आप में अंत नहीं हो सकता, वह सब तभी तक अच्छा है जब तक उससे इंसान को लाभ हो रहा हो। और इंसान को लाभ हो रहा है कि नहीं, यह जानने के लिए इंसान को पहले यह पता करना पड़ेगा कि वह है कौन? ख़ुद को जानना विकास की दिशा में पहला कदम है। राष्ट्र के विकास का सबसे अच्छा तरीका है, राष्ट्र के लोगों को भीतरी तल पर बेहतर बनाना।
हवस और हिंसा रोकने के लिए ये सज़ा दो
हवस और हिंसा रोकने के लिए ये सज़ा दो
31 min
तुम ये माने बैठे हो कि समाज बहुत अच्छा है, क़ानून में बस कमी है। क्यों अपने आपको कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट दे रहे हो? क्यों कह रहे हो कि इस समाज का चरित्र बहुत अच्छा है? क्यों समाज को एक चरित्र प्रमाणपत्र दे रहे हो? मत दो भाई। इस समाज को अच्छा कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट देने की कोई ज़रूरत नहीं है। जो मामले होते हैं न, वो प्रतिनिधि मामले हैं — वे रेप्रेजेंटेटिव मामले हैं। वो ऐसा नहीं कि यूँही कोई आसमान से गिरा एलियन है जो आकर रेप कर गया। वो इसी समाज, इसी मिट्टी से उठा हुआ अपराधी है।
जवाब देना होगा
जवाब देना होगा
5 min
धर्म तो सबसे ऊँची बात होनी चाहिए न? तो धर्म के नाम पर ऐसे काम क्यों कर रहे हो, जो एक छोटे बच्चे को भी दिख रहा है कि गलत है? और सबसे खौफ़नाक बात ये है, कि हमारे बच्चों को धीरे-धीरे झटका लगना बंद हो जाता है। वो इसी माहौल के हो जाते हैं, रच-बस जाते हैं। ज़िंदगी हिसाब करेगी, जवाब माँगेगी और तब लज्जित होने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
Lack of Research Culture in India
Lack of Research Culture in India
13 min
The very nature of research is that there is uncertainty. It’s a dive into the unknown. We fear the unknown so much that we want to stick to known lanes throughout; that’s what explains the lack of a research culture. There are just so many masters all around and over you. Don’t listen to them. All those who stop you from flying high, they are being irresponsible, because they in no way can compensate for the opportunity you lose.
आतंकवादी कैसे पैदा होते हैं?
आतंकवादी कैसे पैदा होते हैं?
30 min
हम अपनी देह के साथ डर लेकर पैदा होते हैं। चूँकि हम में डरने की वृत्ति है, इसलिए समाज भी हमें डरा लेता है। डर से मान्यता आती है, और वही मान्यता आतंकवादी भी बनाती है। चेतना का धर्म आनंद की ओर जाना है। यदि किसी के भीतर यह मान्यता बैठ गई है कि कुछ लोग दुश्मन हैं और उन्हें मारकर आनंद या जन्नत मिलेगी, तो वह मारेगा। आतंकवादी भी अपनी सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं का गुलाम है। अज्ञान ही हर हिंसा का कारण है, और अज्ञान का अर्थ ही मान्यता है।
संविधान: धर्म का फूल
संविधान: धर्म का फूल
57 min
भारत का संविधान एक बहुत सुंदर फूल है, लेकिन वह जिस पेड़ पर लगा है, वह धर्म का पेड़ है। जो मूल्य भारत के संविधान में निहित है, वह दुनिया के ऊँचे से ऊँचे मूल्यों में है। बाहर की दुनिया में हमें वह सब कुछ चाहिए जो हमें संविधान देता है: सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय; वह सारे अधिकार जो एक मुक्त नागरिक के एक मुक्त समाज में होने चाहिए। लेकिन साथ ही साथ हमें वह सब चाहिए जो हमें भीतर से भी तृप्ति देगा: उपनिषद्, भगवद्गीता। हमें दोनों चाहिए।
क्रोध नहीं, विवेक
क्रोध नहीं, विवेक
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आपको सचमुच बुरा, लोगों की जान गई इससे लग रहा है; सचमुच? और अगर जानों का जाना ही इतना बुरा लगता है तो जो सबसे बड़ा नरसंहार है, वह तो नारी-संहार है; वहाँ सवाल क्यों नहीं पूछते? या ऐसा है कि एक पक्ष मज़हबी उन्माद फैला रहा है, तो पलट कर हमें भी फैलाना है? उनसे निपटने के लिए हमारे पास पुलिस है, फ़ौज है, पूरी एक सभ्य, सुसंस्कृत व्यवस्था है, जो उनसे निपट लेगी। जो अपराध कर रहे हैं, उनसे निपटने के लिए उन्हीं जैसा मत बन जाना। रावण को हराने के लिए राम, और राम हो गए। रावण को हराने के लिए राम रावण थोड़ी बन गए थे।
रील्स के शोर में — तुम्हें मज़े नहीं, झटके चाहिए
रील्स के शोर में — तुम्हें मज़े नहीं, झटके चाहिए
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ये लिखी गई है टेढ़े लोगों के लिए, जो भागने में ज़्यादा दिलचस्पी रखते हैं। तो ये उनको पकड़कर बाँधने के लिए है कि खोलोगे, जहाँ ही खोलोगे जिस भी वाक्य को पढ़ोगे, वही वाक्य तुमको पकड़ लेगा। तो इसमें एक ख़ास तरीक़े का आर्किटेक्चरल ट्रैप है, इसका शिल्प जो है, वो फँसाने के लिए है।
भारत सबसे धार्मिक और सबसे गंदा देश क्यों?
भारत सबसे धार्मिक और सबसे गंदा देश क्यों?
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मेरे घर का मंदिर साफ़ रहेगा, बाकी मंदिर गंदे हैं तो रहें। क्या फ़र्क़ पड़ता है कि मैं जाकर अपने उद्धार के लिए गंगा में डुबकी मार रहा हूँ और गंगा को गंदा कर रहा हूँ? दुनिया में किसी देश में इतनी गंदी नदियाँ आपको नहीं मिलेंगी। वाराणसी शायद दुनिया का सबसे पुराना नगर है, भोले बाबा की नगरी है, और जाकर देखो गंदगी। ख़ुद साफ़-स्वच्छ होकर रहे आना धर्म नहीं होता। ‘तुझे साफ़ करने की ख़ातिर मुझे ख़ुद मैला होना स्वीकार है,’ यह धर्म होता है।
भारत में हर साल 40 लाख बलात्कार? दिल दहला देने वाला सच!
भारत में हर साल 40 लाख बलात्कार? दिल दहला देने वाला सच!
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जबकि ये जानी-समझी बात है कि स्मृति में जो कुछ लिखा है, उसे श्रुति-सम्मत होना चाहिए, और स्मृति अगर श्रुति का उल्लंघन कर रही है तो स्मृति को हटा दो, श्रुति की बात मानी जाएगी, क्योंकि श्रुति वो देती है जो कालातीत सत्य है। और स्मृति वो बातें कहती है जो उस समय के समाज में प्रचलित हैं। उस समय समाज में जो प्रचलित है, उन चीज़ों को माध्यम बनाकर, सहारा बनाकर, उन चीज़ों को भी सम्मान देकर किसी तरह से धर्म को अशिक्षित लोगों तक भी पहुँचा सको, इसके लिए स्मृति थी।