समाज के ज़्यादातर संसाधन ऐसे नवाबज़ादों के हाथ में हैं, जो डिज़र्व नहीं करते। और जो मेरिटोरियस हैं, वे बेचारे स्कूटी पर चल रहे हैं और इन्हीं नवाबज़ादों द्वारा सड़कों पर मारे जा रहे हैं। यह प्रिविलेज वर्सेस मेरिट का एक मामला है, जिसमें प्रिविलेज ने मेरिट को सड़क पर रौंद दिया। बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा में जितना पैसा लगाना है, लगा दो, पर उनके हाथ में पैसा मत दो। यह बात समाज के लिए भी ठीक नहीं है और उस व्यक्ति के लिए भी, जिसके हाथ में आप अनडिज़र्विंग पैसा दे देते हैं।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। मेरा नाम है सुष्मिता भट्टाचार्य है और मैं जर्मनी के म्यूनिख शहर में रहती हूँ, और यहाँ पर मैं बच्चों के स्कूल में पढ़ाती हूँ। मेरा आज का सवाल जो है वो इस सत्र से रिलेटेड नहीं है।
मेरा आज का सवाल है हाल ही में पुणे में हुए एक ऐक्सीडेंट से, जिसमें कि एक अमीर बाप का बिगड़ा हुआ लड़का, जो कि अपने क्लास ट्वेल्व सीबीएससी रिज़ल्ट को सेलिब्रेट करने के लिए पब जाता है और वहाँ पर वो ड्रिंक करके रात को अपने पाँच करोड़ रूपए के स्पोर्ट पोर्शे कार को लेकर दो-सौ किलोमीटर के ऊपर की गति में रास्ते में भगाता है और उसने दो आईटी एम्प्लॉईज़ को वहाँ पर उड़ा दिया।
तो मेरा प्रश्न ये है कि जैसे कि उसने ये किया, उसके बाद उसको पन्द्रह घंटे के अन्दर ही बेल मिल गई और उसको बताया गया है कि वो पन्द्रह दिन तक ट्रैफिक पुलिस के साथ रहेगा और वहाँ पर वो ट्रैफिक रूल्स सीखेगा। और एक बताया गया है कि वो तीन-सौ शब्दों का एक निबन्ध लिखेगा ऐक्सीडेंट के ऊपर, बस यही इसकी सज़ा है क्योंकि वो अठारह साल से चार महीने कम है। उसकी उम्र है सत्रह साल आठ महीना।
तो मेरा प्रश्न ये है कि हमारे देश में कौन-सी उम्र को हम ये मान सकते हैं कि वो अपने करने के लिए वो अपना जो दोष है या फिर जो करता है उसके लिए अपनी ज़िम्मेदारी लेने के लिए एलिजिबल है।



