मीडिया कंपनी प्रॉफिट के लिए होती है, सच्चाई दिखाने के लिए नहीं! अख़बार इसलिए नहीं छपता है कि तुम तक सच पहुँचे। अख़बार इसलिए छपता है कि तुम तक विज्ञापन पहुँचे। सच उनको दिखाया जाता है, जो सच सुनने के काबिल होते हैं, जो झूठ के ख़िलाफ़ संघर्ष करने को तैयार बैठे हैं। जब तुम झूठ की खुराक लेने को राज़ी ही हो, तो तुम्हें सच कोई क्यों दिखाए?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, मेरा सवाल कुंभ मेले को लेकर है। हम देख रहे हैं कि देश-विदेश की सभी निगाहें कुंभ मेले पर हैं। लेकिन मीडिया के द्वारा हम देख रहे हैं कि हमारे सबसे सुंदर साधवी को दिखाया जा रहा है। किसी की आँखें सुंदर हैं, जैसे मोनालिसा को दिखाया जा रहा है, आईआईटी बाबा को दिखाया जा रहा है।
हमें सुनने में आता है कि कुंभ मेला एक धार्मिक क्षेत्र है, जहाँ पर देश-विदेश के धर्म के जो ज्ञाता हैं, वे एक जगह इकट्ठा होकर धर्म की चर्चा करते हैं। तो क्या मीडिया के द्वारा जान-बूझकर हमारे वास्तविक धर्म को छुपाया जा रहा है, या फिर यही सच्चाई दिखाई जा रही है, मीडिया के द्वारा?
आचार्य प्रशांत: इसमें बुरा क्या लग रहा है?
प्रश्नकर्ता: इसमें बुरा यह है कि, आचार्य जी, सभी लोग देख रहे हैं कि कुंभ मेला लग रहा है।
आचार्य प्रशांत: हाँ, तो?




